Self confidence Books in Hindi-बिना कार्य-योजना कार्य आरम्भ करना, विफलता को आमन्त्रित करना है

Self confidence Books in Hindi-

Self confidence Books in Hindi-बिना कार्य-योजना कार्य आरम्भ करना, विफलता को आमन्त्रित करना है (To Start an Act With Out an Action Plan Medns to Invite Failure) 

1.यह सही है कि सोचना-समझना, सचमुच परिश्रम का काम है, परन्तु बिना सोचे-समझे आगे बढ़ना भी जोखिम का काम है. याद रखें, किसी निश्चित कार्य योजना के साथ चलना ही जोखिम को नियन्त्रित करना है, किसी आयोजन की सफलता उसकी योजना पर ही निर्भर करती है.

2. सोने-जगने, घूमने-फिरने, व्यायाम-प्राणायाम, नहाने-धोने, खाने-पीने, मिलने-जुलने, यात्रा-प्रवास, हास-परिहास, आमोद-प्रमोद जैसे दैनिक कार्यों को भी यदि हम योजनाबद्ध एवम् समयबद्ध तरीके से नहीं करेंगे तो हमारी समूची दिनचर्या ही प्रभावित हो जायेगी, तब हम किसी भी कार्य के प्रति न्याय नहीं कर सकेंगे. कार्यों की सफलता योजनाबद्धता पर ही निर्भर करती है.

3. हवा का रूख देख कर योजना बनाइए, वरना झंझावातों में आप ठहर नहीं पायेंगे. यदि पेड़-पौधे हवा के साथ झुक नहीं सके, तो अपनी जड़ों पर कितनी देर ठहर पायेंगे. इसलिए यदि अपनी जड़ों पर जमें रहना है तो अपने आपको समयानुकूल समायोजित करते चलिए. व्यावहारिक योजना बनाइए.

4. जो भी योजना बनायें, उस पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ अमल करें. अनावश्यक विलम्ब न करें. योजना के क्रियान्वयन में विलम्ब हो जाने पर पूरी योजना ही खटाई में पड़ सकती है. जिस योजना पर आप आज अमल कर सकते हैं, उस पर कल आप अमल नहीं कर पायेंगे. विलम्ब करने पर योजना की लागत बढ़ जायेगी. कल कोई नयी योजना आ सकती है. परिवर्तित परिस्थितियों में योजना अर्थहीन हो सकती है. इसलिए जिस योजना पर कार्य करना हो, तत्काल कार्य आरम्भ कर देना चाहिए, ताकि अनावश्यक गतिरोध उत्पन्न न हो…

5. बाजार जाना छोटी सी घटना है, किन्तु यदि कोई योजना बनाकर जायेगा तो जाना सार्थक हो जायेगा. सर्वप्रथम बाजार सम्बन्धी कार्यों को सूचीबद्ध करें. जो कार्य दो-चार दिन बाद किया जाना हो, उसे भी आज की सूची में शामिल कर लें. यात्रा कार्यक्रम निर्धारित करें। पर्याप्त धन राशि एवम् उचित वाहन लेकर निकलें. सामान के लिए खाली बेग आदि साथ ले लें. फिर योजनानुसार एक ही राउण्ड में निर्धारित समय सीमा में आज की सूची के सभी कार्य करने के प्रयास करें. खरीदे गए सामानों एवम् सम्पादित कार्यों को टिक करते चलें, साथ ही यह भी विचार करते चलें कि सूची के अलावा भी कुछ आवश्यक कार्य और हो सकते हैं, उन्हें भी साथ-साथ निपटाते चलें. और खुशी-खुशी घर लौटें. इस तरह आप बार-बार बाजार जाने और बाजार में एक से अधिक बार चक्कर लगाने से बच सकेंगे. अपने समय के साथ-साथ दुकानदार का समय भी बचा सकेंगे. याद रखें, समय और साधनों की बचत करना ही इन्हें निवेशित करना है.

6. हर कार्य के लिए चरण दर चरण योजना बनाकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है. आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता एवम् दृढ़ता के साथ योजना को लागू करना ही सफलता के लिए प्रथम व अन्तिम शर्त है. कार्य चाहे छोटा हो या बड़ा, योजनानुसार पूरा करने पर कार्य समय पर पूरा होगा, गुणवत्ता के साथ पूरा होगा और पूँजी व श्रम का अपव्यय भी नहीं हो पायेगा.

7. अपने कार्यों की दैनिक, साप्ताहिक, मासिक एवम् वार्षिक योजनायें बना लें. फिर योजनानुसार चलने और ढलने को अपनी आदत बना लें. तब काम करने में मजा भी आयेगा और समय तथा अन्य संसाधनों की बचत भी होगी. तब बार-बार सोचना भी नहीं पड़ेगा. वस्तुतः योजनाबद्धता ही जीवन की कला है. योजनाबद्धता में ही सबका भला है.

8. योजना इस प्रकार बनावें कि नियमित कार्यों के साथ-साथ आकस्मिक कार्यो के लिए भी समय बचाया जा सके, हर काम योजनाबद्ध करेंगे, तब ही खुद पर भरोसा कर सकेंगे. जब खुद पर भरोसा करेंगे, तब ही खुदा पर भरोसा कर सकेंगे. जब खुदा पर भरोसा करेंगे, तब ही अपने काम से प्यार कर सकेंगे. और जब अपने काम से प्यार करेंगे तो योजना तो स्वतः ही बनती चली जायेगी, जब किसी कार्य को हाथ में लिया जाय तो एक रूपरेखा बनाइए. कार्य के आकार, उपलब्ध संसाधन, कार्य के दौरान संभावित आय, ऋण योजना, कार्य की संभावित समयावधि, कार्य के निरीक्षण, क्रियान्वयन एवम् अपेक्षित सामग्री की आपूर्ति हेतु विस्तृत योजना तैयार कर लें और फिर योजनानुसार कार्य करते चलें, सफलता अवश्य मिलेगी.

9. अपनी अभिरूचि, आधारभूत जानकारी, उपलब्ध आर्थिक एवम् भौतिक संसाधनों के अनुरूप समय एवम् स्थान को दृष्टिगत रखते हुए सर्वप्रथम अपने कार्य का चयन करें, फिर उसकी एक विस्तृत कार्ययोजना, एक व्यावहारिक रूपरेखा तैयार करें और पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से उस पर अमल करें, योजनानुसार निरन्तर आगे बढ़ने वाले को कोई रोक नहीं सकता.

दृष्टान्त –एक व्यक्ति ने अपने शहर में ‘प्रोपर्टी डीलिंग’ का व्यवसाय शुरू किया. बिना सोचे समझे शहर के व्यस्त इलाके में एक शानदार ऑफिस किराये पर लिया और काफी खर्चा करके उसे भव्य रूप दिया गया. बाहर बड़ा सा बोर्ड भी लगा दिया. एक नौकर भी बरामदे में बिठा दिया गया, किन्तु ग्राहकों का आना शुरू नहीं हुआ. कुछ मिलने वाले आते भी तो चाय पीकर ऑफिस की तारीफ करते हुए चले जाते. वस्तुतः डीलर ने व्यवसाय शुरू करने से पहले कोई कार्य योजना नहीं बनाई थी. नगर की भावी योजनाओं की कोई जानकारी नहीं जुटाई थी. आबादी विस्तार किस तरफ ज्यादा और तेजी से होगा ? कौन-कौनसी योजनायें स्वीकृत हैं ? कौनसी कॉलोनियाँ नियमित हो चुकी हैं ? आधारभूत ढाँचा कहाँ और कब तैयार होगा ? कहाँ पर कृषि भूमि उपलब्ध है ? कहाँ पर रूपान्तरित भूमि उपलब्ध है ? ऑफिस किस स्थान पर होना चाहिए ? क्या घर से ही ऑफिस संचालित नहीं किया जा सकता ? कहाँ पर ऑफिस सस्ता पड़ेगा ? प्रचार-प्रसार के लिए क्या करना चाहिए ? अभी सस्ती जमीन कहाँ पर मिल सकती है ? ग्राहकों को कैसे आकर्षित किया जा सकता है ? आदि सभी पहलुओं पर विचार कर एक विस्तृत योजना तैयार की जानी चाहिए थी और योजनानुसार ही कार्य आरम्भ करना चाहिए था. 

Self confidence in hindi- काम करने वाले के लिए कभी काम की कमी नहीं होती (No Body is Under Worked, If he Has A Will to Work) 

Self confidence Books in Hindi-

1.यह तो एक शाश्वत सत्य है कि कर्महीन व्यक्ति ही भूखा मरता है. कर्मशील व्यक्ति सदैव व्यस्त रहता है. वस्तुतः व्यस्तता ही सफलता है. व्यस्त रहने वाले व्यक्ति के लिए कभी काम की कमी नहीं हो सकती. व्यस्त व्यक्ति को काम की तलाश नहीं करनी पड़ती, काम खुद-ब-खुद मिलते चले जाते हैं.

2. जो भी काम आप करें, अगर पूरी लगन के साथ करेंगे तो पीछे मुड़कर देखने की फुरसत ही नहीं मिलेगी. पीछे मुड़कर देखने पर कुछ न कुछ तो कमी खलेगी ही. इसलिए जो भी काम मिले या आप चुनें, उसे पूरी कर्मठता के साथ करते चलें. तब आपके इसी काम में नये-नये काम सृजित होते चले जायेंगे और आपको कार्यों की तलाश के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

3. बाहर खोजने की बजाय काम की खोज भीतर करें. अपनी क्षमताओं को पहचानें. अपनी शारीरिक, मानसिक एवम् आध्यात्मिक शक्ति को जानें. तब आपके अन्दर व बाहर उत्साह एवम् उमंग की बहार होगी. प्रकृति का नियम है कि खाली स्थान भरता है. जब आपके पास कोई काम नहीं होता, तब कोई न कोई कार्य आपकी प्रतीक्षा कर रहा होता है, बशर्ते कि आप उसके लिए तैयार रहें.

4. कुछ भी हो, हमारे यहाँ आर्थिक एवम् प्राकृतिक संसाधनों की आज भी कहीं कोई कमी नहीं है. धैर्य एवम् गांभीर्य के साथ कार्य करने वाले के लिए आज भी रोजगार की कमी नहीं है. यही कारण है कि हमारी प्रगति धीमी ही सही, पर थमी नहीं है. सच तो यही है कि आज अवसरों में बहुत तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है. इसलिए वक्त को पहचान कर कार्य में संलग्न रहने वाले के लिए कोई कठिनाई नहीं है.

5. आजकल फोन, मोबाईल, टी.वी., सी.डी., डी.वी.डी. प्लेयर, विडियो गेम, म्यूजिक सिस्टम, इन्वर्टर, कम्प्यूटर, केमरा, फ्रीज, वाशिंग मशीन, कूलर, ए.सी., मिक्सर ग्राइण्डर, ओवेन, कुकिंग रेंज, वाटर प्यूरीफायर, वैक्यूम क्लीनर, केलकुलेटर जैसी अनेकों इलैक्ट्रीकल्स एवम् इलैक्ट्रोनिक्स वस्तुएं तेजी से घर-घर पर पहुँच रही हैं, आप बस कुछ उपकरणें की मरम्मत का काम सीख लें, फिर देखें, आपको फुरसत ही नहीं मिलेगी. बस ईमानदारी एवम् समय की पाबन्दी के साथ काम करते रहें. जब वस्तुएं होंगी तो खराब भी होगी ही. आप ग्राहकों के घर जाकर भी सेवायें दे सकते हैं. बस थोड़ा सा प्रचार कर दीजिए, फिर आपको और आपके फोन को फुरसत ही नहीं मिलेगी.

6. कल तक तो उपभोक्ता को बाजार तक जाना पड़ता था, किन्तु अब बाजार उपभोक्ता के घर दस्तक देने लगा है. आप इस नयी व्यापारिक संस्कृति को अपना व्यवसाय बना सकते हैं. किसी अच्छी कम्पनी के उत्पाद घर-घर पहुँचाने का काम हाथ में ले सकते हैं. इसके लिए अधिक धन की भी आवश्यकता नहीं होती. ऐसे व्यवसाय में माल नकद में बिकता है और घाटे की कोई संभावना नहीं होती. ऐसे व्यवसाय के लिए न दुकान की आवश्यकता है, न किसी आधारभूत ढाचें की.

7. आजकल पुरानी वस्तुएं बेच कर नयी वस्तुएं खरीदने का चलन भी बढ़ रहा है. किन्तु इसके लिए अभी उपभोक्ताओं को कोई उचित नेटवर्क नहीं मिल पा रहा हैं. आप इस नेटवर्क में आ सकते हैं. पुरानी वस्तुएं बिकवा कर आप दोनों पक्षों से अपना कमीशन प्राप्त कर सकते हैं. नयी वस्तुओं की बिक्री में भी सहयोग कर सकते हैं. भूखण्ड, भूमि और भवन बिकवाने में भी आप मध्यस्थ बन सकते हैं, प्रोपर्टी के धन्धे में करोड़पति बनने में अधिक समय नहीं लगता.

8. मनुष्य में सचेतन प्रयास से अपने जीवन को ऊँचा उठाने की अपार संभावनायें होती हैं. क्षमताओं की कमी भी नहीं होती, बस किसी काम से जुड़ना पड़ता है. जो किसी काम से जुड़ जाता है, उसमें विनम्रता, सदाशयता और आत्मविश्वास की कमी नहीं होती. काम करने पर ही आत्मविश्वास बढ़ेगा. आत्मविश्वास बढ़ने पर काम की कमी नहीं रहेगी.

9. सबसे बड़ा आश्चर्य तो यही है कि आजादी के साठ साल बाद भी हमारे देश में करीब चार करोड़ लोग बेरोजगार हैं. अर्द्ध-बेरोजगारी की समस्या तो और भी भयानक है. विश्व की तुलना में हमारे यहाँ केवल 24 प्रतिशत की भू भाग है, जिस पर विश्व की 17 प्रतिशत जनसंख्या रहती है. हमारी गरीबी का मुख्य कारण यही है और यही कारण है कि आज भी हमारी एक-चौथाई जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे है. यदि यही स्थिति रही तो आने वाला समय और भी भयावह होता चला जायेगा. यदि हम अपने लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए काम के अवसर चाहते हैं, तो हमें सर्वप्रथम जनसंख्या पर रोक लगानी पड़ेगी.

दृष्टान्तकाम की तलाश के लिए एक छोटा सा उदाहरण देखिए. यदि आपके आस-पास कोई बड़ी फैक्ट्री है, जिसमें आपको काम मिलना मुश्किल है, तो आप यह पता लगाइए कि फैक्ट्री में कच्चा माल कहाँ से आ रहा है ? कच्चे माल की आपूर्ति एवम् परिवहन में कौन कर्मचारी कितनी दलाली खा रहा है ? क्या यही सामग्री किसी दूसरी जगह भी उपलब्ध है ? यदि हाँ, तो फौरन् फैक्ट्री मालिक को इन घोटालों से अवगत करवा दें. बहुत संभव है, फैक्ट्री वाला आपको इसी काम के लिए रख ले. यदि न रखें, तब भी आप कच्चे माल की सप्लाई के लिए मध्यस्थ तो बन ही सकते हैं. अर्थात् इस तरह अपने लिए कार्य का सृजन कर सकते हैं. 

अपने आपको बदलिए, बार-बार काम मत बदलिए (It is Better to Change Yourself, Then to Change Your Assignments) 

Self confidence Books in Hindi-

1.अपने कार्य का चयन काफी सोच विचार कर करें. पसंद, योग्यता, क्षमता, उपयोगिता, समय और स्थान को दृष्टिगत रखते हुए कार्य का चयन करें. फिर सकारात्मक सोच के साथ प्रसन्नतापूर्वक अपने आपको कार्य के प्रति समर्पित कर दें, तब आपको सफलतायें अपने आप मिलती चली जायेंगी और आपको कभी अपना कार्य बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. पर हाँ, तब आप अपने मुख्य कार्य के साथ-साथ अन्य सहयोगी कार्य भी हाथ में ले सकते हैं,

2. यह तो निश्चित है कि हर कार्य में कठिनाइयाँ आती हैं. आरम्भ में कुछ अधिक आती हैं, पर इसका मतलब यह तो नहीं कि आप घबरा कर काम ही बदल दें. हर कार्य में धन लगाना पड़ता है. हर कार्य में दिल, दिमाग, श्रम और समय लगाना पड़ता है. यदि आप अपनी लागत वसूल होने से पूर्व ही अपना काम बदल लेते हैं तो जरा सोचिए, तब समय, श्रम, संसाधनों एवम् अनुभवों का कितना अपव्यय होगा. फिर इस बात की भी क्या गारण्टी कि नये कार्य में आप सफल हो ही जायेंगे,

3. यदि आपको लगता है कि आपका चयन गलत था अथवा परिस्थितिवश अब वर्तमान कार्य में अधिक दम नहीं रहा है और आप किसी नये कार्य में अधिक सफल हो सकते हैं, तब सावधानीपूर्वक अपना कार्य बदल सकते हैं. परन्तु याद रखें, नये कार्य में उन सब गलतियों को मत दोहराइए, जिनके कारण आपको कार्य बदलना पड़ा था.

4. किसी कार्य को समय पर आरम्भ करना और फिर उसे विपरीत परिस्थितियों में भी जारी रखना ही सबसे बड़ी सफलता है. डर कर कार्य को बीच में छोड़ देना या मन लगाकर नहीं करना ही विफलता है. पिछली बातों, घटनाओं, दुर्घटनाओं एवम् विफलताओं को भूल कर यदि आप अपने कार्य को नये सिरे से, नये नजरिये से व्यवस्थित करते हुए उत्साह के साथ करते रहेंगे तो यही कार्य आपको कार्य-संतोष एवम् सफलता देता चला जायेगा.

5. याद रखें, कार्य स्थल से बढ़कर कोई मन्दिर नहीं और कार्य से बढ़कर कोई पूजा नहीं. जब आप अपने कार्यस्थल को मन्दिर समझ लेंगे, तब बार-बार मन्दिर बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. फिर भी यदि परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों तो परमात्मा को दोष मत दीजिए, परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाइए. अपनी कठिनाइयों का पता लगाइए, तब दोष काम में नहीं, आपमें ही मिलेगा. इसलिए परिस्थितियों के दास मत बनिए, परिस्थितियों को अपना दास बनाइए. जो कर रहे हैं, उसे ही बेहतर बनाइए. 

6.बार-बार कार्य बदलने की बजाय, अपने कार्य को आधुनिक परिवेश में व्यवस्थित करें. अपनी विफलताओं का गंभीरतापूर्वक विश्लेषण करें. कार्य-स्थल के वातावरण को अनुकूल बनायें. अपनी विचारधारा एवम् कार्य शैली को परिस्थितियों के अनुरूप ढालें, आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए गुणवत्ता में वृद्धि करते चलें. आपको इसी कार्य में निश्चित रूप से सफलता मिल जायेगी.

7. यदि आप किसी कार्य में सफल नहीं हो पाते हैं, तो मान कर चलें, आपके स्तर पर निश्चित रूप से कुछ कमियाँ अवश्य रही होंगी. सोचिए, क्या काम बदल लेने से कमियाँ बदल जायेंगी ? क्या परिस्थितियाँ बदल जायेंगी? क्या आपकी मनःस्थिति बदल जायेगी ? शायद नहीं. तो काम मत बदलिए, अपनी मनःस्थिति बदलिए, परिस्थितियाँ बदलिए. कमियाँ दूर करिए, कार्य को सम्पूर्णता के साथ करिए, तब आपको अपना कार्य बदला हुआ नजर आयेगा. तब ही कार्य में आनन्द आ पायेगा.

8. इस अस्तित्व में दो व्यक्ति एक से नहीं हो सकते. एक सा ही काम करने वाले विभिन्न व्यक्तियों के कार्य-परिणाम भी एक से नहीं हो सकते. इसलिए आपको अधिक दुःखी होने की आवश्यकता नहीं है. आप तो अपना कार्य अपने तरीके से करते रहें, किसी से तुलना करने की आवश्यकता नहीं है. तुलना तो संभव भी नहीं है. संभव तो सिर्फ काम करना है. जो भी करें, उसे अपने नाम करना है. याद रखें, बार-बार काम बदलते रहने से तो जो कुछ संभव है, वह भी असम्भव हो जायेगा.

9. जो रातों-रात करोड़पति बनना चाहता है, जो एक साथ कई लक्ष्य साधना चाहता है, वही बार-बार काम बदलना चाहता है. याद रखें, जो एक साथ कई जगह पहुँचना चाहेगा, वह कहीं भी नहीं पहुँच पायेगा. बार-बार काम बदलने का अर्थ होगा, हर बार पीछे की ओर जाना. यह भी याद रखिए, पीछे जाने की भी एक सीमा होती है. इसलिए जिस कार्य के प्रति आपको आशंका हो, उसे आरम्भ ही मत करो और आरम्भ कर दिया तो फिर पीछे मत हटो. डटे रहोगे तो तमाम आंशकायें निर्मूल होती चली जायेंगी.

दृष्टान्त- मिस्टर प्रयोगचन्द एक अति उत्साही युवक थे. आरम्भ में उसने प्रोपर्टी डीलिंग का व्यवसाय प्रारम्भ किया. खूब भाग दौड़ की, किन्तु कामयाबी नहीं मिली. पैसा भी काफी फँस गया. खरीदे हुए या सौदा किए हुए भूखण्ड तेजी से नहीं बिक रहे थे. परेशान होकर प्रयोगचन्द ने बिल्डिंग मैटेरियल का व्यवसाय आरम्भ कर दिया. प्रोपर्टी के नये सौदे बन्द कर दिए. किन्तु वह नया व्यवसाय दो साल भी ठीक से नहीं कर सका. यहाँ भी लेनदारियाँ और देनदारियाँ बढ़ गईं. रिजेक्टेड सामग्री काफी बच गई. प्रयोगचन्द ने यह व्यवसाय भी बन्द कर दिया और बिजली के सामान की दुकान लगा ली. तीन साल तक इस दुकान में काफी मेहनत की, किन्तु यहाँ भी सफलता नहीं मिली. काफी पैसा उधारी में फँस गया. रिजेक्टेड माल का दुकान में ढेर लग गया. किन्तु इसी दौरान प्रोपर्टी में काफी उछाल आ गया. प्रयोगचन्द ने बिजली की दुकान बन्द कर पुनः प्रोपर्टी का काम संभाल लिया. भूखण्डों की कीमतें पाँच गुना बढ़ गई थीं. प्रयोगचन्द को लाभ होने लगा. किन्तु उसे इस बात का भी पछतावा था कि उसने बार-बार काम बदल कर समय और पूँजी का कितना अपव्यय कर लिया है. यदि प्रोपर्टी के धन्धे में ही लगा रहता तो आज कहाँ से कहाँ पहुँच चुका होता. 

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