अद्भुत रहस्य दुनिया-अदृश्य शक्तियों का रहस्य 

अद्भुत रहस्य दुनिया-अदृश्य शक्तियों का रहस्य 

अद्भुत रहस्य दुनिया-अदृश्य शक्तियों का रहस्य 

टेलीफोन की घण्टी बराबर बज रही थी। कुछ देर बाद वकील साहब ने टेलीफोन का रिसीवर उठा कर कान से लगाया और बोले, ‘हैलो-हैलो! कौन साहब बोल रहे हैं? ‘ किन्तु उधर से आवाज आती प्रतीत न हुई। इसलिए वकील साहब ने चोगा नीचे रख दिया। किन्तु ज्यों ही वे पास वाली कुर्सी की ओर बढ़े तो घन्टी फिर जोर-जोर से बज उठी। 

रिसीवर उठाकर वकील साहब ने अत्यन्त शालीनता के साथ कान से लगाया तो कोई भद्दी गाली बकने लगा। वकील साहब को भारी हैरानी हुई कि आखिर ऐसा धूर्त व्यक्ति कौन हो सकता है। और कोई भी ऐसी गाली क्योंकर बक सकता है? खैर, उन्होंने रिसीवर रख दिया किन्तु ऐसा क्रम बारबार एक या दो दिन नहीं बल्कि काफी दिनों तक चलता रहा। 

अद्भुत रहस्य दुनिया-अदृश्य शक्तियों का रहस्य 

कभी कोई फोन पर भद्दी गालियां बकता तो कभी घन्टी निरर्थक ही बजती रहती। किन्त कई दिन तक लगातार ऐसा होते रहने के बावजूद वकील साहब यह भी पता न लगा सके कि आखिर उन्हें नाहक ही कौन तंग कर रहा है। एक दिन अचानक ही बिना स्विच ऑन किए कमरे की ट्यूब लाइट तेजी से चमकने लगी। शैड एकदम जला, फिर फूट पड़ा। किन्तु कमरे में बराबर उत्पात होता रहा। तब आखिर वकील साहब ने विद्युत विभाग से सम्पर्क स्थापित किया। ओवरसीयर से लेकर बिजली विभाग के इन्जीनियर तक उस कमरे में पधारे। वे सारे सर्किट की ओवर हॉलिंग कर गए पर निरर्थक उपद्रव बन्द नहीं हुआ। इस अजीब घटना से वकील साहब का बुरा हाल था। 

यह सत्य घटना रोजेन हीम के एक वकील के साथ घटी थी। वकील साहब इन समस्याओं से किसी प्रकार नहीं निबट सके तो उन्होंने पुराने परा मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर हांस वेन्डर जो फ्री वर्ग संस्था में पैरा साइक्लोजी विभाग के अध्यक्ष थे, की मदद ली। प्रोफेसर वेन्डर ने बतलाया कि सब कुछ देख चुकने के बाद मैं इस निर्णय पर पहुंचा हूं कि यह मामला मनोगति क्रम का है जिसका अर्थ सूक्ष्म मानसिक शक्तियों से लगाया जा सकता है। 

ऐसी ही एक अन्य घटना बम्बई के फोर्ट इलाके में भी घटी। उस इलाके में रहने वाली एक महिला को कुछ दिन पूर्व एक गुमनाम पत्र मिला जिसमें उसे कई तरह की धमकियां दी गई थीं। पत्र से स्पष्ट था कि ऐसा कार्य कोई भी भद्र पुरुष नहीं कर सकता था। निष्कर्ष यही निकला कि यह कार्य निश्चय ही किसी धूर्त व्यक्ति ने किया है। इसलिए उक्त महिला की पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई। संयोगवश एक दिन वह महिला कुछ आवश्यक वस्तुएं खरीदने के लिए बाजार गई। उस समय उसका नौकर भी साथ था। नौकर ने सतर्कता के विशेष निर्देशों का पालन किया तब भी उस महिला की पीठ पर ब्लेड के निशान पाए गए। जिनसे रक्त बह रहा था और महिला को दर्द भी हो रहा था। 

महिला के साथ हुई इस अजीब घटना को पुलिस ने किसी जेब कतरे के सन्दर्भ में जोड़ा। पुलिस के अनुसार संभवत: महिला के कंधे से लटके हुए बैग को जेब कतरा काटना चाहता होगा। उन्होंने गुप्त रूप से भी निगरानी रखी किन्तु कोई भी व्यक्ति उन्हें दिखलाई नहीं दिया। दूसरे रोज जब महिला घूमने के लिए अपने पतिदेव के साथ चौपाटी की ओर गई तो बाहें, पैर और शरीर के अन्य अंग-प्रत्यंग भी ब्लेड से कटे हुए पाए गए। उसके कपड़े जगह-जगह से कट गए थे। चारों ओर अजीब समा बंधा था और आश्चर्य भी कुछ कम प्रतीत नहीं हो रहा था। 

प्रसिद्ध परा मनोवैज्ञानिक ऐलन कारडेक ने इस प्रकार की सैकड़ों घटनाओं के बाद ‘दि मौडियम्स’ नामक अपनी पुस्तक में लिखा है कि अच्छे लोग भी परिस्थितिवश यदा-कदा दुराचार कर बैठते हैं। लेकिन वे इस अवस्था को शीघ्र ही पार करके मृत्यु की गहरी निद्रा में विलीन हो जाते हैं। किन्तु अधोगति के शिकार लोग बहुत समय तक इसी योनि में पड़े रहते हैं। वे अंधकार तथा दुर्गन्धयुक्त स्थानों पर भ्रमण करते हैं। इनमें से अधिकांश भूत-प्रेत अपनी योनि सुधारने के निमित्त प्रयत्नशील होकर भलाई का कार्य करते हैं। 

उन्होंने पुस्तक में लिखा है कि स्कॉटलैण्ड के राजघराने संसार में प्रसिद्ध रहे हैं। वहां चौथे जेम्स से पहले एक राजा अधोगति का शिकार हुआ था। जिसने जेम्स चतुर्थ को कई बार दर्शन भी दिए। जेम्स चतुर्थ इंग्लैण्ड पर बराबर आक्रमण करता रहा। इस रक्तपात के विरुद्ध प्रेत ने कई बार उसे चेतावनी भी दी। एक बार तो उसने यहां तक कह दिया कि इस युद्ध से तुम वापिस नहीं लौट सकते हो और हुआ भी यही कि लड़ाई के दौरान जेम्स चतुर्थ मारा गया। 

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