Scary Stories in Hindi-खून पीने वाली प्रेतात्माएं 

Scary Stories in Hindi

Scary Stories in Hindi- खून पीने वाली प्रेतात्माएं 

विश्व के हर देश में रक्त पीने वाली प्रेतात्माओं के अस्तित्व के विषय में दृढ़ मान्यता रही है, जिन्हें अंग्रेजी में वैम्पायर’ कहा जाता है। प्राचीन असीरिया से लेकर कम्युनिस्ट खेमे वाले योरोपीय देशों तक के लोक साहित्य और दंत कथाओं में ही नहीं, उत्कृष्ट शास्त्रीय साहित्य तक में उनके प्रति भरपूर विश्वास देखने को मिलता है तथा उनकी बहुतायत से चर्चा है। 

सोलहवीं सदी में अंग्रेजी के महान नाटककार विलियम शेक्सपीयर ही नहीं, उसके बाद 18वीं 19वीं सदी तक प्रबुद्ध लोग चुडैलों, भूतों तथा आगे के दो बड़े-बड़े दांतों वाली मानव-रक्तपायी प्रेतात्माओं-वैम्पायरों के प्रति दृढ़ विश्वास रखते थे। गेटे, गिओवानी, पोलिडोरी, पीटर मार्शनर अपनी साहित्यिक कृतियों में उनका सदुपयोग करते थे। यह माना जाता था कि वैम्पायर रात में आकर जीवित व्यक्तियों खासतौर से बच्चों तथा स्वस्थ लोगों का खून पी जाते हैं। वैम्पायर के शिकार उनके अजीज और रिश्तेदार होते हैं, फलस्वरूप व्यक्ति की अवश्यंभावी मृत्यु हो जाती है। यह भी मान्यता है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु इस तरह होती है, वह वैम्पायर ही बनता है। 

Scary stories in hindi-खून पीने वाली प्रेतात्माएं 

ग्रीक लोगों की मान्यता थी कि शैतान धर्मच्युत लोगों को वैम्पायर बनाता है तथा उन्हें जीवित रखता है। कहीं-कहीं मृत्यु के बाद सयाने लोग ध्यान से शव की जांच-पड़ताल करते थे कि उस व्यक्ति की मौत कहीं किसी वैम्पायर द्वारा खून पी लेने से तो नहीं हुई। यदि ऐसा शुबहा हुआ, तो किसी हरे पेड के नकीले खंटे से उस मृतक का शरीर गोद कर गला काट देते थे तथा उसके दिल को निकालकर जला दिया जाता था। 

16वीं से 18वीं सदी के बीच जगह-जगह इन आशंकाओं के चलते कि मृतक वैम्पायर है, बहुत सी कब्र खोदकर शवों को गोदा गया, सिर काटे गए तथा दिल निकालकर जलाए गए। 

फ्रांसीसी दार्शनिक ‘ज्यां जैक्विस रूसो’ ने वैम्पायरों के अस्तित्व को न्याय, धर्म और चिकित्सकीय प्रमाणों से सिद्ध किया है और वे उन्हें वैद्य तथा इतिहास-सम्मत बताते हैं । इस अवधि में वैम्पायरों से जुड़े बहुत से कथित मामले सामने आए। सन् 1732 में सर्बिया के गांव ‘मेडिंग्ना’ (जिसे मैड्रिगा अथवा मेडवेग्या भी कहते हैं) में भारी संख्या में लोगों की मृत्यु हुई, जिसका जिम्मेदार पूरी तरह से वैम्पायर को ही माना गया। इसके जांच दल को ‘डेपुटेशन आफ बेलग्रेड’ की संज्ञा दी गई तथा उसे निर्विवाद साक्ष्य के रूप में संपूर्ण योरोपीय विश्व विद्यालयों और अन्य संस्थाओं ने स्वीकार किया। 

स्थानीय दंतकथाओं से प्रेरित अंधविश्वासी किसान और जन सामान्य ने ही ऐसे निष्कर्ष नहीं निकाले थे। भयभीत ग्रामीणों की बात जब हैप्सबर्न सम्राट चार्ल्स चतुर्थ तक पहुंची तो उन्होंने फौज के सम्मानित सर्जनों के दल को जांच के लिए भेजा, जिन्होंने उपर्युक्त निष्कर्ष निकाले थे। उन्होंने मौतों का कारण एक पूर्व सैनिक आर्नोल्ड पायोले के वैम्पायर को बताया। आर्नोल्ड ने शुरू में किसानी की बजाय फौजी बनकर तुर्की के विरुद्ध युद्ध में भाग लेना उचित माना, क्योंकि उसके देश के हंगरी और ट्रांस सिल्वानिया से जुड़े दक्षिणी सरहदी इलाकों पर तुर्कों ने कब्जा कर लिया था।

आर्नोल्ड को तुर्की सर्बिया की सीमा के निकट ‘कसोवा’ में ही ज्यादा तैनात रहना पड़ा था। वैम्पायरों की दंतकथाएं उस इलाके से ज्यादा जुड़ी हुई हैं। बताया जाता है कि तैनाती के बाद आर्नोल्ड पर एक वैम्पायर ने हमला कर दिया तथा उसके शरीर से खून चूसकर उसे मृत मानकर चला गया, किंतु सौभाग्य से आर्नोल्ड की मृत्यु नहीं हुई, वह बच गया। 

आर्नोल्ड को मालूम था कि उसे जीवित पाकर वैम्पायर फिर आकर उसके जीवित रहने तक रक्तपान क्रिया को बार-बार दोहराएगा। संयोग से उसने वह कब्र देख ली, जहां से वैम्पायर निकला था। उसने वैम्पायर को मारकर कब्र के पास की थोड़ी सी मिट्टी भी खा ली। उस समय मान्यता थी कि ऐसा करने से पीड़ित व्यक्ति भविष्य में वैम्पायर से मुक्त रहेगा और खुद भी कभी वैम्पायर नहीं बनेगा। हालांकि आर्नोल्ड इस भय से आगे भी पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया। 

अपने वरिष्ठ अधिकारियों के रोकने के बावजूद आर्नोल्ड ने स्थल-सेना की नौकरी छोडकर उस वैम्पायर पीड़ित क्षेत्र से दूर हट जाना ही मुनासिब समझा। नौकरी के दौरान की गई बचत से उसने मेडिग्ना में जमीन खरीदकर खेती करना शुरू कर दिया। अपने पड़ोसी खेत वाले किसान की बेटी नीना से उसने शादी कर ली। नीना ने जब उसके शरीर पर वैम्पायर द्वारा खून चूसे जाने के दाग देखे तब उसने आर्नोल्ड से इस विषय में पूछताछ की। इस पर आर्नोल्ड ने उसे सारी बात बता दी। 

आर्नोल्ड को बराबर डर लगा रहता था कि जल्दी ही वह मर जाएगा। संयोग से वह एक दुर्घटना में आहत होकर अचेत हो गया और कई हफ्ते की बेहोशी के बाद उसी हालत में उसकी मृत्यु हो गई। यह अभी तक अस्पष्ट है कि जिस घोडागाड़ी से गिरकर वह दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, उससे वह अनजाने में ही गिर गया था या फिर किसी ने उसे घोडागाड़ी के नीचे फेंक दिया था। 

उसको दफनाए जाने के बाद मेडिग्ना में सैकड़ों लोग रक्तअल्पता के शिकार होकर चल बसे। इस पर यह धारणा जोर पकड़ती गई कि आर्नोल्ड के वैम्पायर बन जाने के वे लोग शिकार हुए हैं। बाद में सम्राट द्वारा नियुक्त जर्मन जांच दल ने भी इस बात की पुष्टि कर दी थी। 

Scary stories in hindi -आत्मा ने खोला अपनी मृत्यु का रहस्य 

विश्व मेंबहुत कम ऐसे पढ़े-लिखे होंगे, जिन्होंने सर आर्थर कानन डायल का नाम न सुना होगा। आर्थर कानन डायल जासूसी साहित्य के आरंभिक प्रणेताओं में से एक थे। इन्होंने शरलाक होम्स और वाटसन जस काल्पनिक पात्रों को माध्यम बनाकर बहुत-सी जासूसी कथाओं का सृजन किया था। 

Scary stories in hindi -आत्मा ने खोला अपनी मृत्यु का रहस्य 

एक बार यही आर्थर कानन आस्ट्रेलिया के कीलांग नामक स्थान पर लेक्चर देने को आमंत्रित किए गए, जहां उन्होंने यह सच्ची घटना सुनाई थी। 

काफी समय पूर्व महारानी विक्टोरिया के प्रधानमंत्री के दो साले नाव में बैठकर मेलबोर्न से समद्र की सैर को निकले, परंतु बाद में न तो नाव का ही पता चला और न ही उनके शव मिले। लड़कों के पिता श्रीमान ब्राउन आध्यात्मिक विद्याओं में रुचि रखते थे। उन दिनों इंग्लैंड में आत्माओं से बातचीत करने के लिए एक विशेषज्ञ सज्जन आस्ट्रेलिया से गए तो श्रीमान ब्राउन ने उनसे मिलकर अपने दोनों लापता लड़कों के बारे में पूछा। आत्माओं के विशेषज्ञ ने मरे हुए दोनों लड़कों की आत्माओं को बलाया और पिता से उनकी बातचीत करवाई। एक भाई ने बतलाया कि अचानक तूफान आ जाने के कारण उनकी नाव डूब गई, और वे अपने आपको बचा न सके। दूसरे मरे हुए भाई की आत्मा ने पिता को बताया कि मेरी मां को यहां से दूसरे कमरे में भेज दो, दूसरे भाई के बारे में मैं कुछ कहना चाहता हूं। जब मां दूसरे कमरे में चली गई तो मृत पुत्र की आत्मा ने बताया कि आप माताजी को यह बात न बताएं, मेरा दूसरा भाई डूबा नहीं था। उस पर एक बहुत बड़ी मछली ने हमला कर दिया तथा उसको खा गई। लड़के के पिता ने यह सब कुछ लिखकर अपने रिकार्ड में रख लिया। इस बात का कोई प्रमाण नहीं था कि मृत आत्माओं ने जो कुछ कहा, वह वास्तव में कहां तक सच था? 

कई सालों के बाद कीलांग बन्दरगाह के निकट एक बड़ी शार्क मछली पकड़ी गई। उसे चीरा गया तो उसके पेट से आस्ट्रेलिया के कुछ सिक्के, बटन, मनुष्य की हड्डियां तथा एक जेब घड़ी निकाली, जिस पर उस मरे हुए लड़के का नाम खुदा हुआ था। 

ghost stories in hindi – शैतान का साया 

रोमानिया के तालपां गांव के एक किसान की लडकी ईलियेनोर जगून अपना दादा क घर जा बुहाई में था जाने के लिए रवाना हुई। रास्ते में उसे सड़क के किनारे कुछ सिक्के पड़े मिले। ग्यारह साल की जुगुन ने वे सिक्के उठा लिए और उनसे मिठाई खरीद कर खा ली। 105 वर्षीया दादी के घर पहुंचकर उन्हें सारी बात बताई, तो वह बहुत नाराज हुई और कहा डायन ने तुम्हें ललचाने के लिए सिक्के फेंके थे। अब वह तुझे अपने चंगुल से कभी भी आजाद नहीं करेगी।

ghost stories in hindi - शैतान का साया 

जुगुन को ऐसी बातों पर विश्वास नहीं था। लेकिन दूसरे दिन घर पर अचानक पत्थरों के गिरने से खिड़कियों के कांच टूट गए। इस अनहोनी से वह बहुत डर गई। लेकिन दादी समझ गई कि उसकी पोती पर शैतान हावी हो गया है, उसने उसे तुरंत उसके घर वापस भेज दिया। लेकिन वहां भी घटनाओं का सिलसिला बंद नहीं हुआ। एक दिन पास रखा एक बॉक्स अचानक हवा में उठ गया और कमरे में बैठे उसके एक रिश्तेदार के सिर पर जा गिरा। जुगुन के घर के लोग घबरा गए, उसे पागलखाने में भरती करा दिया। 

इस दौरान लड़की के किस्से अखबारों में प्रकाशित हो गए और जर्मनी में रह रहे आस्ट्रियाई मनावज्ञानिक शोधकर्ता फ्रिज ग्रेनवेल्ड, एक पत्रकार कूबी कलेन को लेकर उसके गांव पहुंचे और उसे पागलखाने से छुड़ाकर अपने साथ ले आए। उन्होंने 9 से 18 मई 1925 के बीच जुगुन के साथ हान वाली हरकतों का अध्ययन किया। इस दौरान आसपास की घटनाओं का दौर उसी तरह चलता रहा। जुलाई, 1925 में ग्रेनवेल्ड की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। 

ghost stories in hindi - शैतान का साया 

उसी साल वियना की एक औरत जिसने वर्षों तक मनोवैज्ञानिक अनुसंधान किए थे की दिलचस्पी जुगुन में जगी और सितंबर, 1925 में वह उससे मिलने आई। उसने खुद पास रहकर उन अनहोनी घटनाओं को देखा और जनवरी, 1926 में वह उसे वियना में अपने फ्लैट पर ले गई। वियना में इस औरत का नाम विसिलिको काउंटेस था, उसने जुगुन के मामले पर 1926 में पुस्तक लिखी थी। उसने लिखा कि एक बार जब मैं अपने कमरे में आई तो मैंने देखा कि कमरे में एक छोटा-सा बॉक्स पड़ा है जिसमें पादरियों के पहनने के टोप भरे हैं। उन्हीं में से कुछ टोप बाहर भी बिखरे पड़े थे, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे आए कहां से थे। ऐसे ही एक समय जब जुगुन किताबों की अलमारी के पास खड़ी थी तो मैंने देखा कि उसके पीछे से गहरे हरे रंग की छाया निकलकर हमारी टेबल पर गिर रही है। 

मियनिक के डॉक्टर हंस रोजेनबुश ने जुगुन की जांच पड़ताल की। उसने बाद में दावा किया कि लड़की झूठी है और वह जो कुछ करती है वह काउंटेस की मदद से करती है। इससे वियना में हंगामा हो गया। एक अन्य डॉक्टर हेरी प्राइस ने भी उसकी जांच पड़ताल की और उसने कहा इन अनहोनी घटनाओं का सिलसिला तभी भी जारी रहा जब काउंटेस मौजूद नहीं थी और जुगुन को बंद कमरे में रखा गया था। इस पर वियना के कई प्रमुख वैज्ञानिक और डॉक्टर उसकी जांच पड़ताल में जुटे और उन्होंने माना कि जुगुन की उपस्थिति में अनहोनी घटनाएं होती हैं। लेकिन 1927 में जुगुन के 14वें जन्मदिन के बाद इन अनहोनी घटनाओं का सिलसिला बंद हो गया। 

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