समय का सदुपयोग पर निबंध | Samay ka sadupayog Essay in Hindi

Samay ka sadupayog Essay in Hindi

समय का सदुपयोग पर निबंध-Essay on good use of time

स्वस्थ मस्तिष्क वाले हर व्यक्ति में उन्नति की इच्छा होती है। जिसमें उन्नति की आकांक्षा न हो, उसे एक प्रकार से मृत ही समझना चाहिए। दुर्बल बलवान बनना चाहता है, भिखारी धनवान बनना चाहता है और मूर्ख विद्वान बनना चाहता है। मानव जीवन में उन्नति के अनेक साधन हैं। सभी साधनों के मूल में है-समय का सदुपयोग। एक क्षण का दुरुपयोग जीवन का दुरुपयोग है। इतिहास साक्षी है, जिसने समय का सदुपयोग किया, वह सफलता की चोटी पर जा बैठा। महात्मा गांधी, नेपोलियन, अरस्तु, ईश्वरचंद विद्यासागर, रामानुजम, मैडम क्यूरी आदि महान लोगों की जीवनी इसका उदाहरण है। 

कहा भी गया है-समय का चूका विद्यार्थी, बरसात का चूका किसान और डाल से चूका बंदर कहीं का नहीं रहता। इस ग्रामीण लोकोक्ति से भी समय की महत्ता सिद्ध होती है। जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, समय उसका सम्मान करता है और जो समय को नष्ट करता है, समय भी उसे नष्ट कर देता है। इसी भाव को विश्वप्रसिद्ध नाटककार शेक्सपियर ने अपने एक नाटक के एक पात्र सम्राट लियर से बड़ी पीड़ा के साथ कहलवाया है, “उफ! पहले मैंने समय को नष्ट किया, अब समय मुझे नष्ट कर रहा है।” 

एक बार किसी व्यक्ति ने गांधी जी से प्रश्न किया, “महात्मा जी, आपकी सफलता का राज क्या है?” 

गांधी जी ने मुस्कराते हुए अपनी कमर में लटकी घड़ी की ओर इशारा किया-यानी समय की पाबंदी। गांधी जी ने एक-एक मिनट का बड़ी सावधानी एवं बुद्धिमानी से उपयोग किया था। फलतः वे विश्ववंद्य बन गए। पांच मिनट के समय को महत्व न दिए जाने के कारण आस्टियन को नेपोलियन से हारना पड़ा। नेपोलियन ने एक-एक क्षण का सदुपयोग कर अपने शौर्य से यह सिद्ध कर दिया कि उसके शब्दकोश में ‘असंभव’ शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है। 

इस संबंध में कछुए और खरगोश के बीच दौड़ प्रतियोगिता की कथा उद्धृत करना प्रासंगिक है। मंथरगामी कछुए ने प्रतियोगिता के लिए निर्धारित समय के एक-एक क्षण का आलस्य त्याग कर सदुपयोग किया, फलत: उसे विजय मिली। दूसरी ओर तीव्रगामी खरगोश ने उपलब्ध समय को आराम में नष्ट किया, जिससे उसे पराजय मिली। इस प्रकार एक-एक क्षण के सदुपयोग से विजय का सेहरा सिर पर बंधता है और एक-एक क्षण की चूक से मुंह पर पराजय की कालिख लगती है। कार्य की सफलता कुशलता से ज्यादा तत्परता पर निर्भर करती है। किसी ने ठीक ही लिखा है 

Time is precious, time is money, 

Work done in time, is sweet honey.

तात्पर्य यह है कि समय बहुमूल्य है, समय ही धन है। समय पर संपन्न कार्य ही फलदायी होता है। इसके ठीक विपरीत आलस्य और कार्य टालने की प्रवृत्ति-दोनों समय के दुश्मन हैं। सभी सुधी जनों को इनसे सावधान रहना 

चाहिए, क्योंकि समय और ज्वार किसी की प्रतीक्षा नहीं करते। 

समय का सदुपयोग हो, इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित जीवन जीना चाहिए। प्रत्येक दिन का एक लघुकालीन लक्ष्य निर्धारित कर समय रहते इसे प्राप्त कर लेना चाहिए। जो छात्र प्रतिदिन की अपनी पढ़ाई समाप्त नहीं कर पाते, उन्हें परीक्षा के समय पाठ्यक्रम पहाड़ जैसा प्रतीत होता है। तब वे परीक्षा में सफलता के लिए गलत हथकंडे अपनाते हैं। इन गलत कार्यों से भी उन्हें असफलता ही हाथ लगती है और समाज के सामने उनका सिर नीचा होता है। ऐसे में वे पछताते हैं, लेकिन पछताने से क्या लाभ? इसीलिए कहा गया है 

का वर्षा जब कृषि सुखाने। 

समय बीत पुनि का पछताने॥

अतः प्रत्येक व्यक्ति को एक-एक क्षण का सदुपयोग करके किशोरावस्था में विद्यार्जन, युवावस्था में धनार्जन तथा प्रौढ़ावस्था में ज्ञानार्जन करना चाहिए, अन्यथा वृद्धावस्था में हर कौर के साथ अपमान का विष पीना पड़ता है।

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