सामान्य ज्ञान-सोते समय बाहरी आवाजें क्यों नहीं सुनाई देतीं? 

सामान्य ज्ञान-सोते समय बाहरी आवाजें क्यों नहीं सुनाई देतीं? 

सोते समय बाहरी आवाजें क्यों नहीं सुनाई देतीं? 

जब आप पूरी नींद में होते हैं, तो बाहरी आवाजें बिलकुल सुनाई नहीं देतीं। इसका वैज्ञानिक कारण है। वास्तव में, हमारी नींद और जागने का जो क्रम है, उसे हमारे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी नियंत्रित करती है। हमारे मस्तिष्क में एक विशेष क्षेत्र है, जिसे ‘जालीदार सक्रियण प्रणाली’ कहते हैं। यह हमारी नींद और जागरण के लिए उत्तरदायी है। 

ध्यान रहे, कोई भी अचानक नहीं सो जाता, बल्कि उसे नींद की विभिन्न अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है। इन्हीं में से एक है तंद्रा अवस्था। इस अवस्था में सर्वप्रथम मांसपेशियां प्रभावित होती हैं। उसके पश्चात सुनने व स्पर्श की बोध शक्ति कम हो जाती है। गहरी नींद आने पर जालीदार सक्रियण प्रणाली सभी उद्दीपनों को अवरुद्ध कर देती है, जिसके परिणामस्वरूप हमें बाहरी आवाजें सुनाई नहीं देती हैं।

कुछ विशेष औषधियों का प्रयोग करके इस प्रणाली को अवनत किया जा सकता है। सोते हुए मनुष्य को जगाने के लिए उसकी नींद की गहराई को उपयुक्त आवाज की मात्रा द्वारा नापा जा सकता है। सामान्यतः एक घण्टे से सोए व्यक्ति को जगाने के लिए जोर की आवाज चाहिए और दो घंटे की नींद के बाद हल्की आवाज पर्याप्त होती है।

कुछ वैज्ञानिक प्रयोगों से यह भी पता चला है कि नींद की अवधि में मस्तिष्क में पहुंचने वाले उद्दीपनों की छंटाई होती रहती है। आवश्यक मुद्दों पर ही ‘जालीदार सक्रियण प्रणाली’ मस्तिष्क के विशेष भाग को जगाने हेतु सूचना देती है। यही कारण है कि एक स्त्री की रात में अपने बच्चे के रोने की आवाज सुनते ही नींद तुरंत खुल जाती है।

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