समाचार पत्र पर निबंध

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समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

 नगरों में बिस्तर छोड़ते ही पता नहीं भगवान की याद आती है कि नहीं, समाचारपत्र, यानी अखबार की याद अवश्य हो आती है। हम तब तक उन्मन बने रहते हैं, जब तक सुबह-सुबह अखबार न आ जाए। प्रातःकालीन समीर की भाँति उसके आते ही हमारे मन-प्राण प्रसन्न-प्रफुल्ल हो उठते हैं। यह बात दूसरी है कि आज का अखबार कल भले बासी हो जाए। 

समाचारपत्र मुख्य रूप से मुख्य घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करते हैं। देश-विदेश में जिस क्षण भी राजनीतिक भूकंप आया, समाचारपत्र में शीघ्र ही उसके कंपन का अंकन हो गया। अतः, समाचारपत्र युग के गतिमापक यंत्र हैं। यह ऐसा दर्पण है, जिसमें हम जनजीवन का प्रतिबिंब देखते हैं, यह ऐसा शीशा है, जिसके आर-पार हम देख सकते हैं। समाचारपत्र समाज का थर्मामीटर है, जिसमें सामाजिक वातावरण के तापमान का भान होता है। इसे दूरबीन कहिए, जिसके द्वारा हम बहुत दूर-दूर के दृश्य देख सकते हैं। 

समाचारपत्र में केवल राजनीतिक खबरें ही नहीं, सांस्कृतिक, धार्मिक आदि खबरें भी छपती हैं। समाचारपत्रों में बेकार अपना रोजगार ढूँढ़ता है,कुँवारा अपनी भावी पत्नी का पता खोजता है, व्यापारी बाजार-भाव पर नजर दौड़ाता है, चलचित्र का प्रेमी ताजा फिल्मों के विज्ञान पर दृष्टि गड़ाता है। खेलाड़ी इसमें खेल की खबर पर टूट पड़ता है, यात्राकामी रेलगाड़ी की समय-सारणी उलटता-पुलटता है। समाचारपत्र केवल सनसनीखेज खबरों द्वारा हमें चकित ही नहीं करता, वरन् भिन्न रुचिवाले लोगों को तृप्ति भी प्रदान करता है। 

समाचारपत्रों की जन्मभूमि यूरोप है। सबसे पहले समाचारपत्र हॉलैंड से 1526 ई० में प्रकाशित हआ। इसके बाद जर्मनी से 1610 ई०, इंगलैंड से 1622 ई०, अमेरिका से 1690 ई०, रूस से 1703 ई० तथा फ्रांस से 1736 ई० में समाचारपत्र प्रकाशित हए। लंदन से ‘डेली करेंट’ नामक दैनिक समाचारपत्र 11 मार्च 1702 में प्रकाशित हुआ। हिंदी का सबसे पहला पत्र ‘उदंत-मार्तंड’ 1826 ई० में कलकत्ता से प्रकाशित हआ। इन दिनों दुनिया में लाखों समाचारपत्र छपते हैं। केवल भारतवर्ष में 2400 के लगभग दैनिक तथा 400 के लगभग साप्ताहिक पत्र प्रकाशित होते हैं।

प्रमुख भारतीय 161 दैनिक समचारपत्रों में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘स्टेट्समैन’, ‘अमृतबाजार पत्रिका, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘आज’, ‘जनसत्ता’, ‘टेलीग्राफ’, हिन्दुस्तान ‘आनदबाजार पत्रिका’, ‘हिन्द’, ‘मलयालम मनोरमा’, ‘जनशक्ति’ आदि उल्लेखनीय हैं 

समाचारपत्र चाहे दैनिक हो या साप्ताहिक, पाक्षिक हो या मासिक-  इसके लिए बड़े संगठन की आवश्यकता होती है। पत्रसंचालक, मुद्रक, प्रकाशक, संवाददाता तथा संपादक बड़े महत्त्वपूर्ण होते हैं। संवाददाता तो आधुनिक युग के नारद हैं। उनके लिए न कोई फल वर्जित है, न कोई स्थान। यदि वे हंस की तरह विवकी हैं तो गलत-सही समाचारों को परखकर पत्रों में स्थान देंगे. यदि नहीं तो बिलकुल घटिया समाचार । संपादक का कार्य तो और भी उत्तरदायित्त्वपर्ण है। उसकी थोड़ी असावधानी से बड़ा अनर्थ हो सकता है। 

अतः, समाचारपत्र आधुनिक युग के अनिवार्य अंग बन चुके हैं। जनमत के निर्माण  में उनका बहुत बड़ा हाथ है। सबल समाचारपत्र महाप्रतापी नरेश दशरथ की तरह किसी को सहज ही रंक तथा किसी को सहज ही नरेश बना सकता है। इसीलिए, नेपोलियन ने कभी कहा था कि मैं लाखों संगीनों की अपेक्षा तीन विरोधी समाचारपत्रों से अधिक डरता हूँ। अनेक विदेशी विचारकों ने समाचारपत्र के बारे में अपने विचार प्रकट किए हैं। हेन ने कहा है कि आजकल हम विचारों के लिए संघर्ष करते हैं और समाचारपत्र हमारी किलेबंदियाँ हैं। जेम्स एलिस का विचार है कि समाचारपत्र संसार के दर्पण हैं। किसी ने समाचारपत्र को जनता का अध्यापक बताया है, तो किसी ने उसे जनता का विश्वविद्यालय घोषित किया है। 

आधुनिक युग में समाचारपत्रों की शक्ति अपरिसीम हो गई है। समाचारपत्र आज बड़े-बड़े धनपतियों एवं शस्त्रपतियों को भी अपने संकेत पर नचा रहे हैं। इनके समक्ष बडे-बडे नेता विनीत भाव से खड़े रहते हैं। इनके भ्रू-संचालन से सरकार भी पीपल के पत्ते की तरह प्रकंपित होती रहती है। जो निर्बल हैं, उपेक्षित और प्रताडित हैं. उनके लिए समाचारपत्र सशक्त ढाल भी बन जाते हैं। इसलिए, एक कवि ने इनका गुणगान करते हुए कहा है 

झुक जाती है तलवार भी अखबार के आगे,

झुक जाती है सरकार भी अखबार के आगे।

अँगली पै नाचती है यह सरमायादार को.

सडकों पै नचाती है यह लीडर की कार को।

मुर्दे को होश देती है अखबारनबीसी। 

जिंदे को जोश देती है अखबारनबीसी।

समाचारपत्र अपने देश की जनता के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जनजीवन की गतिविधियों को जन-जन तक पहुँचाते हैं, जनता में, साहस भरते हैं। 


Essay on newspaper

As soon as you leave the bed in the cities, it is not known whether you remember God or not, the newspaper, that is, you remember the newspaper. We remain silent until the morning newspaper arrives. Just like Sameer in the morning, as soon as he comes, our soul and soul are happy. The second thing is that today’s newspaper may become stale tomorrow.

Newspapers mainly present the details of the main events. The moment a political earthquake occurred in the country and abroad, the vibration of the newspaper soon took place. Hence, newspapers are the dynamometer of the era. This is a mirror in which we see the reflection of life, it is a mirror, beyond which we can see. Newspaper is the thermometer of society, which takes into account the temperature of the social environment. Call it binoculars, through which we can see very distant views.

Not only political news, cultural, religious news etc. are also published in the newspaper. Useless newspapers find their employment, the bachelor finds the address of his future wife, the businessman looks at the market price, the movie lover glances at the science of fresh films. Kheliadi breaks down on the news of the game in it, the itinerary of the itinerary train reverses. Not only does the newspaper surprise us with sensational news, it also provides satisfaction to people of different interests.

The birthplace of newspapers is Europe. The first newspaper was published from Holland in 1526 AD. After this, newspapers were published in 1610 AD from Germany, 1622 AD from England, 1690 AD from America, 1703 AD from Russia and 1736 AD from France. From London, a daily newspaper called ‘Daily Current’ was published on 11 March 1702. The first Hindi letter ‘Udant-Martand’ was published in 1826 from Calcutta. These days, millions of newspapers are printed in the world. Only in India, about 2400 daily and 400 weekly papers are published.

Prominent Indian 161 daily news papers include ‘Times of India’, ‘Statesman’, ‘Amritbazar Patrika,’ Navbharat Times ‘,’ Indian Express ‘,’ Aaj ‘,’ Jansatta ‘,’ Telegraph ‘, Hindustan’ Andabazar Patrika ‘,’ Hind ‘,’ Malayalam Manorama ‘,’ Janashakti ‘etc. are notable

Whether a newspaper is daily or weekly, fortnightly or monthly – this requires a large organization. Journalists, printers, publishers, reporters and editors are very important. The reporters are Narada of the modern era. No fruit is forbidden, no place for them. If they are like a swan, then they will examine the wrong news and place it in the letters. If not, absolutely bad news. The work of the editor is even more responsible. His little inadvertence can lead to big disaster.

Hence, newspapers have become an essential part of the modern era. He has a huge hand in building public opinion. Like a powerful newspaper King Naresh Dasaratha, one can easily make someone rung and one can easily make a king. That is why Napoleon once said that I am more afraid of three opposing newspapers than millions of bayonets. Many foreign thinkers have expressed their views about the newspaper. Hen said that nowadays we struggle for ideas and newspapers are our fortifications. James Ellis is of the opinion that newspapers are mirrors of the world. Some have declared the newspaper as teacher of the public, while some have declared it as the university of the people.

In the modern era, the power of newspapers has become infinite. Newspapers are also drawing big moneylenders and arsenals at their behest. In front of them big leaders stand graciously. Due to their corruption, the government continues to vibrate like a peepal leaf. Those who are weak, neglected and tortured. Newspapers also become strong shield for them. Therefore, a poet has praised them saying

The sword also bowed in front of the newspaper,

The government also bowed down in front of the newspaper.

Angli pa dances it to the bourgeoisie.

The road pans this leader’s car.

NewspaperNBC gives consciousness to the dead

Newspaper enlivens Jinde.

Newspapers represent the views of the people of our country, take the activities of life to the people, and inspire the people.

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