आविष्कार से जुड़े रोचक जानकारी

rochak jankari in Hindi

आविष्कार से जुड़े  रोचक  जानकारी

सन् 1825 में फ्रांस के किसी रंगरेज के यहां किसी व्यक्ति की टक्कर से लैम्प का द्रव नीचे गिर पडा और इससे मेजपोश पर लगे धब्बे साफ हो गए। इसी घटना ने आगे चलकर ड्राइक्लीनिंग को जन्म दिया। 

चार्ल्स गुडइयर द्वारा काम करते समय अचानक स्टोव पर रबर गम और सल्फर गिर पड़ा। फलस्वरूप एक लचीला परन्तु कड़ा और स्थायी पदार्थ बन गया। यही वल्केनाइज्ड रबर था। 

आविष्कार 10 मार्च, 1876 को ग्राहम बैल और उनके सहायक वाटसन लिक्विड ट्रांसमीटर से संबंधित कार्य कर रहे थे। उस समय ये दोनों व्यक्ति एक्सटर पैलेस, बोस्टन के अलग-अलग कमरों में कार्यरत थे। अचानक बैल के कपड़ों पर एसिड गिर पड़ा और उनके मुंह से निकला, मिस्टर वाटसन, कम हियर, आई वान्ट यू।” कुछ ही सेकंड बाद वाटसन कमरे में आए और बैल को यह कहकर चकित कर दिया कि उनका प्रत्येक शब्द उन्होंने दूसरे कमरे में इस तार के जरिए स्पष्ट सुना है। ग्राहम बैल के द्वारा कहे गए ये शब्द किसी टेलीफोन लाइन पर कहे गए प्रथम शब्द बन गए। 

स्वीडन के रसायनज्ञ अल्बर्ट हाफमैन सन् 1943 में किसी नये पदार्थ पर खोज कर रहे थे कि इसमें से कुछ पदार्थ उनके हाथ पर अवशोषित हो गया, जिसके फलस्वरूप उन्हें मतिभ्रम होने लगा। आगे चलकर उन्होंने इस पदार्थ को नाम दिया एल.एस.डी.। 

आविष्कार से जुड़े  रोचक  जानकारी

जर्मन वैज्ञानिक सी.एफ. सनबेइन की पत्नी ने कोई भी रसायन लेकर रसोईघर में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगाई हुई थी। वे एक दिन पत्नी की अनुपस्थिति में रसोई में काम कर रहे थे कि किसी रसायन का कुछ भाग रसोई में टंगे पत्नी के गाउन पर गिर गया। पत्नी के डर से वे उस गाउन को वहीं स्टोव पर सुखाने लगे, परन्तु आग की गरमी से गाउन का वह हिस्सा सूखने के बजाय भक्क से जलकर नष्ट हो गया। इस संयोग से प्राप्त अनुभव के आधार पर इस रसायन से उन्होंने नाइट्रोसेललोज नामक विस्फोटक तैयार किया। 

सन् 1797 में लंदन में सिर के टोप का आविष्कारक जॉन हिथरिगटन जब पहली बार टोप लगाकर सड़कों से गुजरा, तब इस नयी चीज को देखकर कुछ औरतें बेहोश हो गई, कुत्ते भौंकने लगे और एक भीड़ ने इसे घेर लिया। इस व्यक्ति को जनता को डराने के आरोप में जेल भेज दिया गया। 

सन् 1797 में लंदन में सिर के टोप का आविष्कारक जॉन हिथरिगटन जब पहली बार टोप लगाकर सड़कों से गुजरा, तब इस नयी चीज को देखकर कुछ औरतें बेहोश हो गई, कुत्ते भौंकने लगे और एक भीड़ ने इसे घेर लिया। इस व्यक्ति को जनता को डराने के आरोप में जेल भेज दिया गया। 

पन्द्रहवीं शताब्दी के पहले कई घड़ियों में सिर्फ एक सुई हुआ करती थी, जो घट बताता मिनटों में समय बताने का रिवाज उन दिनों नहीं था। 

रोमन कलेंडर और आधुनिक कलेंडर में बड़ा फर्क है। उसमें जुलाई का महीना पांचवां होता था तथा इसका नाम भी 'क्विटलिस' अर्थात् पांचवां था। जब जूलियस सीजर गद्दी पर बैठा उसके बाद इसका नाम बदलकर 'जुलाई' रखा गया। 

उन्नीसवीं शताब्दी से पहले दोनों पांवों के जूते बिल्कुल एक जैसे होते थे, आज की तरह अलग-अलग पांव वाले नहीं। 

अठारहवीं शताब्दी में इंग्लैंड की एक कागज मिल का कर्मचारी कागज पर चिकनाहट लाने वाली सरेस लगाना भूल गया। फलस्वरूप जो कागज बना, वह खुरदरा था और इसपर फाउण्टेन पेन से लिखते ही स्याही सूख जाती थी। मिल मैनेजर ने उस कागज को स्याहीसूख के नाम से बेच दिया और इस प्रकार ब्लॉटिग पेपर का आविष्कार हो गया। 

एक प्रयोगशाला में घुसी बिल्ली वहां से भगाने पर एक रसायन फारमेल्डीलाइड की बोतल लुढ़का गई और उसका कुछ हिस्सा पास रखे पनीर पर गिर पड़ा। जब वैज्ञानिक ने बाद में उसे देखा तो पाया कि रसायन के प्रभाव से पनीर ठोस प्लास्टिक में बदल गया है। 

रोमन कलेंडर और आधुनिक कलेंडर में बड़ा फर्क है। उसमें जुलाई का महीना पांचवां होता था तथा इसका नाम भी 'क्विटलिस' अर्थात् पांचवां था। जब जूलियस सीजर गद्दी पर बैठा उसके बाद इसका नाम बदलकर 'जुलाई' रखा गया। 

रोमन कलेंडर और आधुनिक कलेंडर में बड़ा फर्क है। उसमें जुलाई का महीना पांचवां होता था तथा इसका नाम भी ‘क्विटलिस’ अर्थात् पांचवां था। जब जूलियस सीजर गद्दी पर बैठा उसके बाद इसका नाम बदलकर ‘जुलाई’ रखा गया। 

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