रोबोट का आविष्कार किसने किया था |Robot ka Avishkar Kisne Kiya tha

रोबोट का आविष्कार किसने किया था

रोबोट का आविष्कार किसने किया था |Robot ka Avishkar Kisne Kiya tha

रोबोट यानि यंत्र मानव, निःसंदेह मानव के लिए विज्ञान की एक अनुपम खोज है। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के संगम से निर्मित इस यंत्र मानव की उपयोगिता मनुष्य की पहुंच से बाहर, कठिनाई वाले, खतरनाक एवं घातक क्षेत्रों में अतुलनीय है। आज रोबोट का उपयोग कई प्रकार के कार्यों के लिए किया जा रहा है। इन्हीं कई तरह के कार्यों में इसकी प्रभावी उत्पादकता को देखते हुए, आविष्कृत रोबोट निर्माण की नवीनतम तकनीक को रोबोटिक्स नाम दिया गया है। आज विश्व के अनेक विकसित व विकासशील देश, जैसे-ब्रिटेन, अमेरिका, भारत, जापान और कोरिया आदि रोबोटिक्स पर काफी गम्भीरता से कार्य कर रहे हैं। 

रोबोट का आविष्कार किसने किया था

ये आविष्कृत रोबोट्स कई कार्यों को सफलतापूर्वक कर सकते हैं; जैसे-घरेलू कार्य, सुरक्षा कार्य, खेल सिखाना व साथ बैठकर खेलना, ट्रकों में सामान चढ़ाना-उतारना, ग्राहकों को सेवा उपलब्ध कराने वाले कार्य, दूरस्थ अंतरिक्ष अभियानों में कार्य, मशीनी उत्पादों के निर्माण-कार्य, मशीनों में पूर्जे लगाने व निकालने का कार्य, उच्च तापमान तथा रेडियोधर्मी प्रदूषण वाले कारखानों में कार्य, रोबोटिक सर्जरी, परमाणु केन्द्रों की साफ-सफाई, ज्वालामुखी लावे वाले क्षेत्रों में काम करने व आपदा प्रबंधन के कार्य, कोयले व सोने की खानों में कार्य, उच्च तापमान और रेडियोधर्मी प्रदूषण वाले कारखानों में कार्य, जहरीले रसायन निर्माण कारखानों में कार्य, औद्योगिक कारखानों में गरम भट्टियों के पास से गरम तत्व को निकालकर ठण्डा करने तथा उससे उत्पाद बनाने का कार्य, कारों, ट्रकों, वाहनों आदि के पेंट करने एवं उनको जगह-जगह वेल्डिंग करने का कार्य, जानलेवा गैस, ऊंचाई वाले स्थान व गहराई वाले स्थान पर रात-दिन का कार्य तथा शल्य चिकित्सा, अंगों के प्रत्यारोपण, अल्ट्रासाउण्ड, एक्स-रे, ई.सी.जी. आदि तकनीकी कार्य। 

विश्व का पहला रोबोट सन् 1923 ई. में अमेरिका की ‘स्पेरी जायरो स्कोप’, कम्पनी द्वारा निर्मित किया गया, उस रोबोट का नाम जॉर्ज था। जब सन् 1939 ई. में न्यूयॉर्क में वर्ल्डफेयर का आयोजन हुआ, तो परिष्कृत ढंग के रोबोट इलेक्ट्रो की प्रदर्शनी लगायी गई। वह रोबोट मोटरों की सहायता से चल भी सकता था। 

तत्पश्चात्, अमेरिका की एक कम्पनी ने, सन् 1962 ई. में एक औद्योगिक रोबोट का निर्माण किया। सन् 1980 ई. तक ऐसे रोबोटों का निर्माण हो चुका था, जो कारखानों में मनुष्य की भांति वेल्डिंग करने, नट-बोल्ट खोलने तथा कसने आदि जैसे कार्य करने लगे। आधुनिक विज्ञान तकनीक द्वारा अब माइक्रोप्रोसेस तकनीक का प्रयोग करके हू-ब-हू मनुष्य जैसे स्वरूप वाले रोबोट का आविष्कार किया जा चुका है। यह रोबोट मनुष्य की भांति कार्य करता है। इसके शरीर में मांस एवं हड्डियों के स्थान पर इस्पात अथवा प्लास्टिक का प्रयोग किया गया है, धमनियों व शिराओं के स्थान पर तार लगाए गए हैं, जिनमें रक्त की जगह विद्युत धारा प्रवाहित होती है। 

रोबोट माइक्रो प्रोसेसर की सहायता से बोलता है, कैमरे की मदद से देखता है तथा संवेदी यंत्रों के सहयोग से स्पर्श करता है। रोबोट को संचालित करने वाला कम्प्यूटर रोबोट के भीतर या बाहर रखा जा सकता है। आज वैज्ञानिक ऐसा रोबोट इजाद करने में लगे हैं, जिसमें कृत्रिम बुद्धि का विकास किया जा सके। ऐसा रोबोट बिना थके अनिश्चित समय तक एक ही कार्य करता रह सकता है, फिर भी इसकी कार्यकुशलता एवं कार्यक्षमता प्रभावित नहीं होती। रोबोट के माइक्रो कम्प्यूटर में कार्य करने का क्रम एवं उसकी गतिविधियों के प्रोग्राम संग्रहित रहते हैं। उन्हीं प्रोग्राम के अनुसार रोबोट कार्य करते हैं, उससे कम अथवा ज्यादा नहीं। 

मनुष्य ने अब तक जितने रोबोट का आविष्कार किया है, उनका मस्तिष्क ‘पांच सौ न्यूरॉन’ की क्षमता से युक्त है, जबकि मानव मस्तिष्क दस हजार मिलियन से भी अधिक न्यूरॉन तथा एक लाख से ज्यादा सहायक कोशिकाओं से बने होते हैं। वैसे मनुष्य के मस्तिष्क की रचना अत्यन्त जटिल और संवेदनशील है, जिसे तैयार करके रोबोट में विकसित कर पाना नामुमकिन लगता है, किन्तु इस दिशा में भी वैज्ञानिक कदम बढ़ा चुके हैं। लंदन के प्रोफेसर वार्विक और उनके युवा वैज्ञानिकों की टीम ने यंत्र मानव अर्थात् रोबोट बनाने की दिशा में कार्य आरम्भ किया। उन्होंने सात बौने नामक एक तिपहिया वाहन बनाया। इस वाहन द्वारा अलग-अलग कार्य कराए गए। इसमें कुछ बौने रोबोट को ऐसे परिपथ में बैठाया गया, जिसके आधार पर वे मनुष्य की भांति हलचल करते हैं, खुद अपनी बैटरी चार्ज करते हैं तथा ग्रुप की भांति मिल-जुलकर कार्य करते हैं। प्रोफेसर वार्विक को पक्का विश्वास है कि आने वाले समय में वह मानव मस्तिष्क की क्षमता वाला मशीनी मस्तिष्क तैयार करने में अवश्य सफल होंगे।

 अमेरिका द्वारा विकसित एक्सप्लोरर, पाथ फाइंडर, स्पिरीट एवं रोवर जैसे रोबोट को मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश के लिए प्रयोग करने के लिए भेजा गया। नासा द्वारा अन्य ग्रहों पर भी रोबोटिक मशीन भेजी गई। ये रोबोटिक मशीनें अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा और निर्धारित अवधि से अधिक अवधि तक सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं। 

आज विश्व भर के वैज्ञानिक ऐसे रोबोट का आविष्कार करने में जुटे हैं, जिनमें मानव की भांति कृत्रिम बुद्धि लगाई जा सके। एलन टर्निंग नामक वैज्ञानिक ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मापने की एक विधि का आविष्कार किया है, जिसे ‘टर्निंग टेस्ट’ का नाम दिया गया है।

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