आबादी रोकने का धर्म 

आबादी रोकने का धर्म 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2019 को कई लोक कल्याणकारी बातों के माध्यम से पूरे देश का ध्यान खींचा। उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रधानमंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण को देश भक्ति से जोड़ दिया। ये प्रधानमंत्री की सूझ-बूझ एवं राजनैतिक दृष्टि की गहरी समझ ही है। ध्यातव्य है कि भारतीय संविधान निर्माताओं ने ‘जनसंख्या नियंत्रण’ जैसी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए नीति निदेशक तत्वों में अप्रत्यक्ष रूप से इसको व्यक्त किया। भारतीय संविधन के नीति निदेशक तत्वों से संबंधित अनुच्छेद 39 (e) तथा 39 (1) में कर्मकारों के स्वास्थ्य और शक्ति तथा बालकों की अवस्था के दुरूपयोग से संरक्षण तथा बालकों को स्वस्थ विकास के अवसर की व्यवस्था की गई है। जाहिर सी बात है कि किसी परिवार में स्वास्थ्य तभी ठीक होगा जब जनसंख्या अधिक नहीं होगी। इस प्रकार कहा जा सकता है कि भारतीय संविधान के निर्माताओं को इस बात का भान था कि वे जनसंख्या नियंत्रण संबंधी बातों का संवैधानिक प्रावधान कर सके। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से आबादी पर लगाम लगाने की अपील करके जनसंख्या नियंत्रण को चर्चा का केन्द्र बिंदु बना दिया गया है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से आबादी पर लगाम लगाने की अपील करके जनसंख्या नियंत्रण को चर्चा का केन्द्र बिंदु बना दिया गया है। गौरतलब है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि भारत में जनसंख्या नियंत्रण हेतु प्रयास नहीं किये गये। उल्लेखनीय है कि भारत विश्व का पहला देश था जिसने वर्ष 1951 में जनसंख्या नियंत्रण का सरकारी अभियान शुरू किया। हालांकि भारत में वर्तमान में भी जनसंख्या बढ़ने की प्रवृत्ति देखी जा रही है तो इसका कारण है एक लोकतांत्रिक देश में व्यक्ति की संतानोत्पत्ति की स्वतंत्र इच्छा और अधिकार का सम्मान। यदि गौर से देखा जाय तो इसके अतिरिक्त गरीबी, अशिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का अभाव भी बड़ा कारण है। हालांकि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि भारत जनसंख्या के मामले में 2027 तक चीन को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर पहुँच जायेगा। 

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार उत्तर भारत में जनंसख्या वृद्धि दक्षिण भारत की तुलना में ज्यादा है। 

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार उत्तर भारत में जनंसख्या वृद्धि दक्षिण भारत की तुलना में ज्यादा है। ध्यातव्य है कि बिहार की प्रजनन दर जहाँ 3.41 है वहीं उत्तर प्रदेश की 2.74 है। दक्षिण भारत की प्रजनन दर 1.5 के स्तर पर है। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि उच्च आय वाले राज्य जैसे आंध्रप्रदेश, केरल, कर्नाटक तथा तमिलनाडु की प्रजनन दर कम आय वाले राज्यों से बेहद कम है। 

एक देश, एक चुनाव तथा एक विधान का नारा लगाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जनंसख्या नियंत्रण पर ध्यान देना स्वागत योग्य कदम है। प्रधानमंत्री द्वारा जनसंख्या नियंत्रण को देशभक्ति से जोड़ना एक प्रकार की दूरदृष्टि है जो भारत के भविष्य हेतु लाभकारी हो सकती है। यदि ‘जनसंख्या नियंत्रण : एक प्रकार की देशभक्ति’ की सही परिणति हो तो इससे देश का काफी कल्याण हो सकता है। 

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