Real life Inspirational Stories in Hindi-यातना का अहसास

Real life Inspirational Stories in Hindi-यातना का अहसास

Real life Inspirational Stories in Hindi-यातना का अहसास

एक बार शेख फरीद एक गांव में पहुंचे। वहां का वातावरण देखकर कुछ दिन उसी गांव में रहने का निश्चय किया। लोग आकर उनके दर्शन करते और अपनी जिज्ञासाओं का निराकरण करते। 

एक बार एक व्यक्ति उनके पास पहुंचा। उसने शेख फरीद से प्रश्न किया, “संत जी! हमने सुना है कि जब प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया जा रहा था, तब उनके चेहरे से प्रसन्नता की आभा टपक रही थी और उन्हें सूली पर चढ़ाए जाने का जरा-सा भी दुख नहीं था। इसके विपरीत उन्होंने भगवान से यहूदियों को क्षमा करने की प्रार्थना की थी, उस व्यक्ति ने आगे कहा कि महाराज! हमने यह भी सुना है कि जब मंसूर के हाथ-पैर काटे गए, उनकी आंखें फोड़ी गईं तो उसने चूं तक नहीं की थी और असहनीय कष्ट भी हंसते-हंसते सह लिया। क्या ऐसा होना संभव है? मुझे तो ऐसी बातों पर विश्वास नहीं होता।” 

शेख फरीद ने उस व्यक्ति के प्रश्न को चुपचाप सुन लिया और उसे एक कच्चा नारियल देते हुए उसे फोड़ने को कहा। उस व्यक्ति ने सोचा कि शायद शेख साहब मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दे पा रहे हैं इसलिए मेरा ध्यान दूसरी ओर मोड़ रहे हैं। उसने उनसे दोबारा पूछा, “महाराज! आप मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहे हैं।” 

शेख फरीद ने कहा, “पहले इस नारियल को तोड़ो। लेकिन हां, ध्यान रखना कि इसकी गीरी अलग निकल आए।” 

“यह कैसे हो सकता है, महाराज!” वह व्यक्ति अचकचाते हुए बोला, “यह नारियल तो कच्चा है और इसकी गीरी और खोल दोनों जुड़े हुए हैं। इसलिए गीरी को अलग कैसे निकाल सकता हूं?” 

तब संत ने उसे एक दूसरा सूखा नारियल देते हुए कहा, “अब इसे फोड़ो और इसकी गीरी निकाल कर दो।” 

उस व्यक्ति ने नारियल फोड़ा और उसकी गीरी निकालकर संत के समक्ष रख दी। तब संत ने उस व्यक्ति से पूछा, “अब जरा सोचकर बताओ कि इसकी गीरी कैसे निकल आई।” 

वह व्यक्ति बोला, “यह सूखी थी इसलिए खोल से अलग थी, इस कारण यह निकल आई।” 

संत मुस्कराकर बोले, “तुम्हारे प्रश्न का यही उत्तर है। आम लोगों का शरीर खोल से जुड़ा होता है, इसलिए जब उनके शरीर को चोट पहुंचती है तो उनकी अंतरात्मा को भी चोट पहुंचती है। लेकिन यीशु और मंसूर जैसे पहुंचे हुए महात्मा अपने शरीर को खोल से अलग रखते हैं, इसलिए यातना देने पर भी उन्हें न तो पीड़ा हुई, न ही उसका कुछ रंज हुआ। लेकिन तुम तो मुझे कोई नास्तिक मालूम होते हो, इसी कारण तुम्हारे मन में विचार उठे कि उन दोनों को यातना महसूस क्यों नहीं हुई।” 

Real life Inspirational Stories in Hindi-Feeling of torture

Once Sheikh Farid arrived in a village. Seeing the atmosphere there, I decided to stay in the same village for a few days. People would come and see them and solve their curiosities.

Once a person reached them. He questioned Sheikh Farid, “Saint! We have heard that when the Lord Jesus was being crucified, there was an aura of delight in his face and there was not a slight sorrow of crucifixion. On the contrary, he had prayed to God to forgive the Jews, the man further said, “Maharaj! We have also heard that when Mansoor was amputated, his eyes were blown, he did not even lick and Endured unbearable pain even laughing. Is it possible to happen? I don’t believe such things. “

Sheikh Farid listened silently to the person’s question and gave him a raw coconut and asked him to break it. The person thought that perhaps Sheikh Saheb could not answer my question, so he was turning my attention to the other side. He asked them again, “Maharaj! You are not answering my question. “

Sheikh Farid said, “Break this coconut first. But yes, take care that its ginger comes out differently.”

“How could this happen, chef!” The man said with surprise, “This coconut is raw and its giri and shell are connected. So how can I separate giri?”

Then the saint gave him a second dry coconut and said, “Now bust it and remove it from the kernel.”

The person boiled the coconut and removed its giri and placed it in front of the saint. Then the saint asked the person, “Now think a little bit and tell how its girly came out.”

The man said, “It was dry so it was different from the shell, so it came out.”

The saint smiled and said, “That is the answer to your question. The body of the common people is attached to the shell, so when their body gets hurt, their conscience also gets hurt. But the Mahatma like Jesus and Mansoor got their body Keep them apart from the shell, so even after torture they did not suffer nor did they feel any anger. But you seem to me an atheist, that is why you have a thought that why both of them did not feel tortured . “

 

 

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