Real Ghost Stories in Hindi-प्रेतनी का प्यार 

Real Ghost Stories in Hindi-प्रेतनी का प्यार 

Real Ghost Stories in Hindi-प्रेतनी का प्यार 

घटना अमरीकी राज्य आयूआ के डेबिनपोर्ट शहर की है। यद्यपि यह एक कम आबादी वाला शहर है, किंतु इसकी खूबसूरती बेमिसाल है। इसके आसपास का क्षेत्र जौ, मकई और चावल की फसलों के कारण प्रसिद्ध है। चारों ओर खूबसूरत खेतों-खलिहानों ने इस नगर को घेर रखा है। एक लेक्चरर की हैसियत से मेरी नियुक्ति इसी शहर के एक कॉलज में हो गई । मैंने अमरीका में ही अपनी तालीम पूरी की थी और वहां नौकरी भी मिल गई थी। तब मैंने सोचा कि पहले अच्छी तरह सैट हो जाऊं, तो अपने देश में जाकर अपनी मंगेतर को ब्याह लाऊं, ताकि मेरी तनहाई दूर हो सके। 

खाने के बाद चहल कदमी करना मेरी आदत थी। लिहाजा मैं बिना नागा टहलने के लिए घर से निकल जाता था। रोजाना की तरह उस रोज भी मैं टहलने के इरादे से निकला, तो अपने मकान मालिक से मिलने चला गया। मैंने एक कमरा किराए पर लिया हुआ था। अधेड़ उम्र का मालिक मकान अपनी ही उम्र की बीवी के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रहता था। जीना उतरते हुए मैंने बाग में, जो कि पिछली ओर था, एक जवान लड़की को झूला झूलते हुए देखा, तो खयाल आया कि शायद मकान मालिक के यहां कोई मेहमान वगैरह आए होंगे। 

उस दिन के बाद मैंने अक्सर उस लड़की को अपने कमरे की खिड़की से झूला झूलते हुए देखा। वह भी मुड़कर मुझे देखती, तो मैं मुस्करा देता। जवाब में वह भी मुस्करा देती। मैंने बहुत कोशिश की, कि मकान-मालिक से उस लड़की के बारे में पूछू, मगर हिम्मत नहीं हुई। अमरीका में वैसे तो लड़कियों से दोस्ती को बुरा नहीं समझा जाता, लेकिन मैं इन बखेड़ों में फंसना नहीं चाहता था। साहिरा मेरी मंगेतर ही नहीं, मेरी पसंद भी थी और मैं जल्दी से जल्दी उसे ब्याह लाना चाहता था। 

जिंदगी एक रुटीन के अधीन गुजर रही थी। सप्ताहांत पर हम दोस्त कुछ गेदरिंग आदि रख लेते थे। एक दिन अजीब संयोग हुआ। मैं नाइट-क्लासिज लेने के बाद कॉलेज की पिछली तरफ से घर जाने के लिए निकला, तो उसी लड़की को कॉलेज के पार्क में टहलते हुए देखा, जो मुझे अपने कमरे की खिड़की से झूला झूलती हुई नजर आती थी। मैं अनजाने तौर पर उसकी तरफ बढ़ा। 

Real Ghost Stories in Hindi-प्रेतनी का प्यार 

“हैलो ! क्या हो रहा है?” मैंने मुस्कराते हुए पूछा। “बस ऐसे ही, ताजी हवा का लुत्फ़ ले रही थी।” “लेकिन इस समय और यहां पर?” “हां, मुझे तनहाई पसंद है।” 

“ओह ! फिर तो मैंने आपको डिस्टर्ब किया।” 

‘नहीं, नहीं, मैं आपके साथ ज्यादा एंजॉय करूंगी।” उसने पलकें उठाकर मुझे देखा, तो मैं एक लमहे को चकरा गया। उसकी गहरी नीली आंखें हद से ज्यादा रोशन थीं, मगर उसका चेहरा मुझे बेहद उदास लगा। फिर भी मैं उसकी आंखों के जादू में डूबने लगा। वह धीरे से मेरी तरफ बढ़ी। तभी पीछे से आवाज आई-“अरे मि. नदीम! आप यहां क्या कर रहे हैं?” मैंने पीछे मुड़कर देखा। यह कॉलेज का नाइट-क्लीनर था। नाइट क्लीनर को देखकर लड़की तेजी से बाहर निकल गई। 

“कुछ नहीं! कुछ भी तो नहीं।” मैं भी सिटपिटाकर बाहर निकल आया, लेकिन बाहर उस लड़की का नामोनिशान नहीं था।

घर पहुंचकर भी मेरे जेहन में उस लड़की की रोशन आंखें और उदास चेहरा छाया रहा। आखिर इस समाज का हिस्सा होते हुए भी वह इतनी अकेली क्यों है? यहां तो इस उम्र की लड़कियां ब्वाय फ्रैंड्स के बिना रह ही नहीं सकतीं। यह सोच-सोचकर मैं थक गया, तो उसका खयाल जेहन से झटककर सोने की कोशिश करने लगा। 

अगले रोज मुझे रात को वापसी पर वह फिर नजर आई, तो मैं बेइख्तियार उसकी ओर चल पड़ा।

“कल, तुम कहां गायब हो गई थीं?” मैंने पूछा। 

“कहीं नहीं। बस मैं नहीं चाहती थी कि कॉलेज का स्टाफ मुझे यहां तुम्हारे साथ देखकर कोई गलत राय कायम करे।” 

“तुमने अब तक अपना नाम नहीं बताया?” “डोना केटर! यह नाम है मेरा।” उसने बताया। “तो क्या तुम मि. इर्विन केटर की बेटी हो?” मैंने अपने मालिक-मकान का नाम लिया। “हां।” वह धीरे से बोली।

“लेकिन पहले तो तुम कभी नज़र नहीं आईं।”

“मैं पिछले ही हफ्ते रॉक आइलैंड से आई हूं।” उसने करीबी शहर का नाम बताया।

“अच्छा ।” “क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?”

“हां, क्यों नहीं।” मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया, तो उसने खुश होकर थाम लिया।

“तुम्हारे यहां पर दोस्त क्यों नहीं हैं ?” मैंने पूछा।

“मुझे यहां के लोग पसंद नहीं हैं। सबके सब खुदगर्ज, मतलबी और धन के लोभी बन गए हैं।” 

उसके बाद मैं और डोना गहरे दोस्त बन गए। हम हर जगह साथ जाते, लेकिन वह कहीं भी जाते समय रात का समय ही देती थी। 

“तुम हर जगह रात के समय जाना क्यों पसंद करती हो?” एक बार मैंने पूछ ही लिया। 

रात मुझ बड़ी पुरसुकून लगती है। वैसे भी मुझे हंगामे और हजम पसंद नहीं हैं।” उसने जवाब दिया। मैं खामोश हो गया। 

एक दिन ऐसी बात हुई, जिसने मझे चिंता में डाल दिया। उस दिन हम ‘हार्डनोज’ रेस्तरां में चिकन-बर्गर खाने गए। रेस्तरां लगभग खाली था। मैंने दो बर्गर्स का आर्डर दिया, तो वटर न मुझहरा से देखा। जब मैं डोना से बातें करने के साथ-साथ बर्गर से आनंदित हो रहा था, तब भी वह मुझ विस्मय से देख रहा था। 

“आखिर हम ऐसी कौन-सी अनोखी बात कर रहे हैं कि यह वेटर हमें बार-बार चैक कर रहा है?” मैंने डोना से सरगोशी की। 

“मैं और तुम एक साथ। यह बात तो अनोखी ही है न।” डोना ने रहस्यपूर्ण मुस्कराहट के साथ कहा, जो मुझे बहुत बुरी लगी। 

एक बात और थी। जब कभी हम बाहर जाते और रात को देर से वापस आते, तो डोना मुझे हमेशा उस वक्त तक शुभ रात्रि न कहती, जब तक मैं अपने अपार्टमेंट का दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल नहीं हो जाता था। मैंने उसे उसके घर में दाखिल होते हुए कभी नहीं देखा था। 

एक बार चांदनी रात में मिसीसिपी नदी के किनारे टहलते हुए मैंने यूं ही डोना से उसके गुलूबंद के बारे में पूछ लिया कि आखिर इतनी खूबसूरत गरदन के गिर्द वह गुलूबंद क्यों पहने रहती है। डोना काफी देर तक मुझे टालती रही, फिर मुस्कराकर उसने गुलूबंद उतार दिया और पलक झपकते ही सर्दी की एक तीव्र लहर मेरे पूरे वजूद में प्रवेश कर गई। ऐसा लगता था जैसे उसकी गरदन काटकर फिर से जोड़ी गई हो और अब भी खून उसके गिर्द जमा हो। 

“डर गए न?” डोना की आवाज मुझे फिर से होश की दुनिया में घसीट लाई। 

“नहीं तो, लेकिन बेहतर है कि यह गुलूबंद पहन लो।” मैंने खुश्क होते हुए अपने होंठों पर जुबान फेरी। 

“दरअसल हाल ही मेरा ऑपरेशन हुआ था। जख्म तो भर गया है, लेकिन उसका निशान अभी तक बाकी है। इसीलिए मैं गुलूबंद इस्तेमाल करती हूं, वरना लोग तुम्हारी तरह भयभीत हो जाएं।” उसने विवरण बताया तो मैं शर्मिंदा होकर खामोश हो गया। 

डोना मुझे कभी सुबह के समय नहीं मिलती थी। उसके कथनानुसार वह किसी कंपनी में नौकरी करती थी। जब शाम के साए ढलने लगते थे, तो वह मुझसे मिलने आया करती थी। अक्सर घर में आकर वह कॉफी आदि बना देती और मेरी अस्त-व्यस्त हुई चीजों को करीने से लगा भी देती थी। वह मेरे सभी काम बड़ी आत्मीयता से किया करती थी। सच्ची बात तो यह है कि वह जब भी मेरे काम करती, उस समय बड़ी अपनी-सी लगती थी। 

“कल दोपहर में हम पजाहट होटल’ में लंच करेंगे। क्या खयाल है?” जब वह वापसी के लिए दरवाजे तक आई, तो मैंने कहा। 

“नहीं।” वह सर्द लहजे में बोली। “लेकिन क्यों?” मैं हैरान हुआ, क्योंकि वह होटल पजाहट को बहुत पसंद करती थी। 

“अगर मुझसे दोस्ती कायम रखना चाहते हो, तो मुझसे कभी दिन में मिलने के लिए मत कहना। न ही मेरे मां-बाप के बारे में कभी कुछ पूछना, वरना वह हमारी दोस्ती का आखिरी दिन होगा।” यह कहकर वह तेजी से बाहर निकल गई। 

 “उसने आखिर ऐसा क्यों कहा?” यह सोचते-सोचते मेरा सिर दुखने लगा, तो मैं दोबारा चाय बनाने लगा। डोना सिर्फ मेरी दोस्त ही नहीं, बल्कि हमदर्द और महबूबा भी बन गई थी। जब तक मैं उससे मिल न लेता, मेरा दिन मुकम्मल न होता था। 

अगले दिन वह न मिली तो मैं एक अजीब हालत में बेचैन रहा। सोचा कि उसके घर जाकर ही मालूम करूं। उसका घर नीचे ही तो था। फिर सोचा कि कहीं वह मेरी इस बात का बुरा न मान जाए। दो दिन बाद वह मिली तो मैं बड़ी बेताबी से उससे मिला और बड़ी गरमजोशी से उसके दोनों हाथ थामकर अपने हाथों में ले लिए। लेकिन अगले ही पल मैंने घबराकर उसके दोनों हाथ छोड़ दिए। उसके हाथ बर्फ की तरह बेहद ठंडे थे। 

“लगता है, बहुत बेकरार थे मुझसे मिलने के लिए?” उसने मुस्कराकर पूछा। 

“हां! लेकिन तुम गरम कपड़े क्यों नहीं पहनती हो?” मैंने उसके सर्द हाथों का तसव्वुर करते हुए पूछा। 

“अब उसकी जरूरत जो नहीं रही।” वह फुसफुसाते हुए स्वर में बोली। उसकी आवाज इतनी धीमी थी कि मैं न समझने वाले अंदाज में उसके मुंह की तरफ देखने लगा। 

“डोना! मुझे तुमसे एक जरूरी बात कहनी है।” मैंने मन ही मन कुछ शब्द तरतीब दिए, क्योंकि मैं जानता था कि जो शब्द मैं कहने जा रहा हूं, वह एक आम अमेरिकन लड़की के लिए बेहद मामूली थे, लेकिन डोना एक अलग तरह की लड़की थी, वह मेरे शब्दों का बुरा भी मान सकती थी। 

उस समय भी हम रात के अंधेरे में, पार्क के एक कोने में ठंड से ठिठुरते हुए बैठे थे। मुझे गुस्सा भी आ रहा था कि हम गरम कमरे में हीटर जलाकर भी तो बैठ सकते थे, लेकिन डोना को खुला हुआ वातावरण पसंद था। उस समय वह मजे से आंखें बंद किए बैठी थी और मैं उसके चेहरे के भावों को पढ़ने में मग्न था। 

“हां। कहो, क्या कहना चाहते हो?” उसने आंखें खोलते हुए पूछा। 

“क्या तुम मुझसे शादी करोगी?’ यह कहकर मैं उसकी आंखों में देखने लगा, जिनमें अब मोहब्बत की जगह शोले दहक रहे थे। 

“तो आखिरकार तुम भी एक सामान्य मर्द निकले-अपनी तमन्नाओं और ख्वाहिशों के गुलाम। 

मि. नदीम अहमद, मैं तुम्हें गलत समझी। तम अब इस देश की कल्चर के हिस्सा बन चुके हो । बस, अब आइंदा से मुझसे मिलने की कोशिश मत करना।” यह कहकर वह तेजी से उठी और अपक्षाकृत एक अंधेरे कोने में गायब हो गई। 

अब डोना मेरे लिए एक रहस्यपूर्ण हस्ती का रूप धारण कर चुकी थी। आखिर मैंने उसे सिर्फ शादी की पेशकश ही तो की थी। अपनी मंगेतर साहिरा को भलाकर मैं उसकी जुल्फों का कैदी होने लगा था और वह इस मामूली-सी बात पर नाराज हो गई थी। मैंने फैसला कर लिया कि मैं कल ही मि. केटर से मिलकर बात करूंगा कि डोना इतनी जज्बाती क्यों रहती है? 

उसके बाद मैं भी पार्क से निकलकर अपने कमरे की ओर चल पड़ा। कमरे में पहुंचकर मैंने सबसे पहले हीटर ऑन किया, फिर बिजली की केतली ऑन करके अपनी मेज पर आ बैठा। मेज पर कई दिनों की डाक जमा थी। एक पत्र मेरी अम्मी का भी था, जिसमें उन्होंने हमेशा की तरह जल्दी से जल्दी घर लौट आने और फिर शादी करने की ताकीद की थी। उस पल मुझे स्वयं पर बहुत गुस्सा आया कि मैं अपनी सच्ची मोहब्बत को भुलाकर वक्ती भावनाओं का सहारा तलाश करने क्यों निकल पड़ा था। मैंने जल्दी ही अपने वतन को वापस लौटने का इरादा कर लिया और आश्वस्त हो गया। 

केतली ने सीटी दी तो मैं उठकर किचन में आ गया और यह देखकर विस्मय में डूब गया कि डोना किचन काउंटर से टेक लगाए खड़ी थी। उसकी आंखें अंगारों की तरह सुर्ख हो रही थीं। 

‘दरवाजा तो मैंने अंदर से लॉक कर दिया था. फिर यह अंदर कैसे आ गई। साचा । फिर मेरे दिमाग ने दलील दी_’इसके पास मेरे कमरे की दसरी चाबी जरूर होगा। तो मकान मालिक की बेटी ही।’ 

“तुम इस वक्त यहां कैसे?” मैंने अपनी घबराहट पर काबू पाते हुए पूछा। 

“तुमसे एक बदला चुकाना था।” वह बेहद तल्ख आवाज में बोली-“तुम एशियाई मर्द यहाँ आते हो। अपने मकसद यानी यहां की नागरिकता हासिल करने के लिए यहां की लड़कियों के साथ शादी का नाटक रचाते हो और फिर अपनी वफादारियां बदल लेते हो। इतना सस्ता समझ लिया है तुमने हम लोगों को। मैं तुम जैसे बेवफा आदमी को कभी माफ नहीं कर सकती। तुम भी अपनी मंगेतर से बेवफाई करके यहां अपना मतलब निकालने के लिए मुझसे शादी करना चाहते हो, लेकिन अब मैं किसी के लिए सीढ़ी नहीं बन सकती। मैं तुम्हें खत्म कर दूंगी।” कहकर उसने किचन-काउंटर पर पड़ा तेज धारदार चाकू उठाया और तेजी से मेरी ओर झपटी। अगर मैं उस समय फुरती न दिखाता तो यकीनन वह मेरे सीने में चाकू उतार चुकी होती। 

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“डोना! क्या तुम पागल हो गई हो। होश में आओ बेवकूफ लड़की! मैं बेवफा नहीं हैं।” मैंने चिल्लाकर कहा। लेकिन इतनी देर में उसने बड़ी फुरती से मेरी बांह को छेद डाला। फिर भी है समझाता रहा-“मेरा यकीन करो डोना। मैं बेवफा नहीं। न जाने कौन-सी भावना के अधीन है शादी करने का ख्वाहिशमंद हो गया था। मैं जल्दी ही अपने वतन जाकर अपनी मंगेता लाना चाहता हूं।” 

यह सुनकर डोना पीछे हट गई और बोली-“यही तुम्हारे हक में बेहतर भी है।” इसके बाद वह मुड़ी और तेजी से कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई। 

“पागल लड़की!” कहकर मैं तेजी से अस्पताल की तरफ चल पड़ा। मेरी बांह से तेजी से खून बह रहा था और उस समय मुझे डॉक्टरी सहायता की बेहद आवश्यकता थी। 

मरहम पट्टी करवाने के बाद जब मैं घर लौटा, तो सुबह के आसार प्रकट हो रहे थे। नमाज अदा करके मैं अपनी जिंदगी बच जाने पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए बिस्तर में जा घुसा। 

अगली सुबह जागकर मैंने चाय की प्याली हलक से उतारी और अपने मालिक-मकान के दरवाजे पर पहुंच गया, ताकि उन्हें उनकी बेटी के कारनामे से आगाह करूं। दस्तक देने पर मि. केटर ने दरवाजा खोला और मेरी बांह पर पट्टी बंधी देखकर मुझे अपने घर के अंदर ले गए। 

“ओह गॉड! यह सब कैसे हआ?’ मिसेज केटर ने बडी हमदर्दी से मेरी बांह को छुआ। 

“यही सब कुछ तो मैं आपको बताने के लिए आया हूं।” मैंने व्यंग्यात्मक स्वर में कहा और पूरी कहानी सुनाने के बाद उनको सलाह दी—“मि. केटर ! मेरे खयाल में आपको डोना के सिलसिले में किसी अच्छे मनोरोग विशेषज्ञ से मशविरा करना चाहिए। वह किसी के लिए भी खतरा बन सकती हैं|

“वह इलाज की हद से दूर निकल चुकी है, माई ब्वाय।” मि. केटर ने सिगार का कश लेते हुए गंभीर स्वर में कहा—’डोना को इस दुनिया से गए हुए पांच साल व्यतीत हो गए हैं। और इन पांच सालों में तुम तीसरे व्यक्ति हो, जो उसका शिकार हुए हो।” मि. केटर ने रहस्योद्घाटन किया। 

डोना इस दुनिया में नहीं है। उसके सर्द हाथों का खयाल आते ही सर्दी की एक तीव्र लहर मेरे समूचे जिस्म को कंपायमान कर गई। 

“क्या कह रहे हैं आप?” मेरे शब्द मेरे कंठ में अटकने लगे। 

“हां! पांच बरस पहले तुम्हारा एक देशवासी हमारा किरायेदार था। डोना उससे मोहब्बत करने लगी थी। दोनों की शादी भी हो गई किंतु कुछ ही दिनों बाद दोनों के बीच मतभेद जन्म लेने लगे। अक्सर दोनों में किसी न किसी बात को लेकर तकरार होती रहती। एक दिन उनका झगड़ा इतनी शिद्दत अख्तियार कर गया कि उसके पति ने गुस्से में उसे चाकू से जिबह कर डाला और फरार हो गया। तब से शायद उसकी बेकरार आत्मा हर नौजवान से बदला लेने को बेचैन रहती है। तुम खुश किस्मत हो कि किसी बड़े नुकसान से महफूज रहे हो। हम तो समझते थे कि शायद डोना की बेकरार आत्मा को करार आ गया है, तभी तुमने पहले कोई शिकायत नहीं की थी, वरना तुमसे पहले तो यह आलम था कि अगर कोई अकेला नौजवान कमरा किराए पर लेता, तो वह यहां एक हफ्ता भी मुश्किल से ठहर पाता था। बेहतर है तम यह अपार्टमेंट खाली कर दो, ताकि अब हम इसे सील कर दें।” यह कहकर मि. केटर अपने आंसू पोंछने लगे। 

मेरी हालत तो ऐसी थी कि काटो तो बदन में खून न हो। मैं जड़ता जसा हाल अपार्टमेंट में आ गया और अपना सामान पैक करने लगा। 

‘तो क्या वह डोना की प्रेतात्मा थी, जिसे मैं प्यार करने लगा था। क्या वह प्रतात्मा उसस मोहब्बत करने लगी थी?’ मैंने स्वयं से प्रश्न करते हए पैकिंग शरू कर दी। मैंने निश्चय कर लिया जल्द से जल्द अपने वतन लौट जाऊंगा। जब तक मेरी हवाई जहाज की सीट कन्फर्म नहा हा जाता, तब तक का समय अपने किसी मित्र के घर पर ठहरकर गुजार लूंगा। 

जब मैं अपना सामान लेकर बाहर निकला, तो मैंने जीने की आखिरी सीढ़ी पर कदम रखते हुए पछि मुड़कर देखा। मुझे लगा जैसे डोना कमरे की खिड़की से मुझे हाथ हिलाकर ‘खुदा हाफिज’ कह रही है। उस समय उसकी गहरी नीली आंखों से आंसू बह रहे थे। मैंने भी बेइख्तियार होकर उसकी तरफ विदाई सूचक हाथ हिला दिया और भारी कदमों से सड़क पर आ गया। फिर यह सोचते हुए कि क्या मेरे प्रियजन और दूसरे लोग मेरे साथ घटने वाली इस घटना पर यकीन कर पाएंगे, मैं आगे की ओर बढ़ने लगा। चलते समय भी मेरे दिमाग में यही बात रह-रहकर घुमड़ रही थी कि क्या मेरे मित्र और प्रियजनों को मेरी बांह पर बना जख्म का यह निशान यह यकीन दिला सकेगा कि यह एक ऐसी अतृप्त  आत्मा की निशानी है, जिसके साथ बेवफाई की गई थी? 

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