राजा की कहानी-फारस का राजा

राजा की कहानी

राजा की कहानी-फारस का राजा

फारस का राजा बहुत बड़े और समृद्ध राज्य पर शासन करता था। वह बहुत प्यारा और खुशदिल राजा था। लेकिन उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था, जो उसके बाद उसकी गद्दी संभालता। 

एक दिन राजा अपने दरबार में बैठा था। तभी एक व्यापारी ने आकर कहा कि वह उससे अकेले में बातें करना चाहता है। व्यापारी अपने साथ एक सुंदर गुलाम लाया था। राजा को वह गुलाम बहुत पसंद आया। वह गुलाम एक सुंदर औरत थी। राजा ने उससे शादी कर ली और अपने महल में सुख से रहने लगा। 

राजा ने अपनी नई रानी को बहुत से गहने और कपड़े दिए। उसकी सेवा के लिए अनेक नौकर और नौकरानियां नियुक्त कर दिए। उसका कमरा समुद्र के काफी निकट था। राजा अक्सर देखता था कि नई रानी खिड़की पर बैठी उदास आंखों से समुद्र को देखती रहती थी। उसे दरबार में जाने का कोई शौक नहीं था। वह राजा के प्यार और दुलार की ओर भी ज्यादा ध्यान नहीं देती थी। 

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नई रानी किसी से नहीं बोलती थी। वह राजा से भी बातें 

नहीं करती थी। जब राजा ने उसके नौकरों से पूछा, तो पता चला कि वह किसी से बात नहीं करती थी। यह सुनकर राजा बहुत चिंतित हुआ। 

एक साल तक रानी ने किसी से भी एक शब्द नहीं कहा। एक दिन राजा और रानी के घर एक बेटे ने जन्म लिया। 

राजा ने रानी से कहा, “मुझसे एक बार बात करो। फिर चाहे मैं मर भी जाऊं, तो मुझे परवाह नहीं होगी।” 

यह सुनकर रानी मुस्कराई और राजा को उसकी दयालुता एवं उपहारों के लिए धन्यवाद दिया। 

 “मैं यह सोचती थी कि आप मुझे अपना गुलाम समझते हैं, लेकिन आपने हमेशा मुझ पर अपना प्यार लुटाया। अब मैं भी आपसे बहुत प्यार करती हूं।” नई रानी ने कहा। 

यह सुनकर राजा खुशी से झूम उठा। उसने तुरंत वजीर को बुलाया और शहर भर में धूमधाम से जश्न मनाने का हुक्म दिया।

इसके बाद वह रानी के पास गया। वह रानी की कहानी सुनना चाहता था और उसके इतने लंबे मौन का कारण जानना चाहता था। उसने कहा, 

“अगर तुम चाहो, तो अपने जीवन की कहानी मुझे सुना सकती हो। इससे तुम्हारे मन का भार हल्का हो जाएगा और शायद मैं तुम्हारी समुचित रूप से सहायता कर सकू।” 

रानी बोली, “मैं गुलामी के जीवन से परेशान हो चुकी थी, इसीलिए किसी से बात नहीं करना चाहती थी। दरअसल मैं समुद्र के राजा की बेटी गुलनार हूं। मेरे पिता के बाद मेरा भाई राजकाज संभालने लगा था। एक दिन दूसरे देश के राजा ने हमारे राज्य पर आक्रमण कर दिया और मेरे भाई को हटाकर राज्य पर कब्जा कर लिया। मैं और मेरा परिवार छिपकर रहने लगा। बाद में मेरा भाई फिर राजा बन गया। 

“मेरा भाई चाहता था कि मैं धरती के किसी शक्तिशाली राजा से शादी कर लूं, ताकि हम सभी सुरक्षित हो सकें और हमें दोबारा ऐसे आक्रमण से डरना न पड़े। लेकिन मैं समुद्र के ही किसी राजा से शादी करना चाहती थी। मैंने अपने भाई का पुरजोर विरोध किया, परंतु वह नहीं माना। फिर एक रात मैं चुपचाप अपने परिवार को छोड़कर दूर द्वीप पर चली गई। 

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“मैं उस द्वीप पर एकांत में रहने लगी। एक दिन एक बुरे आदमी ने मुझे वहां देखा और जबरदस्ती अपने साथ ले गया। वह मुझसे शादी करना चाहता था। जब मैंने विरोध किया, तो उसने मुझे गुलाम बनाकर बेच दिया। मुझे अपने परिवार की बहुत याद आती है।” 

फिर रानी गुलनार ने राजा को अपने समुद्री जीवन की सारी बातें बताईं। राजा यह जानकर बहुत हैरान था कि वे लोग कैसे जीते थे, क्या बोली बोलते थे, किस तरह सब कुछ साफ देखते थे और उनके पास कितना धन आदि था।

गुलनार चाहती थी कि वह अपने भाई से फारस के राजा यानी अपने पति की भेंट करवाए। राजा मान गया। गुलनार ने राजा से कहा कि वह पर्दे के पीछे छिप जाए और चुपचाप देखता रहे। फिर उसने आतिशदान में जादुई चूर्ण डाला, तो उसमें से अजीब-सा धुआं उठने लगा। 

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उसके बाद उसमें से एक अजीब-सी संगीत-लहरी निकलने लगी। राजा बहुत हैरान हुआ। उसने अपने पूरे जीवन में ऐसा संगीत कभी नहीं सुना था। यह तो अच्छा हुआ कि उसने अपने सारे दरबानों को वहां से हटा दिया था, वरना वे भी वह संगीत सुनकर चकरा जाते। 

राजा की समझ में नहीं आ रहा था कि उस संगीत का गुलनार के मायके वालों से क्या संबंध है। वह सोचने लगा कि क्या उसके मायके के लोग आतिशदान से अंदर आएंगे। 

तभी राजा ने खिड़की से बाहर झांकते हुए देखा कि नीले-हरे रंग के चोगे वाला एक आदमी समुद्र से निकलकर ऊपर आ गया। उसके पीछे हरे चोगे में एक औरत और पांच अन्य लोग भी समुद्र से ऊपर आ गए।

हरे रंग के चोगे वाला आदमी गुलनार का भाई राजा सालेह, हरे चोगे वाली औरत उसकी मां और कुछ संबंधी थे। वे सब खिड़की से अंदर आ गए और गुलनार से गले मिले। फिर वे उससे वापस चलने के लिए कहने लगे। लेकिन उन्हें पता नहीं था कि गुलनार एक बेटे की मां बन चुकी है। 

गुलनार ने उन्हें बताया कि अब वह अपने पति के साथ रहती है, जो उससे बहुत प्यार करता है। 

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उसकी मां ने कहा, “बेटी! पूरा एक साल बीत गया। हमने तुम्हें बहुत ढूंढा, लेकिन तुम्हारा कोई पता नहीं चला। तुम्हारे भाई को भी बाद में बहुत अफसोस हुआ। क्या तुम उसे माफ कर दोगी। उसके कारण ही तुम्हें परिवार को छोड़ना पड़ा और तुम गुलाम बन गईं।” 

“मां, मेरे पति मुझसे गुलामों की तरह नहीं पेश आते। मैं यहां की रानी हूं। उनके साथ दरबार में जाकर न्याय करती हूं। वे बहुत अच्छे और भले हैं। अब मैं एक बेटे की मां भी हूं।” गुलनार ने अपनी मां को बताया। 

यह सुनकर सभी लोग बहुत खुश हुए। फिर गुलनार ने उन्हें खाने की दावत दी। 

लेकिन अचानक उन लोगों की आंखें लाल हो गईं। ऐसा लगा कि वे आग उगल रही हों। यह देखकर राजा को हैरानी हुई कि उन्हें अचानक क्या हो गया। तभी गुलनार ने अपने पति को पर्दे के बाहर बुलाया और सबसे उसका परिचय करवाया। सभी लोग आपस में मिलकर बहुत खुश हुए। राजा ने भी सबको अपने यहां दावत का न्यौता दिया। 

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गुलनार ने राजा को बताया कि वे लोग इसलिए गुस्सा हो गए थे कि अगर राजा न बुलाता, तो वे गुलनार के घर खाने पर कैसे आ सकते थे। 

उस दिन शाही भोज में बहुत रंग जमा। गुलनार के सारे परिवार ने खूब आनंद उठाया। नए मेहमान राजकुमार बदर को बना-संवारकर महफिल में लाया गया। सालेह को अपने भानजे से मिलकर बड़ी खुशी हुई। वह उसे गोद में उठाकर नाचने लगा। फिर वह महल की खिड़की से समुद्र में कूद गया। राजा को डर लगा कि बच्चा कहीं पानी में डूब न जाए। 

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गुलनार ने राजा से कहा कि वह परेशान न हों, ऐसा कुछ नहीं होगा। कुछ ही देर में मामा-भानजा लौट आए। ऐसा लग रहा था, जैसे बच्चे को भी पानी में बहुत आनंद आया। 

दरअसल, सालेह अपने भानजे को पानी में इसलिए ले गया था, ताकि उसे पानी के अंदर रहना आ जाए। उसने बच्चे को पानी में रहने की जादुई ताकत दे दी, ताकि वह अपनी मां के साथ उनसे मिलने आ सके। 

राजा सालेह ने फारस के राजा को हीरे, मोती, जवाहरात, मोतियों की लड़ियां और बहुत से कीमती उपहार दिए। 

फिर वे सब वापस लौट गए, लेकिन गुलनार और राजा से मिलने कोई न कोई आता रहता था। ऐसी स्थिति में गुलनार को काफी सुकून मिलता था। वह राजा को सारी बातें बताया करती थी। अब गुलनार सभी नौकर-चाकरों से काफी बातें करती थी और उनकी हर संभव सहायता करने के लिए सदैव तैयार रहती थी। नौकर-चाकर भी हमेशा गुलनार का ख्याल रखते थे और उसका बहुत मान-सम्मान करते थे। 

गुलनार को हंसता-खिलखिलाता देखकर राजा बहुत प्रसन्न होता था और उसके लिए सदैव कुछ न कुछ उपहार जरूर लाया करता था। राजा के एक बेटा था और गुलनार जैसी सुंदर-प्यारी रानी, जिसका मुकाबला कोई भी व्यक्ति नहीं कर सकता था। 

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जब बदर बड़ा हुआ, तो उसे समुद्र में स्थित अपने ननिहाल के बारे में पता चला। वह पानी में रहने की जादुई ताकत पा चुका था, इसलिए जब भी उसका मन करता, वह अपनी नानी और मामा वगैरह से मिलने चला जाता था। उनके साथ समय बिताकर उसे बहुत अच्छा लगता था। 

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