रेनफॉरेस्ट क्या है -प्रकृति की खूबसूरत देन है रेनफॉरेस्ट।

प्रकृति की खूबसूरत देन है रेनफॉरेस्ट

 वर्षावन यानी रेनफॉरेस्ट क्या है– वर्षावन यानी रेनफॉरेस्ट को पृथ्वी का फेफड़ा कहा जाता है। इसका कारण यह है कि पृथ्वी के केवल 2 प्रतिशत भाग पर वर्षावन हैं, लेकिन पृथ्वी पर 28 प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन इन्हीं वर्षावनों से होता है। दुनिया में लगभग 50 से 75 प्रतिशत तक पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की प्रजातियां यहां की मूल निवासी हैं। 

वर्षावन उन जंगलों को कहते हैं,जहां बहुत अधिक वर्षा होती है। यहां एक वर्ष में 250 सेंटीमीटर से 450 सेंटीमीटर तक वर्षा होती है। वर्षावन दो प्रकार के होते हैं: उष्ण कटिबंधीय वर्षावन (ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट) और समशीतोष्ण वर्षावन (टेंपरेट रेनफॉरेस्ट)। 

 

रेनफॉरेस्ट

उष्ण कटिबंधीय वर्षावन लंबे पेड़ों, उष्ण यानी गरम जलवायु और भारी वर्षा वाले वन हैं। इन्हें पृथ्वी की सबसे बड़ी फार्मेसीभी कहा जाता है, क्योंकि 25 प्रतिशत औषधियां इन्हीं वर्षावनों से प्राप्त होती हैं। वर्षावन अफ्रीका,एशिया, ऑस्ट्रेलिया, मध्य और दक्षिण अमेरिका में पाए जाते हैं। विश्व में अमेजन सबसे बड़ा वर्षावन है। 

कैनोपी में होता है जीवन 

 

वर्षावन ऊंचे पेड़ों की शाखाओं और पत्तियों से एक छत बनाते हैं, जिसे कैनोपी कहते हैं। यह जमीन से करीब 100 फुट की ऊंचाई पर होती है। वर्धावन में 70 से 90 प्रतिशत तक जीवन पेड़-पौधों के ऊपर ही पाया जाता है। यहां बंदर, स्लॉथ, सांप, मेढक, गिरगिट, गिलहरी और छोटी बिल्लियां आदि रहती हैं। कैनोपी में पत्तियों की मात्रा इतनी अधिक होती है कि कुछ फुट की दूरी से अधिक कुछ दिखाई नहीं देता है। 

ग्लोबल वार्मिंग का समाधान हैं वर्षावन 

वर्षावन कार्बन डाइआक्साइड को अवशोषित (अब्जॉब) करके दुनिया की जलवायु को स्थिर बनाने में मदद करते हैं और ग्लोबल वार्मिंग का समाधान करते हैं। ये वन वर्षा को लाकर तापमान को औसत स्तर पर लाने में मदद करते हैं। 

 

रेनफॉरेस्ट

पौधों और वनजीवों को आवास प्रदान करते हैं

वर्षावन में पेड़-पौधों और जानवरों की बहुत अधिक प्रकार की अद्भुत प्रजातियां पाई जाती हैं। कई ऐसी प्रजातियां, जिन्हें लुप्त माना जाता है, वे भी वर्षावनों में पाई जाती हैं। इसका कारण यह है कि वनों के कटने से जो प्रजातियां समाप्त सी हो जाती हैं, उन्हें वर्षावन प्राकृतिक आवास देते हैं, क्योंकि बहुत से जीव-जंतुओ को दुनिया भर के चिड़ियाघर भी नहीं बचा सकते। 

वर्षावन का धरातल

 कैनोपी की पत्तियां वर्षावन के धरातल को एक नम और अंधेरे वाला स्थान बनाती हैं। वन के धरातल में अपघटन की क्रिया होती है। यानी पेड़-पत्तियां और मरे हुए जीव-जंतुओं के सड़ने से पेड़-पौधों के लिए आवश्यक पोषक पदार्थ बन जाते हैं, जो उनके लिए भोजन की जरूरत को पूरा करते हैं। यहां तरह-तरह के फफूंद यानी कुकरमुत्ते पैदा हो जाते हैं। वर्षावन के धरातल में हाथी, तापीर और जगुआर जैसे प्राणी पाए जाते हैं। 

 

जल चक्र को बनाने में मदद करते हैं 

प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) की क्रिया द्वारा वर्षावन पेड़-पौधों की पत्तियों से पानी को मुक्त कर देते हैं। ये नमी बादलों के निर्माण में सहायक होती है। अमेजन के वर्षावनों में इकोसिस्टम का जल चक्र 50 से 80 प्रतिशत नमी को बरकरार रखता है। 

जमीन के कटाव को कम 

करते हैं वर्षावन के पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बाँधने में मदद करती हैं। जब पेड़ों को काट दिया जाता है, तो वर्षा होने पर मिट्टी कटकर पानी के साथ नदियों में चली जाती है। फिर वह लोगों और मछलियों के लिए परेशानी का कारण बनती है। उथले यानी गंदले पानी में नाव चलाने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसलिए वर्षावन जमीन के कटाव को रोकने के लिए जरूरी होते हैं। 

क्यों पाई जाती है जैव विविधता

वर्षावनों में बहुत अधिक प्रकार के पेड़-पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं। इसका कारण यह है कि यहां सूर्य का प्रकाश बहुत अधिक होता है। फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया में पेड़-पौधे सूर्य के तेज प्रकाश में वायु से कार्बन डाइऑक्साइड और भूमि से पानी लेते हैं और ऑक्सीजन को छोड़ते हैं। इससे खाने वाले पदार्थ यानी कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है। भोजन के ज्यादा मात्रा में पैदा होने के कारण ही यहां इतने अधिक जीव-जंतु पाए जाते हैं। 

वर्षावन में मछलियां

वर्षावन की नदियों, झीलों व तालाबों में मछलियों की अधिकांश प्रजातियां पाई जाती हैं। अभी तक इनकी 3000 से अधिक प्रजातियों को खोज लिया गया है। ताजे पानी के एक्वेरियम में रहने वाली अधिकांश मछलियां यहां पाई जाती हैं। 

वर्षावनों में इकोटूरिज्म 

 

रेनफॉरेस्ट

पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए इकोटूरिज्म एक अच्छा प्रयास है। इसके द्वारा प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य और उसके महत्वपूर्ण योगदान को समझा जा सकता है।

वर्षावन की महान सभ्यताएं 

 

प्राचीन काल में वर्षावनों के आसपास कई महान सभ्यताएं पनपी थीं।इनमें माया, इंकाव एजटेक प्रमुख हैं। इनके लोगों को पर्यावरण की समस्याओं के कारण विनाश का सामना करना पड़ा। 

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