रेल का आविष्कार कैसे हुआ-Rail ka aviskar kaise hua

Rail ka aviskar kaise hua

रेल का आविष्कार कैसे हुआ-Rail ka aviskar kaise hua

एक शरारत बहुत बड़ा आविष्कार बन जाएगी, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। एक दिन रसोईघर में बैठे जेम्सवाट को खन-खन जैसी कोई आवाज सुनाई दी, लेकिन चारों ओर नजर दौड़ाने के बाद भी आवाज करने वाली चीज उन्हें दिखाई नहीं पड़ी। बड़े गौर से देखने पर पता चला कि आने वाली आवाज चूल्हे पर चढ़ी केतली के ढक्कन के बार-बार ऊपर-नीचे गिरने की थी। उन्होंने देखा कि पानी गरम होने से भाप बनती थी, जिसके ऊपर उठने से ढक्कन ऊपर उठता था और निकल जाने से ढक्कन नीचे गिर पड़ता था। 

Rail ka aviskar kaise hua

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जेम्स की चाची को उनका शांत होकर केतली की ओर देखना अच्छा नहीं लगा और वह कब उन्हें डांटकर चली गई, यह उनको पता ही नहीं चल पाया। उन्हें तो यह देखने में और भी मजा आ रहा था। कुछ देर बाद उन्होंने उस ढक्कन के ऊपर कोयले का एक टुकड़ा रख दिया। फिर भी ढक्कन को भाप ने थोड़ी देर के लिए ऊपर उठा दिया। इससे उनको लगा कि भाप में बड़ी शक्ति होती है।

यह देखने के बाद जेम्सवाट के दिमाग में एक विचार आया कि क्यों न भाप की शक्ति का प्रयोग कर कोई गाड़ी बनाई जाए, जो चल सके। उनकी इस सोच ने वो कर दिखाया, जिसकी कभी किसी ने कल्पना नहीं की थी। 

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इसके बाद रिचर्ड ने जमीन पर चलने वाला इंजन बनाया। फिर स्टीवेन्शन नामक एक आदमी ने ऐसा इंजन बनाया जो पटरियों पर चल सकता था तथा साथ में सामान एवं यात्रियों को भी ढो सकता था। यही प्रयास आगे चलकर आधुनिक रेल के विकास का कारण बनें। 

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