रहस्य रोमांचक कहानियां-वह कहां से आया था? 

रहस्य रोमांचक कहानियां-वह कहां से आया था? 

रहस्य रोमांचक कहानियां-वह कहां से आया था? 

रहस्य रोमांच सस्पेंस और हैरत में डाल देने वाली विश्व की ऐसी सत्य घटना है जो आज भी रहस्य की धुन में दफन है

लोग उसे देखकर आश्चर्यचकित थे तथा आपस में कानाफूसी कर रहे थे कि इतने गंदे तथा पुराने कपड़े पहने कौन हो सकता है यह आदमी? वह व्यक्ति अपने चारों ओर के वातावरण को अचंभित आंखों से इस प्रकार देख रहा था जैसे उस स्थान को परख रहा हो। शक्ल-सूरत से किसी ऊंचे घराने का लगने के अलावा वह कुछ नहीं बोल पा रहा था। युवावस्था होने के बावजूद उसका मानसिक विकास उतना ही था, जितना किसी भी तीन वर्ष के बच्चे का होता है। इस पर भी वह ढंग से चल नहीं पा रहा था। ऐसा लगता था जैसे उसने चलना सीखा ही न हो। 

‘यह व्यक्ति कहां से आया है?’ लोग उसे हैरानी से देख कर सोच रहे थे और वह अत्यधिक व्याकुल हो रहा था। केवल न्यूरैमबर्ग के निवासियों के लिए ही वह अजनबी नहीं था बल्कि वह इस समूचे पृथ्वी लोक के लिए भी अजनबी था। 

रहस्य रोमांचक कहानियां-वह कहां से आया था? 

अब उसके संबंध में अनेक प्रकार की अफवाहें फैलने लगी। लोगों ने उससे बात करनी चाही थी। थोड़े ही दिनों में बच्चों की तरह रोते हुए इधर-उधर भटकते हुए उस व्यक्ति के संबंध में न्यूरैमबर्ग के खाते-पीते निवासी गंभीर रूप से सोचने लगे। न केवल न्यूरैमबर्ग बल्कि पूरा जर्मनी उस व्यक्ति के रहस्य को जानने के लिए उत्सुक हो उठा। 

जॉर्ज वैशमैन (जूते बनाने का कार्य करने वाले व्यक्ति) ने सबसे पहले उस व्यक्ति से पूछताछ करने की पूरी कोशिश की। परंतु बस केवल एक शब्द ‘कैस्पर हाउजर’ के अलावा वह उससे कुछ भी उगलवा नहीं सका। वैशमैन क्योंकि बहुत दिनों तक उसके साथ सहानुभूति दिखाता रहा था, शायद इसीलिए उस व्यक्ति ने अपने पास छिपाया हआ एक पत्र उसे दिखाया जिस पर किसी कैप्टन का साफ-साफ नाम व पता लिखा हुआ था। वैशमैन ने उस पते को ढूंढ़ निकाला और कैस्पर का उस कैप्टन तक पहुंचा दिया। 

कैस्पर जबसे दिखाई दिया था, उसने कुछ भी खाया-पीया नहीं था। क्योंकि कौन उसे क्या खिलाता? कैप्टन के पास पहुंचकर लगभग सात दिन के भूखे कैस्पर के सामने बड़ा उम्दा किस्म का भोजन रखा गया। परंतु किन्हीं अज्ञात कारणों से उसने खाने से इंकार कर दिया और केवल सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाने लगा। 

कैस्पर द्वारा दिया गया पत्र भी कैस्पर की ही तरह रहस्यमय था, जिसमें लिखा गया था कि पत्र लिखने वाले व्यक्ति को एक बच्चा अपने घर के दरवाजे पर पड़ा मिला था। अत्यधिक गरीब होते हुए भी उस व्यक्ति ने उस बच्चे को उठा था और उसे 13 वर्ष तक एक बंद कमरे में रखा। उसे किसी से भा मिलने-जुलने नहीं दिया गया। 

पत्र को पढ़ने के बाद रहस्य और भी गहरा हो गया, क्योंकि पत्र में बच्चे को गुप्त रखकर 13 वर्ष तक दुनिया से अलग रखने का कारण नहीं लिखा हुआ था।  पत्र  में बच्चे को और अधिक न रख पाने की असमर्थता प्रकट की गई थी आर इसीलिए बच्चे को सुरक्षित हाथों में सौंपने की गरज से पत्र लिख कर कैस्पर को छोड़ दिया गया था। 

अंत में पत्र में बड़ी विचित्र बात यह लिखी हुई थी कि यदि कैप्टन इस व्यक्ति को स्वीकार न करना चाहे तो उसके लिए कहीं अच्छा होगा कि वह कैस्पर को समाप्त कर दे। 

कैस्पर ने अपना पिछला पूरा जीवन अंधेरी कोठरी में व्यतीत किया था। अतः न तो उसे समय का ज्ञान था और न ही उसे इस बात का ज्ञान था कि उसके अलावा और लोग भी इस धरती पर बसते हैं। उसने तो केवल स्वयं को तथा अपने एक जेलर को ही देखा था।

अपनी कोठरी में जब भी वह नींद से जागता था, उसकी आंखों के सामने धुंधला सा प्रकाश होता था और बिस्तर के पास रोटी और पानी पड़ा होता था। उसके हाथ-पांवों को जंजीर से बांधा जाता था। कई बार वह महसूस करता था कि जो पानी उसे दिया गया था उसका स्वाद कुछ कड़वा था। परंतु उस पानी को पीकर उसे गहरी नींद आती थी। इसी प्रकार एक दिन जब वह नींद से जागा तो उसे घसीट कर उस जेलनुमा कमरे से बाहर खींच लिया गया और न्यूरैमबर्ग की सड़कों पर एक पत्र देकर छोड़ दिया गया। 

कैस्पर को न्यूरैमबर्ग के मेयर के सामने पेश किया गया। मेयर को उसकी दयनीय दशा देखकर बहुत दया आई, क्योंकि मेयर का यह विचार था कि यह व्यक्ति किसी जुर्म का शिकार हुआ है। मेयर ने ऐलान किया कि जो भी कोई इस व्यक्ति के संबंध में जानकारी देगा उसे बहुत सा इनाम दिया जाएगा। लोग कैस्पर के संबंध में बड़े-बड़े विचित्र अनुमान लगाने लगे। कोई कहता कि यह जर्मनी राजघराने के किसी सदस्य की नाजायज औलाद है, परंतु कई लोग इस बात पर विश्वास करने लगे थे कि वह व्यक्ति इस पृथ्वी का न होकर किसी अन्य लोक का प्राणी है। 

जर्मनी यूनिवर्सिटी के ‘प्रोफेसर डाउमर’ कैस्पर की दशा से इतने प्रभावित हुए कि उस पर शोध करने की गरज से उसे अपने घर में पनाह दे दी और कुछ समय पश्चात सहानुभूति भरा व्यवहार पाकर कैस्पर उन्हीं का हो गया। प्रोफेसर ने उसकी मानसिक उन्नति का प्रयत्न किया और उसका विवरण रखने लगे। कर समय पश्चात प्रोफेसर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि जॉर्ज वैशमैन को मिले रहस्यमय पत्र में लिखा गया विवरण सर्वथा झूठ है और यह व्यक्ति इस लोक का प्राणी ही नहीं है। प्रोफेसर ने कैस्पर में ऐसी क्षमताएं देखीं जो किसी अन्य लोक के निवासियों में ही संभव हो सकती हैं। 

प्रोफेसर ने पाया कि कैस्पर भले ही अनपढ़ है। परंतु उसमें बहुत सी अलौकिक क्षमताएं हैं। जैसे कैस्पर घुप्प अंधेरे में भी देख सकता था और वस्तुओं को पहचान सकता था। 

शराब का ग्लास केवल सूंघने मात्र से उसे नशा हो जाता था। वह कहीं छिपाई हुई किसी धातु की वस्तु को केवल सूंघते-सूंघते बता देता था कि वह कहां छिपाई गई है। 

प्रोफेसर कैस्पर की इस क्षमता से बहुत प्रसन्न थे, परंतु वह इसे गुप्त रखना चाहते थे, वह चाहते थे कि कैस्पर पृथ्वी के नीचे गड़े धन का पता लगाने में उनकी सहायता करेगा। 

कैस्पर में सीखने की बहुत चाह थी और प्रोफेसर ने भी उसकी उन्नति में पूरी सहायता की। थोड़े ही समय में वह इतना कुछ सीख गया था कि वह सजीव चित्र बनाने लगा था, परंतु वह चित्र बड़े विचित्र जानवरों तथा दृश्यों के होते थे जो इस धरती पर नहीं देखे जा सकते। उसमें ऐसी अलौकिक आकर्षण शक्ति थी कि खूखार हिंसक जानवर भी उसे देखकर उसके पांव चाटना शुरू कर देते थे। 

इसी प्रकार कैस्पर तथा प्रोफेसर इसी खुशी में अपने दिन व्यतीत कर रहे थे कि एक दिन जब प्रोफेसर की बहन की आंख खुली तो उसने कैस्पर के कमरे के बाहर खून के छींटे देखे। कमरे में जाकर देखा तो कैस्पर बेहोश पड़ा था और उसका पूरा शरीर किसी ने जख्मी कर दिया था। ऐसा लगता था जैसे उसकी हत्या करने की कोशिश की गई हो। 

प्रोफेसर ने उसका इलाज अपने बच्चों की तरह करवाया। होश में आने पर उसने प्रोफेसर को बताया कि काले वस्त्रों वाले व्यक्ति ने उस पर हमला किया था और उसे मार डालने की कोशिश की थी। तरह-तरह की अफवाहें पूरे शहर में फैलनी शुरू हो गईं। लोगों का ध्यान पूरे राजघराने की तरफ गया और अनुमान लगाया गया कि राजघराने के किसी सदस्य ने अपना रहस्य खुल जाने के भय से कैस्पर की हत्या करवा देनी चाही होगी। 

कैस्पर  बम्पर को जर्मन की पुलिस द्वारा संरक्षण प्राप्त हुआ। परंतु अधिक समय पुलिस भी उसे संरक्षण नहीं दे सकती थी। इसीलिए वहां की एक स्थानीय महिला जिसका नाम ‘पराल्ड बीहोल्ड’ था, ने कैस्पर को पुलिस संरक्षण से ने पास रखने के लिए ले लिया। परंतु बाद में वह महिला बड़ी क्रूर साबित हुई।

जब भी कैस्पर उसकी बात नहीं मानता था तो वह उसे जानवरों की तरह मारती-पीटती की वास्तव में वह महिला कैस्पर से कुछ और चाहती थी। इसी प्रकार कभी वह किसी दयालु परिवार का सदस्य बन जाता तो कभी किसी क्रूर परिवार का। परंतु सामाजिक रूप से वह नितांत अकेला ही रहा। अधिक समय नहीं बीता कि एक और रहस्यमय पत्र प्राप्त हुआ जो किसी अजनबी ने कैस्पर को दिया और वह व्यक्ति पत्र देकर गायब हो गया। 

नए पत्र के संबंध में अन्य लोगों में इसलिए भी उत्सकता जागी, क्योंकि उस पत्र के साथ एक भेंट थी ‘एक हीरे की अंगूठी।’ वह पत्र ऐसा लगता था जैसे कैस्पर के किसी हितैषी ने भेजा हो, जो दूर कहीं निवास करता है। पत्र लिखने वाला जब कैस्पर से मिलने के लिए आया तो सभी आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि वह व्यक्ति जर्मनी के राजघराने से संबंध रखता था। उस व्यक्ति ने कैस्पर से कहा कि वह अपने अस्तित्व का रहस्य उसे बता दे, परंतु कैस्पर खामोश रहा। कैस्पर ने केवल इतना कहा कि समय आने पर वह अपना रहस्य खोल देगा और बताएगा कि वह कौन है और कहां से आया है? 

परंतु उससे पहले ही जब कैस्पर एक दिन न्यूरैमबर्ग के पार्क में घूम रहा था तो किसी ने बड़ी बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। हत्या इतने रहस्यपूर्ण तथा विचित्र ढंग से की गई थी कि जर्मनी की पूरी पुलिस भी हत्यारे का अथवा हत्या किस प्रकार की गई, इस रहस्य का पता नहीं लगा पाई, क्योंकि न तो पुलिस को हत्या में प्रयोग होने वाला कोई हथियार मिला और न ही किसी ने हत्या होते देखा था।

सबसे रहस्यपूर्ण बात यह थी कि पार्क में जाते हुए पांव के निशान केवल कैस्पर के ही थे, जबकि दिसंबर के महीने में बर्फ पड़ी होती है और किसी के चलने से फौरन निशान पड़ जाते हैं। ‘एनएक्सप्लेंड’ में परामनोवैज्ञानिक फ्रेजर स्टीवार्ट लिखते हैं-‘कैस्पर किस लोक का प्राणी था और वह पृथ्वी पर किस उद्देश्य से आया था अथवा भेजा गया था, यह रहस्य उसके साथ ही कब्र में दफन हो गया।’