रहस्य रोमांच कथा-मधुबाला अपने बंगले में! 

रहस्य रोमांच कथा-मधुबाला अपने बंगले में! 

रहस्य रोमांच कथा-मधुबाला अपने बंगले में!      

रहस्य रोमांच सस्पेंस और हैरत में डाल देने वाली विश्व की ऐसी सत्य घटना है जो आज भी रहस्य की धुन में दफन है।आश्चर्यजनक तथ्य जो अभी तक सिर्फ रहस्य है।

‘महल’ और ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी फिल्मों की ख्याति प्राप्त भारतीय अभिनेत्री मधुबाला के मुंबई स्थित निवास का भू-भाग भूतों का डेरा बन चुका है और वहां पर कोई भी व्यक्ति आसानी से रहने के लिए तैयार नहीं होता। यह बात शुरू में भले ही आपको आश्चर्यजनक लगे। लेकिन इसके तथ्य से इंकार कर पाना किसी के लिए भी संभव नहीं हो पा रहा है। 

मधुबाला की मृत्यु आज से लगभग चार दशक पूर्व हुई थी। गायक-अभिनेता किशोर कुमार के साथ विवाह करने के बाद भी बांद्रा उपनगर में स्थित पाली हिल के अरेबियन विला नामक अपने निवास स्थान में ही वह रहती थी और वहीं दिल में सूराख हो जाने की वजह से उसका देहावसान हुआ था। मृत्यु से कुछ ही क्षणों पूर्व उसने इच्छा व्यक्त की थी कि वह भारत में ही पुनः जन्म लेना चाहती है और जन्म लेकर अभिनय क्षेत्र में ही कार्यरत रहने की उसकी मनोकामना है। 

 ‘मुगल-ए-आजम’ मधुबाला की अंतिम सफल फिल्म थी। अति घातक बीमारी के कारण बाद में वह अभिनय करने में समर्थ नहीं रह पाई और उसी के सपनों में वह आजीवन घुलती रह गई। किशोर कुमार स्वयं भी नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी फिल्मों में अभिनयरत रहे। जिसका बहुत अन्यथा प्रभाव मधुबाला पर पड़ा था।

फिल्मी दुनिया को किसी भी मूल्य पर छोड़ पाना उसके लिए सुखद और संतोषप्रद नहीं था। अरेबियन विला में उन दिनों मधुबाला के पिता अताउल्ला खां और उसकी छोटी बहन चंचल रहती थी। मां की मृत्यु बहुत पहले हो चुकी थी और परिवार का सारा व्ययभार मधुबाला के ही जिम्मे था। इसलिए किशोर कुमार के साथ उसके विवाह का विरोध भी उसके पिता ने किया था। 

मधुबाला की मृत्यु के कुछ ही दिनों बाद अताउल्ला खां भी खुदा को प्यारे हो गय और एक फिल्म निर्देशक के साथ गठबंधन कर चंचल भी अपने नए घर ली गई। उसके बाद काफी दिनों तक वह बंगला परी तरह वीरान पड़ा रहा। 

बाद में फिल्मीस्तान के सर्वेसर्वा सेठ तोताराम जालान ने मधुबाला के नाधिकारियों से वह घर खरीद लिया। उसकी उन्होंने अपेक्षित मरम्मत आर गाई-चुनाई भी करवाई। लेकिन इसके बाद भी कोई उसमें रहने के लिए तैयार नहीं हो पाया। स्वयं जालान के कुछ निकट संबंधी एक दिन जब वहां रहने पहुच तो उन्हें इतने भयावह सपने आए कि रातोंरात उस जगह को छोड़कर उन्हें उल्टे पर अपने घर वापस भाग जाना पड़ा। 

अंतत: जालान ने वह समस्त भू-भाग एक भवन निर्माता के हाथ बेच दिया। उस जगह पर अब एक बहुमंजिला इमारत खड़ी की जा चुकी है, लेकिन अब भी उसके ज्यादातर फ्लैट खाली पड़े हुए हैं और कोई उनमें रहने के लिए तैयार नहीं हाता। लोगों की मान्यता है कि स्वयं मधुबाला वहां प्रेत बनकर रहती है और उसे छेड़ना किसी के लिए भी संभव नहीं। 

आस-पड़ोस के लोगों का कहना है कि प्रत्येक रात 12 बजे के बाद वहां से रोने, गाने और चिल्लाने की आवाजें सुनाई पड़ती हैं और उन आवाजों में मुख्य स्वर स्वयं मधुबाला का रहता है। कुछ लोगों ने तो इन आवाजों को टेप भी कर लिया है। ध्वन्यांकित स्वरों में और मधुबाला की आवाज में आश्चर्यजनक एकरूपता है। इन पड़ोसियों के अनुसार इमारत से रात बिरात उन गानों की आवाजें भी सुनाई पड़ती हैं, जिनको स्वयं मधुबाला के होंठों ने रूपहले पर्दे पर गाया था। इन गानों में ‘महल’ का एक गाना प्रमुख है। 

इससे पूर्व इस तरह के समाचार सिर्फ फतेहपुर सीकरी से मिले थे। वहां के निवासियों के अनुसार आजकल भी हर रात वहां पर तानसेन के गीत सुनाई पड़ते हैं और रुनझुन करते धुंघरुओं की ध्वनी के साथ नृत्य के पदचाप निरंतर कानों में गुंजायमान हुआ करते हैं।

भारतीय पर्यटन विभाग द्वारा विदेशों में फतेहपुर सीकरी का जो प्रचार साहित्य वितरित किया जाता है, उसमें भी यही कहकर पर्यटकों को आकृष्ट करने की चेष्टा की जाती है कि वहां पहुंचकर उनको जीवित प्रेत देखने को मिलेंगे। 

मधुबाला के घर के भू-भाग को भी पिछले दिनों मुंबई के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाने का प्रयास किया गया था। रात में उसके आसपास काफी भीड़ जमा हो जाया करती थी, हालांकि बहुत कम लोगों को मधुबाला की प्रेतात्मा का सान्निध्य सुलभ हो पाया है।