रेडियो तथा टेलीविजन की ध्वनि हमारे कानों तक कैसे पहुंचती है?

ध्वनि हमारे कानों तक कैसे पहुंचती है?

रेडियो तथा टेलीविजन की ध्वनि हमारे कानों तक कैसे पहुंचती है? 

आप यह जरूर जानना चाहेंगे कि रेडियो और टेलीविजन की ध्वनि हमारे कानों तक कैसे पहुंचती है। तरंगें ध्वनि का माध्यम होती हैं। किसी भी माध्यम में अवरोध आने के कारण तरंगें उत्पन्न होती हैं। इनमें गति होती है, जो ऊर्जा स्थानान्तरित करती है। उदाहरण के लिए दो लड़के हाथों में रस्सी के छोर पकड़ते हैं। पहला लड़का रस्सी के छोर को तेजी से ऊपर ले जाता है और फिर तेज गति से नीचे लाता है। ऐसा करने से एक छोर से दूसरे छोर तक तरंगों के माध्यम से ऊर्जा गुजरती है, न कि रस्सी आगे बढ़ती है। इसलिए कहा जाता है कि तरंगें ऊर्जा स्थानांतरित करती है, न कि भौतिक पदार्थ। 

इसे एक अन्य उदाहरण द्वारा भी स्पष्ट किया जा सकता है। एक लड़का दूसरे की ओर बॉल फेंकता है। बॉल पकड़ने वाला ऊर्जा महसूस करता है, क्योंकि बॉल के पकड़ने के साथ ऊर्जा स्थानांतरित होती है। पानी के हौद में यदि कंकड़ डालते हैं, तो गति के साथ तरंगें उत्पन्न होती हैं। ऐसे में कंकड़ तरंगों का माध्यम बनता है। 

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वैज्ञानिक तरंगों के ऊपरी भाग को शीर्ष और निचले भाग को न्यूनतम बिंदु कहते हैं, जबकि वह अधिकतम बिंदु होता है। यदि रस्सी के एक सिरे को खुला छोड़कर तेजी से ऊपर-नीचे करते हैं, तो आप देखेंगे की रस्सी में अधिक तरंगें उत्पन्न होंगी। आप तेजी से रस्सी को हिलाकर तरंगों की गति तेज नहीं कर सकते। तरंगों की गति आवृत्ति पर निर्भर करती है। यह माध्यम के घनत्व पर निर्भर करती है। टाइट खिंची हुई रस्सी की तरंग गति अधिक होगी, बजाय ढीली रस्सी के। तरंगें मोटी रस्सी की बजाय पतली रस्सी पर अधिक तेजी से गुजरती हैं। जैसे-जैसे तरंगों की आवृत्ति में वृद्धि होती है, शीर्ष और न्यूनतम बिंदु के बीच की दूरी कम होती जाती है। वैज्ञानिक इसे ‘शिखर अंतर’ कहते हैं।

तरंगें जब किसी भी माध्यम से गुजरती हैं, तो वहों दो प्रकार की गति काम करती है। पहली, तरंगों की गति और दूसरी, माध्यम की गति। स्थानान्तरित तरंगें माध्यम को ऊपर-नीचे ले जाती है। लंबवत् तरंगें उसी दिशा में परिभ्रमण करती हैं, जिस दिशा में माध्यम परिभ्रमण करता है। ध्वनि तरंगें और भूकंप तरंगें लंबवत् होती हैं। एक माध्यम को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करते समय तरंगों में ऊर्जा प्रतिबिंबित होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि तरंगें किस कोण से नए माध्यम में प्रवेश कर रही हैं। ध्वनि तरंगें दोनों माध्यमों के घनत्व और ध्वनि की गति पर निर्भर करती हैं। हवा में धरती की अपेक्षा कम घनत्व होता है और यह ध्वनि को अपेक्षाकृत धीरे स्थानान्तरित करती हैं। अतः कहा जा सकता है कि ध्वनि तरंगों को प्राप्त ऊर्जा धरती से प्रतिबिंबित होती है। 

अब प्रश्न उठता है कि हम तक कैसे पहुंचते हैं टेलीविजन का चित्र और ध्वनि? 

टेलीविजन दूरसंचार का एक महत्वपूर्ण साधन है। इससे हम विश्व में होने वाली घटनाओं के चित्र देखने के साथ-साथ उसकी आवाज भी सुन सकते हैं। आज तो टेलीविजन द्वारा गीत-संगीत, फिल्म, नाटक इत्यादि का घर बैठे ही आनंद उठाया जा सकता है। यह मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण साधन है। क्या आप जानते हैं कि टी.वी. संदेश हम तक कैसे पहुंचते हैं? आइए, इस बारे में जानें। 

किसी भी कार्यक्रम के टी.वी. पर प्रसारण के लिए टी.वी. कैमरा प्रयोग किया जाता है। यह कैमरा दृश्य के प्रतिबिंब को विद्युत संदेशों में बदल देता है। इसे ‘वीडियो संदेश’ कहते हैं। इस संदेश को अम्प्लीट्यूट मोडलेशन करके ट्रांसमीटर द्वारा प्रसारित किया जाता है। उसी समय कार्यक्रम की ध्वनि को माइक्रोफोन द्वारा विद्युत में बदला जाता है। तत्पश्चात मोडूलेशन करके प्रसारित किया जाता है। यह ऑडियो संदेश कहलाता है। यह दोनों ही, यानी की वीडियो और ऑडियो संदेश टी.वी. एंटीना से टकराते हैं, तो टी.वी. सेट इन संदेशों को मूल चित्र और ध्वनि में बदलकर प्रदर्शित करता है। इस प्रकार किसी भी स्थान या घटना विशेष का दृश्य ध्वनि सहित अपने घर में लगे टी.वी. सैट तक पहुंचता है।

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