रडार का आविष्कार किसने किया था-Radar ka aviskar kisne kiya tha

रडार का आविष्कार किसने किया था

रडार का आविष्कार किसने किया था

रडार अर्थात रेडियो डिटेक्शन एंड रेंज एक ऐसी मशीन होती है जिसमें रेडियो तरंगों की मदद से दूर की वस्तुओं की स्थिति का पता लगाया जाता है। चाहे कोहरा हो अथवा धुंध, वर्षा, हिमपात धुआं हो या अंधेरा, रडार को अपना काम करने में कोई परेशानी नहीं होती। उसे वस्तुस्थिति के बारे में स्पष्ट पता लग जाता 

1886 में रेडियो तरंगों के आविष्कारकर्ता हाइनरिख हेटर्स ने कहा कि यदि तरंगें ठोस वस्तुओं से टकराएं तो उनकी स्थिति में बदलाव आ जाता है। 1925 में इन बदलावों से दूरी का पता लगाया गया और 1930 तक तो रडार का सही ढंग से इस्तेमाल किया जाने लगा। लेकिन इसका आम प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ही हो सका। 

रडार से रेडियो तरंगें भेजी जाती हैं और जब ये तरंगें किसी चीज से टकरा कर वापस लौटती हैं तो उनके वापस आने तक के समय को मापा जाता है। रेडियो तरंगें 186000 मील प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती हैं, 

रडार का आविष्कार किसने किया था

समय का पता लगते ही उस चीज की दूरी फौरन मालूम कर ली जाती है। रडार में लगे एंटीना से उस वस्तु की सही स्थिति का भी पता लग जाता है। 

रडार में एक ट्रांसमीटर होता है जो रेडियो तरंगें भेजता है और एक रिसीवर होता है जो वापसी पर उन्हें ग्रहण करता है। तरंगों के आने-जाने का समय व उसके आधार पर दूरी का पता अपने आप मशीनों की मदद से लग जाता है। 

दिशा का सही पता लगाने के लिए रडार के एंटीना को लगातार इधर-उधर घुमाया जाता है। जैसे ही एंटीना किसी चीज के ठीक सामने होता है, वस्तुस्थिति स्पष्ट हो जाती है। 

रडार की वजह से अब युद्ध में सहसा आक्रमण कर देना आसान नहीं रह गया है। इसके द्वारा रॉकेटों, जहाजों, वायुयानों के आने की पहले से सूचना मिल जाती है। इसी प्रकार बमवर्षक के चालक को भी धुएं या कुहासे के समय बम गिराने के सही स्थान का रडार का सहायता से पता लग जाता है। शांति के समय रडार का इस्तेमाल जहाज, वायुयान आदि को ठीक से चलाने के लिए किया जाता है। इससे पहाड़ों व अन्य किसी रुकावट का पता चल जाता है। ऋतु विशेषज्ञों के लिए भी यह यंत्र बहुत उपयोगी हैं|

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