Hindi story-सच्चे गुरु की परख 

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सच्चे गुरु की परख 

बौद्ध भिक्षु बोधि धर्म अपने कुछ शिष्यों के साथ भ्रमण करते हुए एक गांव में पहुंचे। लोग उनका बहुत आदर करते थे। बोधि धर्म व उनके शिष्यों का ग्रामीणों ने हार्दिक सत्कार किया और फिर उनके पवित्र वचन सुनने के लिए उनके आसपास एकत्रित हो गए। बोधि धर्म लोगों को धर्म और आचरण की बातें सरल भाषा में समझाने लगे। लोग भावविभोर होकर उनको सुन रहे थे।

तभी वहां एक व्यक्ति आया और अचानक खड़ा होकर बोधि धर्म को अपशब्द कहने लगा। उपस्थित जनसमूह ने उसे रोकने का बहुत प्रयास किया, पर वह नहीं माना और लगातार बोधि धर्म को बुरा-भला कहता रहा। 

लोगों ने कहा, ‘महाराज! यह व्यक्ति कितना उदंड है, निरर्थक ही आपको भला-बुरा कह रहा है। बोधि धर्म उस व्यक्ति के इस आचरण पर जरा भी क्रोधित नहीं हुए और लोगों से बोले, ‘यह भविष्य में मेरा सबसे बड़ा भक्त बनने वाला है। 

लोगों ने पूछा, ‘कैसे?’ बोधि धर्म ने उत्तर दिया, ‘कोई कुम्हार के यहां घड़ा लेने जाता हैं तो घड़े को बजाकर देखता है कि वह फूटा हुआ तो नहीं है। जब एक-दो – रुपए के घड़े की कोई इतनी परख कर सकता है तो भला जिसे गुरु मानना है उसे दस-बीस गालियां दिये बिना कैसे पहचानेगा?

पहले वह परीक्षा लेगा कि गुरु में आक्रोश व धैर्य का भाव कितना है। यह जानने के बाद ही तो वह गुरु को अपनाएगा, इसलिए यह व्यक्ति मुझे निरर्थक ही अपशब्द नहीं कह रहा है।

गुरु की गुरुता तभी स्वीकारी जाती है, जबकि उसमें सदाचरण के सभी लक्षण मौजूद हों।’ बोधि धर्म को अपशब्द कहने वाला व्यक्ति वास्तव में आगे चलकर उनका सबसे बड़ा भक्त बना। 

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