Positive Attitude quotes in hindi-हर समस्या के पीछे उसका समाधान भी छिपा होता है

Positive Attitude quotes in hindi

Positive Attitude quotes in hindi- हर समस्या के पीछे उसका समाधान भी छिपा होता है (Every Problem Comprises its Solution Also) 

1.व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला ऐसा कोई कार्य नहीं हो सकता, जो कि समस्या प्रधान न हो. व्यक्ति द्वारा सृजित ऐसी कोई समस्या नहीं हो सकती, जिसका कि कोई समाधन न हो. समस्या को जरा पलट कर तो देखो, समाधान छिपा मिलेगा, अर्थात् समस्या और समाधान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.

Positive Attitude quotes in hindi

2. याद रखें, बिना कारण कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती, बिना समस्याओं के कोई सफलता भी सुनिश्चित नहीं होती. कोई भी सफलता ढेर सारी समस्याओं का मुकाबला किए बगैर प्राप्त नहीं हो सकती. अर्थात् जहाँ कार्य है, वहाँ समस्या है. जहाँ समस्या है, वहाँ समाधान है. जहाँ समाधान है, वही सफलता है. जहाँ सफलता है, वहाँ समस्या है. जो इस चक्रव्यूह से परिचित हो जाता है, वही सफल हो पाता है.

3. हर संभावित समस्या अक्सर हमारे अवचेतन में घटित होती रहती है. यदि हम सतर्क रहें तो आने वाली समस्याओं की इसी स्तर पर रोकथाम कर सकते हैं. अधिकांश समस्यायें तो हमारे विचारों के कारण ही उत्पन्न होती हैं. क्योंकि अपने बारे में जैसा हम सोचते हैं, वैसे हम होते नहीं हैं. जैसे होते हैं, वैसा हम कभी सोचते नहीं. हमारी असली समस्या यही है और यहीं से तमाम समस्यायें पैदा होती हैं. इसलिए जरूरी है, हम सबसे पहले अपने आपको ठीक से पहचान लें, फिर हमारे लिए कोई समस्या ही नहीं रहेगी..

4. यदि हम अनुग्रह से भरे हैं, तो हमारे सामने कोई समस्या ही नहीं है. यदि हम जहर से भरे हैं, तो फिर हमारी समस्याओं का कोई अन्त ही नहीं है. यदि हम घण्टों, दिनों और वर्षों की बजाय केवल मिनिटों को ध्यान में रखते हैं, केवल वर्तमान पर ध्यान केन्द्रित कर लेते हैं, तो फिर हमारे लिए कोई समस्या नहीं है.

5. जैसा आदमी सोचता है, वैसा अमूमन हो ही जाता है. कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है, जैसा कभी सोचा ही नहीं जाता. बिना सोचा हुआ हो जाना ही असली समस्या है, किन्तु यदि व्यक्ति हर समस्या के लिए मानसिक रूप से तैयार रहे तो फिर कोई समस्या ही नहीं है. अक्सर कुछ समस्यायें आकार में बड़ी प्रतीत होती हैं, किन्तु जब उन्हें सुलझाने की ओर कदम बढ़ा लिये जाते हैं, तब बड़ी समस्यायें भी सरलता से सुलझती चली जाती हैं. आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहने पर हर समस्या का कोई न कोई समाधान अवश्य निकल आता है. याद रखें, समस्या अपने समाधान के साथ ही पैदा होती है. 

6.कभी यह मत सोचो कि कल कैसा था ? यह भी मत सोचो कि कल कैसा होगा ? सिर्फ यह सोचो कि ‘आज’ कैसा है ? यानी वर्तमान को बेहतर बनाओ. भूत-भविष्य तो अपने आप बेहतर बनते चले जायेंगे. देखा जाय तो जिन्दगी ही अपने आप में सबसे बड़ी समस्या है. यदि जिन्दगी का आनन्द उठाना है तो उसे सिर्फ जिन्दगी ही समझी जाय. समझ ही समस्याओं का कारण है और समझ ही समाधान है. इसलिए परिपक्व समझ एवम् सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहें, समस्याओं के समाधान अपने आप मिलते चले जायेंगे.

7. कुछ लोग आसान से आसान काम में भी समस्यायें ढूँढ लेते हैं. कुछ लोग बड़ी-बड़ी समस्याओं के भी आसान हल ढूँढ़ लेते हैं. जो किसी समस्या का हल समस्या से बाहर खोजता है, वह कभी हल खोज ही नहीं सकता. जो समस्या की गहराई में उतर कर आसान, त्वरित और स्थायी हल ढूँढ़ लेता है, वही अपने मिशन में कामयाब हो सकता है.

 

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8. ठीक ढंग से समझी गई समस्या पचास प्रतिशत तो स्वतः ही सुलझ जाती है. बिना समझे, बिना कारण जाने, सुलझाने पर समस्या सुलझने की बजाय और उलझ जाती है. याद रखें, जब भी कोई समस्या पैदा होती है, तो कभी अकेली पैदा नहीं होती. अनेक उलझनों, जबरदस्त जटिलताओं, विभिन्न विकल्पों एवम् सुलभ समाधानों के साथ पैदा होती है. समझदार व्यक्ति तो समस्या के पैदा होने से पहले ही संभावित समस्या का समुचित समाधान तैयार रखता है. जिस प्रकार कानून बनाने वाले कानून के लागू होने पर उत्पन्न होने वाली सभी संभावित समस्याओं के समाधान पहले से ही प्रतिपादित कर देते हैं, उसी प्रकार सफलता को उपलब्ध होने वाले व्यक्ति समस्या में से ही उसका समाधान भी ढूँढ लेते हैं.

9. कोई समस्या न होते हुए भी किसी समस्या की आशंका करना सबसे बड़ी समस्या है. आशंका के कारण किसी कार्य को आरम्भ ही नहीं करना अथवा बीच में ही छोड़ देना, इससे भी बड़ी समस्या है. इसलिए जानबूझ कर किसी समस्या की आशंका मत पालिए, वरना एक दिन समस्या भी आ खड़ी होगी. सच तो यही है कि अधिकांश समस्याओं का जन्म आशंकाओं के कारण ही होता है.

दृष्टान्त- एक अज्ञानी व्यक्ति सूरज की विपरीत दिशा में भागा चला जा रहा था. बड़ा चिन्तित एवम् अभागा था. मार्ग में एक सन्त मिला. सन्त ने भागने का कारण पूछा. परेशान व्यक्ति ने बताया कि वह अपनी परछाई को पकड़ना चाहता है, किन्तु परछाई पकड़ में ही नहीं आ रही है. आगे से आगे भागती चली जा रही है. सन्त ने समस्या का आसान हल सुझाया-‘तुम्हारी दिशा गलत है. तुम सूरज की तरफ मुँह करके चलना शुरू कर दो, परछाई तो खुद ही तुम्हारे पीछे-पीछे चलने लगेगी.’ अज्ञानी को अपनी समस्या के पीछे छिपा हुआ समाधान मिल चुका था. 

  positive attitude quotes in hindi-  सस्ते से राजी होना, बहुमूल्य को खोना है (Never Be Content with The Cheaper One, Otherwise You Would Be Deprived of Valuable One) 

Positive Attitude quotes in hindi

1.हम प्रायः छोटी-छोटी और तात्कालिक सुविधाओं से समझौता कर लेते हैं और सन्तुष्ट हो जाते हैं. बड़ी सुविधाओं के मार्ग में हमारी यही सन्तुष्टि सबसे बड़ी बाधक बन जाती है. यह तो उचित है कि हर सुविधा, हर अनुकूल स्थिति का भरपूर आनन्द उठाया जाय, किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि इनके आगे सोचा ही न जाए. छोटी-छोटी वस्तुओं और छोटी-छोटी खुशियों से जिन्दगी तो कट सकती है, किन्तु जिन्दगी का असली मकसद पूरा नहीं हो सकता. असली मकसद की कोई सीमा भी नहीं हो सकती, किन्तु सदैव बहुमूल्य की तरफ बढ़ते रहना ही असली मकसद है.

2. हर व्यक्ति में कुछ ऐसी विशेषतायें अवश्य होती हैं, जो दूसरों में नहीं होती. इसलिए हर व्यक्ति को अपनी इन असाधारण विशेषताओं का भरपूर सदुपयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहिए. अन्यथा वह अपनी इन विशेषताओं को खोता चला जायेगा. व्यक्ति को तो बस एक बार एक्सपोजर (Exposure) मिल जाए, वह अपने आप ही तरक्की करता चला जायेगा.

3. सपने देखना मनुष्य का स्वभाव होता है. सपनों के बिना कुछ कर गुजरना संभव भी नहीं है. जिस क्षेत्र में आप काम कर रहे हैं, उसके शीर्ष पर पहुँचने का सपना तो आप पाल ही सकते हैं. जरा सोचिए, जो अभी टॉप पर बैठा है, क्या वह टॉप पर ही पैदा हुआ था ? नहीं. उसने भी शुरूआत तो नीचे से ही की थी, फिर आपकी सूझ-बूझ और क्षमतायें उससे कहाँ कम हैं, याद रखें, सपने देखने वालों के ही सपने साकार होते हैं.

4. आप में व्यक्तिगत पहल करने की अद्भुत क्षमता और अटूट आस्था होनी चाहिए. बेजोड़ कार्य दक्षता और व्यापक दूर दृष्टि होनी चाहिए. तब ही आप सदैव बहुमूल्य की ओर बढ़ते रहेंगे. तब पीछे मुड़ कर देखने का, सस्ते से राजी होने का वक्त ही नहीं मिलेगा. याद रखें, कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है. खोकर तो देखिए, खोने का कभी मलाल नहीं रहेगा…

5. ‘संतोषी सदा सुखी’ वाली प्रवृत्ति ने हमारा सबसे अधिक नुकसान किया है. इक्कीसवीं सदी में भी हमारे देश की प्रति व्यक्ति औसत आय दुनिया की तुलना में इक्कीस गुणा कम है. यदि अन्य देशों ने भी संतोषी’ प्रवृत्ति अपनाई होती तो आज दुनिया कितनी पीछे रह जाती. खैर, अब तो हमारे यहाँ भी धारणायें धीरे-धीरे बदल रही हैं. यही कारण है कि पिछले पचास वर्षों में यहाँ जितना विकास हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ. जिस गति से विकास हो रहा है, उस गति से कभी नहीं हुआ.

6. शरीर की भी एक अलग भाषा होती है. इसलिए सामने वाले की शारीरिक भाषा पढ़िए, अपनी शारीरिक भाषा का पूरा उपयोग करिए. जिसके साथ आपको व्यवहार करना है, उसे कभी सरसरी तौर पर न लें, उसके दिल में उतर कर व्यवहार करें. यदि आप लोगों के साथ भावनात्मक व्यवहार नहीं बना पायेंगे, तो आप सस्ते में ही निपटा दिये जायेंगे. इसलिए न कभी खुद सस्ते बनिए और न दूसरों को सस्ता बनाइए.

7. आदमी स्वार्थी होने के साथ-साथ खतरनाक भी होता है. अपने छोटे-छोटे फायदों के लिए दूसरों को बड़े-बड़े नुकसान पहुंचा देता है. अपनी छोटी-छोटी खुशियों के लिए लोगों की बड़ी-बड़ी खुशियाँ छीन लेता है. इसलिए बेहतर तो यही है कि अपने से पहले दूसरों के विषय में सोचा जाय. सस्ते के लिए नहीं, बहुमूल्य के विषय में सोचा जाय. याद रखें, किसी को केवल एक बार ही बेवकूफ बनाया जा सकता है, बार-बार नहीं. जो आप दूसरों को देंगे, वही तो वापस प्राप्त करेंगे.

8. बचत करें, पर कंजूसी न करें. कंजूसी की कीमत पर बचत न करें, कंजूसी करके बचत करना संभव भी नहीं है. याद रखें, कंजूसी के घावों को भरने में बचत से कई गुना अधिक खर्च करना पड़ सकता है. कंजूसी न करने का अर्थ फिजूलखर्ची करना भी नहीं है. यदि कोई पैसे को पानी की तरह बहायेगा तो एक दिन कंजूसी करने लायक भी नहीं रह पायेगा. इसलिए न फिजूलखर्ची अच्छी है, न कंजूसी ही.

9. यह सही है कि आप महँगे होटल पर सस्ता खाना खा सकते हैं, किन्तु सस्ते होटल पर महँगा खाना नहीं खा सकते. महँगे होटल का सस्ता खाना भी आपको नुकसान नहीं पहुँचायेगा, किन्तु सस्ते होटल का महँगा खाना भी आपको नुकसान ही पहुँचायेगा. यानी सस्ते होटल का महँगा खाना आपको बहुत महँगा पड़ेगा. दवाई के खर्चों से बचने के लिए उपचार को न टालें. खाद, बीज व कीट नाशकों में बचत कर फसल को न बिगाड़ें. घटिया सामग्री एवम् अनाड़ी कारीगरों के माध्यम से कमजोर इमारत खड़ी न करें, कम खरीदें, पर शुद्ध ही खरीदें. याद रखें, महँगा रोये एक बार, सस्ता रोये बार-बार.

दृष्टान्त- एक व्यक्ति सौ मीटर परिधि वाले छोटे से घेरे में लगातार सात दिन तक साइकिल चलाता है. खाने-पीने, व नहाने जैसे आवश्यक कार्य भी वह साइकिल पर ही करता है. दिन भर चारों ओर भीड़ जमा रहती है, फिल्मी गाने बजते रहते हैं. सब लोग उसकी कला व हिम्मत की तारीफ करते हैं. परन्तु यहाँ एक प्रश्न उठता है कि सात दिन में साइकिल चालक पहुँचा कहाँ? वह तो उस छोटे से घेरे में ही चलता रहा, पहुँचा कहीं भी नहीं. तो ऐसी सस्ती लोकप्रियता का क्या अर्थ है ? जीवन के अमूल्य सात दिन और अपनी अमूल्य शक्ति को छोटे-छोटे परिलाभों के लिए यूं बर्बाद करने का क्या औचित्य है ? अर्थात् सस्ते से कभी राजी मत होइए. 

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