पेट के रोग से बचाव-Pet Ke Rog se bachav

Pet Ke Rog se bachav

पेट के रोग से बचाव-Pet Ke Rog se bachav

आयुर्वेद में कहा गया है कि अच्छा स्वास्थ रहने के लिए हमारे शरीर का पाचन तंत्र मजबूत होना चाहिए। हमें शरीर का पाचन तंत्र इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि हम कितना पौष्टिक आहार ले रहे हैं कल किस बात पर निर्भर करता है कि हम हम कितना भोजन पचा पा रहे हैं। रिसर्च से अभी पता चला है अधिकतर बीमारी का जड़ पेट से ही संबंधित होता है। जो भोजन हमारा शरीर नहीं पचा पाता है वह भोजन अधिकतर हमें फायदा के बदला नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए कहा गया है पेट खुश मन खुश।

पेट के रोग पर आधुनिक जीवन शैली पर प्रभाव

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आज की तेज रफ्तार की जीवन शैली में अपने जीवन को आगे बढ़ाने के लिए लोग अपने स्वास्थ्य को दाव लगा देते हैं। इसका सबसे बुरा प्रभाव हमारे युवा अवस्था में ही दिखने लगता है। आधुनिक जिंदगी में काम के लंबे घंटो के कारण आज के लोग रेडी टू कुक फूड अर्थात जंक फूड का सेवन बहुत ज्यादा करते हैं। जंग फुट में कैलोरी की मात्रा तो बहुत अधिक होती है लेकिन पोषण के नाम इसमें कुछ नहीं होता बस दिखावा होता हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि हमारा शरीर इसे पचाने में भी बहुत समय लेता है।

जंक फूड में मिनरल के भी मात्रा काफी कम होती है। आधुनिक जीवन शैली में अधिकतर लोगों को अपने ऑफिस में या जॉब में  घंटों बैठकर काम करना पड़ता है जिसके कारण उनकी शारीरिक सक्रियता में कमी हो जाती है। जो मारे पाचन तंत्र के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। इसलिए हमें चाहिए कि काम के बीच हर  1 से 2 घंटे के बीच 15 मिनट शरीर को शारीरिक शारीरिक मेहनत जैसे खड़े होकर कोई काम टहलना आदि करना चाहिए। एक जगह बहुत लंबे नहीं बैठना चाहिए। यदि हम ऑफिस में ही काम कर रहे हैं तो कोशिश करें कि कुछ घंटे हम खड़े होकर ही काम करें।

आजकल के लोग अपने खानपान की आदतें बहुत बिगाड़ चुके हैं अधिकतर लोग भोजन को बहुत जल्दी जल्दी खा जाते हैं जैसे मैं जंक फूड का भोजन।उन लोगों को चाहिए कि भोजन को चबा चबा कर ताकि भोजन के पाचन की पहली प्रक्रिया मुख में ही सही ढंग से हो जाए। आजकल भागती जीवन शैली पाचन तंत्र की बीमारी के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। लोगों को तनाव नींद की कमी के कारण भी पाचन तंत्र में समस्या देखा गया है।

पेट के रोग के लिए पाचन तंत्र है आधार

हम अपने शरीर में जो भोजन ग्रहण करते हैं हमारा शरीर उसी रूप में उसका उपयोग नहीं करता पाचन वह प्रक्रिया है जिसके सहारे हमारा शरीर हमारे भोजन और पेय पदार्थ को छोटे-छोटे रूप में में विभाजित कर देता है ताकि उसका उपयोग हमारे शरीर में कोशिका के निर्माण, विटामिन, मिनरल, खनिज, कार्बोहाइड्रेट तथा पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा हमारे शरीर में पहुंचा सके। जब हमारा पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता है तो खाने की पाचन प्रक्रिया उस ढंग से नहीं होता है कि जिससे हमारे शरीर में संपूर्ण पोषण मिले। कमजोर पाचन तक हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम की शक्ति कमजोर कर देता है और शरीर में विषैले पदार्थ की मात्रा बढ़ा देता है जिसके कारण ऐसे लोग बार-बार बीमार पड़ते हैं।

पेट के रोग में पाचन तंत्र से संबंधित बीमारियां

गैस्ट्रो ईसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (जीआरडी)

हमारे शरीर की पेट के अंदरूनी पर्त हमारा भोजन पचाने के लिए कोई पाचक उत्पाद बनाती है जिसमें से एक है स्टमक एसिड। कई लोगों मैं देखा गया है उनके शरीर के अंदर लोअर इसोफैगियल स्फिंक्टर (एलइएस)ठीक से बंद नहीं रहता अक्सर खुला रहता है। जिसके कारण हमारे शरीर म बने हुए पेट का एसिड वापस इसोफैगस मैं चला जाता है। इसके कारण छाती में तेज दर्द और जलन होती है इसे ही जीआरडी या एसिड रिफ्लक्स कहते हैं।

जिसे आम बोलचाल की भाषा में हम इसे एसिडिटी कहते हैं। हॉट बंद होना है जीआरडी का सबसे समान लक्षण है जिसमें हमारे शरीर के छाती के हड्डियों के पीछे जलन होती है और हमारे गले तक ऊपर उठती है। कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे हमारा भोजन वापस ऊपर की तरफ आ रहा है जिसके कारण मुंह का स्वाद कड़वा हो जाता है कई बार तो देखा गया है खाना खाने के बाद यह समस्या बढ़ जाती है। कई लोगों के शरीर में यह भी देखा गया है कि उनको समान मात्रा से  अधिक एसिड उत्पन्न होता है जिसे मेडिकल साइंस में zollinger-ellison सिंड्रोम कहते हैं।

कारण

शारीरिक मेहनत कम करना,समान्य से अधिक वजन होना और टाइम टेबल से भोजना न खाना

पेट पर दबाव पड़ने के कारण भी, यह दबाव हमारे शरीर पर सामान्यता मोटापा, गर्भावस्था और टाइट कपड़े पहनने के कारण

मसालेदार भोजन का अधिक मात्रा में सेवन करना जैसे सब्जी का अधिक मात्रा में जूस, खट्टे फल, लहसुन और टमाटर आदि का अधिक मात्रा में सेवन करना 

तनाव और अधिक मात्रा में धूम्रपान करने के कारण

हमारे शरीर में उपस्थित हर्निया, स्केलेरोडर्मा मेएसिडिटी का कारण बन जाता है

कुछ दवाइयां जैसे पेन किलर, नींद की गोलियां और एसर्पिन।

कैसे बचे

प्रतिदिन सुबह में उठकर हल्का गर्म अर्थात  कुनकुना पानी पिए

हर 3 से 4 घंटे के बीच हल्का भोजन करें। पेट को खाली ना रहने दे

टाइट कपड़े पहनने से बचें

खाना खाने के बाद ना तुरंत सोना चाहिए और ना छुपकर कोई काम करना चाहिए। सोने से दो-तीन घंटा पहले ही खाना खा ले

क्या खाएं

लौकी, गाजर, कद्दू, गोभी, फलिया जैसे सब्जी का सेवन करें। अपने भोजन में तरबूज  और केला को शामिल करें। नींबू गुड केला बदाम और तरबूज का रस एसिडिटी तुरंत भगाने में मदद करता है

क्या न खाएं

अधिक मसालेदार भोजन चॉकलेट, पुदीना, अचार, खट्टे फल,खट्टी चटनी, टमाटर, सिरके और चॉकलेट आदि ना खाएं।

चाय, कॉफी, अल्कोहल रहित पेय पदार्थ, कार्बोनेट ड्रिंक जैसे स्प्राइट, पेप्सी आदि का सेवन ना करें।

मिर्च,टमाटर, जूस और खट्टे फल का सेवन ना करें।

पेट में रोग गैस के कारण

जिन लोगों का पाचन शक्ति  अधिकतर खराब होता होता है उन लोगों को कब्ज की शिकायत ज्यादा रहती है। इसी कारण से गैस की भी शिकायत होने लगती हैआधुनिक जीवन शैली जिसमें शारीरिक सक्रियता काफी कमी हो गई है, लोगों के खानपान की आदतें बिगड़ गई है जंग फूड का सेवन बढ़ गया है।

यही वजह है कि अधिकतर लोगों में गैस की समस्या उत्पन्न हो जाती है हमारे शरीर में उम्र बढ़ने के कारण एंजाइम की भी मात्रा की कमी हो जाती है जिसके कारण गैस की समस्या बढ़ने लगती है यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक गैस की बीमारी है तो यह समस्या अल्सर में बदल जाती है।

पेट में गैस के कारण

कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन अधिक मात्रा में गैस बनाती है  वसा और प्रोटीन युक्त भोजन की तुलना मे।

जितने लंबे समय तक भोजन हमारी बड़ी आंत में रहेगी जिसके कारण अधिक मात्रा में गैस बनेगी। भोजन को बड़ी याद में ज्यादा देर आने का सबसे बड़ा कारण है पाचन प्रक्रिया धीमा होना।

मानसिक तनाव भी पेट की गैस से कभी-कभी संबंधित होता है

पेट की गैस से कैसे बचे।

नियमित रूप से सुबह-सुबह एक्सरसाइज, योगा और शारीरिक रूप से सक्रिय रहे।

जितना हो सके खाना धीरे-धीरे और चबाकर खाएं।

पेट में गैस बनने के समय पेट को खाली ना रहने दें हर 2 से 3 घंटे के अंतराल में मिनी भोजन ले।

पेट में गैस बनने पर क्या खाएं

सब्जियां मौसमी फल

कम मसालेदार भोजन

जिस भोजन में फाइबर की मात्रा अधिक हो उसका सेवन करें

संतुलित पोषण युक्त आहार ले जिससे शरीर में विटामिन मिनरल आदि बना रहे

कार्बोहाइड्रेट भोजन कम करें

जंक फूड का सेवन कुछ दिन के लिए छोड़ दें।

पेट में गैस बनने पर क्या ना खाएं

जिस पेय पदार्थ में कार्बोहाइड्रेट युक्त हो उनका सेवन ना करें

अल्कोहल रहित पदार्थ, शराब आदि का सेवन ना करें

तना भुना और अधिक मसालेदार युक्त भोजन ना करें

स्ट्रीट फूड और जंक फूड से बचें

चाय कॉफी और कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन ना करें

पेट की गैस का घरेलू उपचार

अगर लंबे समय से गैस की समस्या से पीड़ित है तो आदि के कुछ छोटे टुकड़े और लहसुन के दो कलियां खाली पेट सुबह में सेवन करें ध्यान रहे कि आपको एसिडिटी की समस्या ना हो एसिडिटी होने पर इनका सेवन ना करें।

कच्चे टमाटर को सेंधा नमक के साथ खाएं

एक गिलास पानी में इलायची पाउडर को उबालें। खाना खाने के थोड़ी देर पहले हल्के गुनगुने रहने पर पी लें। इससे गैस कब बनेगी।

पेट के रोग का कारण कब्ज

बड़ी आंत से शरीर के बाहर माल निकलने में कठिनाई होती हो तो इसी समस्या को कब्ज कहते हैं। यदि समस्या घातक हो जाए तो आपकी बड़ी आंत को अवरुद्ध कर आपके शरीर में गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। कब्ज होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे हार्मोन संबंधी गडबडिया, कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट, खानपान की गलत आदतें।

इसलिए इसके प्राथमिक उपचार के लिए सबसे जरूरी है सबसे पहले हमें ना कारणों का पता होना चाहिए जिसके कारण कब्ज होता है। यदि कब हमारे शरीर में 3 महीने से अधिक रहती है तो इसे मेडिकल साइंस में इरिटेबल बाउन सिंड्रोम (आईबीएस) कहते हैं।

कब्ज का कारण

अधिक दिन डाइटिंग करने के कारण

शरीर से मल त्याग के समय मल त्यागने की प्रक्रिया पर  ध्यान ना रखना।

शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाना

रक्त में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाना या थायराइड हार्मोन की अधिक क्या कमी

शरीर में कोलन की मांसपेशियां का कमजोर होना,कई कैंसर,स्क्लेरोडर्मा और डायबिटीज कब्ज की समस्या बढ़ा देती हैं।

कब्ज से कैसे बचे

प्रतिदिन सुबह उठकर एक नींबू पीए इससे लीवर स्वस्थ रहता है 

खानपान के समय में सुधार करें निश्चित टाइम टेबल पर भोजन ग्रहण करें।

तनाव भी कब्ज का एक प्रमुख कारण है इसलिए तनाव से दूर रहने की कोशिश करना चाहिए

भुजंगासन, सर्वागसन जैसे योगासन करें इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है।

 

  कब्ज  से बचने के लिए क्या खाएं

फाइबर युक्त भोजन करें और ज्यादा पानी पिय।

अधिक मात्रा में ऐसी पैदा करने वाले भोजन से दूर रहे जैसे मसालेदार भोजन, अल्कोहल कैफ़ीन टोमेटो सॉस, कार्बोनेटेड बेवरेज आदि से दूर रहें।

लहसुन और अकेला भी पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है

दही का सेवन करें

अंगूर, नाशपाती ,अमरूद,केला पपीता जैसे फलों का सेवन करे

कब्ज मे क्या खाएं

किसमिस के 20 दाने एक गिलास पानी में लेकर रात भर फुलाए। फिर सुबह खाली पेट किशमिश चबा चबा कर खाएं और किसमिस का पानी पी जा

एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच इसबगोल सोने से पहले खोल कर पी ले

हल्के गर्म अर्थात गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर दो से तीन टाइम पिए

पेट का रोग अपच

अपच को मेडिकल साइंस में डिस्पेप्सिया भी कहते हैं। आप आज कोई खास बीमारी नहीं है जो शरीर में कुछ लक्षण उत्पन्न होता है जो आप अनुभव करते हैं। जैसे पेट दर्द खाना शुरू करने से पहले पेट भरा हुआ मालूम पड़ना आदि। आप आज के लक्षण यदि आपके शरीर में बहुत दिनों तक बन रहे हैं तो आप डॉक्टर से संपर्क करें आपकी पेट की बीमारी से संबंधित हो सकती है

फिर भी अगर अपच की समस्या गंभीर नहीं है तो इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है अगर यह समस्या 2 सप्ताह से अधिक बने रहे पेट  में दर्द रुक रुक कर या कुछ दिन बीच करके आते रहे  या पेट में तेज दर्द हो तो  आपको डॉक्टर के पास तुरंत जाना चाहिए

अपच के कुछ लक्षण

शरीर में वजन तेजी से कम होना

भूख की कमी हो जाना

हमारे मल का कलर चेंज हो जाना जैसे काला और कोलतार की तरह

शरीर में निकलने की समस्या उत्पन्न होना। और यह समस्या बधते जाना

थकान या कमजोरी महसूस होना जो एनीमिया के लक्षण भी हो सकते हैं

अपच का कारण

बहुत गर्म और तेजी से खाना खाना

अधिक मात्रा में मसालेदार और तैलीय भोजन करना

कैफीन, अल्कोहल, चाय, और कार्बोहाइड्रेट ड्रिंक अधिक मात्रा में लेना

धूम्रपान करना

कुछ दवा जैसे पेन किलर एंटीबायोटिक और आईरन सप्लीमेंट का सेवन अधिक करना।

अपच की बीमारी से दूर रहने के लिए क्या करें

अगर समस्या नॉर्मल हो जीवन शैली में बदलाव करके ठीक किया जा सकता है आज समस्या गंभीर हो तो डॉक्टर का इलाज साथ में जीवन शैली का भी बदलाव करें

भारी भोजन करने से बचें दिन में  कुछ घंटे के अंतराल पर भोजन हल्का-हल्का करें। अर्थात आधा पेट ही खाएं।

प्रतिदिन सुबह-सुबह नियमित रूप से एक्सरसाइज करें

भोजन को धीरे-धीरे अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए

अपने शरीर का औसत वजन मेंटेन करके रखें अर्थात ना ज्यादा मोटा होए और ना ज्यादा पतला रहें।

शराब और धूम्रपान की सेवन से बचें

कॉफी चाय मसालेदार और तैलीय पदार्थ के सेवन से बचें।

पेट  का रोग -पेट फूलना

पेट में गैस बनने के कारण, बड़ी आंत का कैंसर होने के कारण या हर्निया होने से भी पेट फूलने लगता है, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट या वसायुक्त भोजन करने से पेट देर तक खाली रहता है इसके कारण भी पेट फुल सकता है। किसी भी अंग को बढ़ने के कारण शरीर में बेचैनी से महसूस होती है।

अधिकतर बार देखा गया है कि गर्मी के कारण और मनुष्य को शारीरिक सक्रियता में कमी होने के कारण पेट में तरल पदार्थ रुक जाता है जिसके कारण भी पेट फूलने लगता है।

कुछ महिलाओं में पीरियड के दौरान,हार्मोन का स्तर में परिवर्तन होने के महिलाओं के पेट फूलने लगते हैं।

अधिक मात्रा में नमक दवाइयों का सेवन करने से भी शरीर पेट में तरल पदार्थों को रोक कर रखती है के कारण भी पेट फुल सकता है।

पेट फूलने से कैसे बचाएं

संतुलित भोजन ले ऐसा भोजन करें जिसमें चीनी की मात्रा कम हो

शरीर में पानी की मात्रा कमी ना हो इसलिए ढेर सारा पानी पिए

जितना हो सके नमक की सेवन की मात्रा कम करें

खाना खाने के तुरंत बाद हमें सोना नहीं चाहिए। खाने के बाद थोड़ी देर टहले। इससे भी पाचन ठीक हो जाता है और पेट नहीं फुलता है।

अपने प्रतिदिन के भोजन में फल और हरी हरी सब्जियों का सेवन की मात्रा बढ़ा दें

पेट का रोग – पेप्टिक अल्सर

हमारे पेट में एक म्यूकस नामक चिकनी परत होती है। जो हमारे शरीर के अंदर बन रहे शक्तिशाली एसिड जैसे हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पेप्सीन से बचाता है। यह सीट हमारे शरीर के ऊतकों के लिए अच्छे नहीं होते हैं, लेकिन लेकिन यह एसिड हमारे शरीर में पाचन प्रक्रिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

शरीर में म्यूकस परतो और एसिड के बीच एक समान समन्य होती है। जब इस प्रक्रिया का संतुलन हमारे शरीर में बिगड़ जाता है तब मानव को अल्सर विकसित होने लगता है। पेप्टिक अल्सर स्टमक, इसोफेगस और छोटी आंत के ऊपरी ऊपरी भाग के आंतरिक झिल्ली मे विकसित होने वाले घाव या छाले होते हैं।

पेप्टिक अल्सर के लक्षण

इसका सबसे प्रमुख लक्षण है कि हमारे पेट में दर्द उखाड़ जाता है, यह दर्द बहुत तेज हो जाता है जब पेट खाली रहता है।

 रात में सोने के समय ऐसा लगता है जैसे कि पेट में आग लग रही हो।

पेप्टिक अल्सर के गंभीर लक्षण

पेप्टिक अल्सर के गंभीर लक्षण बहुत ही कम केस में पाए जाते हैं

हमारे शरीर में खून की उल्टी होने लगती है

उल्टी आना जी मिचलाना

भूख में कभी कमी कभी ज्यादा अर्थात भूख में परिवर्तन होना

शरीर में होने वाले मल का रंग गहरा हो जाना

शरीर के वजन में  कमी होना

रिस्क फैक्टर

शरीर में तनाव अधिक होना

अनुवांशिक कारण से भी

पेट में अत्यधिक मात्रा में एसिड का स्त्राव होना।

हेलीकोबेक्टर बैक्टीरिया का संक्रमण होना।

मसालेदार और तैलीय भोजन का अधिक मात्रा में सेवन करना

अधिक मात्रा में तंबाकू, कैफ़ीन और शराब का सेवन करना

ज्यादा मात्रा में एस्प्रिन और ज्वलनरोधक दवा को कम करने वाली दवा, पैन किलर का अधिक मात्रा में इस्तेमाल करना।

शरीर में डायबिटीज होने के कारण भी

पेप्टिक अल्सर से कैसे बचे

कॉफी चाय और कार्बोहाइड्रेट ड्रिंक का सेवन कम करें

मसालेदार, तैलीय और अम्लीय भोजन की मात्रा कम करें

फास्ट फूड के सेवन से बचें

अधिक मात्रा में लाल मास की सेवन करने से बचे,

मेदे से भी बने चीजों की सेवन की मात्रा कम

अल्सर के घाव को भरने के लिए एक चम्मच शहद सुबह और रात में सोने से पहले एक चम्मच शहद का सेवन करें

हो सके तो शहद का उपयोग तब तक करते रहे जब तक कि अल्सर ठीक ना हो जाए।

रोजाना लहसुन की एक दो कलियां खाए, लहसुन में एंटीअल्सर का गुण पाया जाता है।

दोपहर के भोजन में दही का सेवन भी करें क्योंकि दही में अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो असर पैदा करने वाले बैक्टीरिया के विकास को धीमा कर देता है और घाव को भरने में सहायता प्रदान करता है

शरीर में बैक्टीरिया के संतुलन क्या स्थिति ना बिगड़ने दे।

मानव शरीर के पाचन तंत्र में 500 से अधिक बैक्टीरिया होते हैं इस बैक्टीरिया का काम भोजन को पहचाना और आहार नाल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत बनाती है।

इसलिए हमारे शरीर में बैक्टीरिया का संतुलन होना जरूरी है यदि बैक्टीरिया का संतुलन गड़बड़ा जाए तो शरीर में बुरे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है।

शरीर में बैक्टीरिया के संतुलन बिगड़ने का कारण

अस्वस्थ जीवन शैली होने के कारण

संतुलित भोजन ना करने के कारण

शरीर में उम्र का बढ़ना भी

बहुत दिनों तक बीमार पड़ने के कारण

एंटीबायोटिक दवा का अधिक मात्रा में उपयोग करना

नींद की मात्रा में कमी करना

शरीर में तनाव होना

तथ्य और आंकड़े

एक अनुमान के अनुसार  महानगरों के लोग आरामदायक जीवन बिताने के कारण करीब 30% लोग का पेट साफ नहीं रहता।

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में कब्ज की समस्या ज्यादा देखी गई है

हाल ही के अध्ययन में देखा गया कि जो लोग एसिडिटी से बचने के लिए ज्यादा मात्रा में दवा का सेवन करते हैं उन लोगों में ही हिप फ्रैक्चर आसाम का 30% बढ़ जाती है

भारत में करीब 32% लोगों को एसिडिटी का शिकार है

वसा युक्त भोजन को पचाने में करीब 6 घंटा लगता है और कार्बोहाइड्रेट को पचाने में लगभग 2 घंटे ही लगता है

जीआरडी के लगभग 10% थी मामले गंभीर देखा गया है बाकी 90% जीवन शैली में बदलाव करके ठीक किया जा सकता है।

युवा लोगों की अपेक्षा उम्रदराज लोगों में कब्ज की समस्या अधिक देखी गई है।

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