पहला एटम बम कैसे बना-Pehla atom bomb kaise Bana

पहला एटम बम कैसे बना

पहला एटम बम कैसे बना

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के ‘हिरोशिमा’ और ‘नागासाकी’ पर फेंके गए ‘एटम-बमों’ की विध्वंसकारी विनाश लीला याद करने पर आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इसके साथ ही यह जिज्ञासा भी सहज रूप से उठती है कि विश्व का पहला एटम-बम कैसे बना होगा? विश्व का पहला एटम-बम एक ‘गुप्त-परियोजना’ के तहत बनाया गया था, जिसमें हजारों श्रमिक कार्यरत थे तथा इसके निर्माण में कई वर्ष लगे। इस कार्य के लिए तीन नए नगर एवं अनेक वर्गमील के क्षेत्र में फैक्ट्रियों का निर्माण किया गया। इसके बावजूद अधिकांश श्रमिकों को यह नहीं मालूम था कि वे क्या बना रहे हैं? 

इस परियोजना को ‘मेनहाटन प्रोजेक्ट’ नाम दिया गया, जिसने अब तक के सर्वाधिक विनाशक हथियार का निर्माण किया। इस परियोजना का संचालन मेजर जनरल लिस्ली एल. ग्रोव्ज द्वारा किया गया, जिसकी तत्कालीन लागत दो बिलियन डॉलर थी। परियोजना का स्थान था रेगिस्तान के मध्य में न्यू मेक्सिको में स्थित नव निर्मित नगर ‘लॉस अलामॉस’। 

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इस शहर की आबादी 70,000 तक पहुंच गई थी। यहां कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के डॉ. रॉबर्ट ओपनहीमर के अधीन अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने इस विध्वंसक बम निर्माण के लिए आधारभूत शोध कार्य किया, इसका डिजाइन तैयार किया और इस बम का निर्माण किया। टेनेसी की ‘ओकरिज’ और वाशिंगटन की ‘हेनफोर्ड’ स्थित दो विशाल फैक्ट्रियों में बम के लिए आवश्यक सामग्री का उत्पादन किया गया। इस सामग्री की सही प्रकृति तो ज्ञात नहीं हो सकी, लेकिन इतनी जानकारी जरूर हासिल हुई कि बम निर्माण के लिए ‘यूरेनियम’ का उपयोग किया गया था। 

पहला एटम बम कैसे बना

विश्वयुद्ध से कुछ समय पूर्व एक जर्मन वैज्ञानिक ‘ओटोहेन’ ने यह खोज की कि यूरेनियम के एक रूप यूरेनियम-235 में परमाणु विघटित होते हैं, यानी कि ये लगभग दो समान भागों में टूटते हैं। इस प्रक्रिया में एक ‘शृंखलाबद्ध-प्रतिक्रिया’ (चैन रिएक्शन) द्वारा ऊर्जा उत्सर्जित होती है। यह प्रक्रिया एक परमाणु बम के निर्माण का आधार बन सकती है। यद्यपि ‘यूरेनियम-235’ प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले यूरेनियम के एक प्रतिशत से भी कम भाग में विद्यमान होता है।

 अतः इसे अलग कर पाना एक दुरूह कार्य है। इस तरह ‘मेनहटन-प्रोजेक्ट’ में एटम बम निर्माण के अन्य कार्यों में, संभवतया एक कार्य ‘यूरेनियम-235’ को अलग करना भी रहा होगा। हालांकि, इस विशाल उद्यम की समाप्ति पर परियोजना के समस्त कार्य अमरीका को हस्तांतरित कर दिए गए।

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