भारत में परमाणु परीक्षण पर हिंदी निबंध-Parmanu parikshan essay in Hindi

भारत में परमाणु परीक्षण पर हिंदी निबंध

भारत में परमाणु परीक्षण पर हिंदी निबंध-Parmanu parikshan essay in Hindi

भारत हमेशा विश्व-शांति की कामना करता रहा है। वह युद्ध में नहीं, अपितु शांति में पूर्णतः विश्वास रखता है। लेकिन उसे यह मालूम है कि शांति बहाल रखने के लिए शक्ति की भी आवश्यकता होती है। शांति की बात करने और अशांति का दमन करने के लिए शक्ति भी अपेक्षित है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने इसी तथ्य की ओर इंगित करते हुए कहा है 

क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल है, 

उसको क्या जो दंतहीन विष रहित विनीत सरल है।

1962 में उसी चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया था, जो 1962 से पूर्व ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के नारे के सुर में सुर मिलाता था। भाई-चारे का राग अलापना चीन का बाहरी रूप था। अंदर से तो वह भारत से शत्रुता रखे था। 

भारत में शांति कार्यों के लिए परमाणु शक्ति के उपयोग का श्रेय डॉ. होमी जहांगीर भाभा को प्राप्त है। परमाणु परीक्षण की दिशा में सर्वप्रथम सन 1974 में भारत को ऐतिहासिक सफलता मिली थी। 18 मई, 1974 को इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में पश्चिमी राजस्थान के पोखरण क्षेत्र में प्रथम बार सफल आणविक परीक्षण हुआ था। इसके साथ ही देश के परमाणु युग में प्रवेश की घोषणा की गई थी। फिर पी.वी. नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्रित्व काल में परमाणु कार्यक्रम को गति प्रदान करने के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराया गया था। सन 1995-96 में परमाणु परीक्षण को स्वीकृति भी दे दी गई, लेकिन परमाणु परीक्षण से पूर्व ही इसकी खबर अमेरिका को हो गई थी। फलतः अमेरिका के दबाव के कारण भारत को अपना परमाणु परीक्षण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। इंद्र कुमार गुजराल और एच.डी. देवगौड़ा के प्रधानमंत्रित्व काल में वैज्ञानिक परमाणु परीक्षण के लिए तैयार थे, लेकिन शासन वर्ग की कमजोरी के कारण परमाणु परीक्षण नहीं हो सका। ऐसे में वैज्ञानिक मन मसोसकर रह गए। 

सन 1998 में केंद्र में भाजपा और सहयोगी दलों की सरकार बनी। यह सरकार इस पक्ष में थी कि राष्ट्र सुरक्षा को ध्यान में रखकर परमाणु परीक्षण किया जाए। उसी वर्ष राज्यसभा में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा, “परमाणु बम का जवाब परमाणु बम ही है, उससे कम कुछ नहीं है।” अत: 8 अप्रैल, 1998 को देश के दो वैज्ञानिकों जी.आर. चिदंबरम और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को पोखरण में परमाणु परीक्षण करने का आदेश दिया गया। 

11 मई, 1998 को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट पर राजस्थान स्थित पोखरण का रेगिस्तान लगातार 3 विस्फोटों से थर्रा उठा। इन विस्फोटों की क्षमता 55 किलो टन टी.एन.टी. के विस्फोट के बराबर थी। ‘ऑपरेशन शक्ति’ के नाम से संपन्न इस विस्फोट कार्यक्रम के पश्चात अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा, “भारत अब परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया है। उन्होंने दोनों वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए उनकी प्रशंसा की। 

भारत द्वारा 11 मई, 1998 को किए गए परमाणु विस्फोट की विश्व भर में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। कई देशों ने भारत पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध लगाने की धमकी दी, लेकिन भारतवासियों ने इस विस्फोट का पूर्ण समर्थन किया। ऐसी स्थिति में विदेशी धमकियों के बावजूद भारत का आत्मविश्वास बढ़ा। उसने 13 मई, 1998 को पुनः राजस्थान के पोखरण क्षेत्र में दो अन्य परमाणु विस्फोट किए और भूमिगत परमाणु परीक्षणों की श्रृंखला पूर्ण कर ली। इस प्रकार भारत ने अपने सफल विस्फोटों द्वारा देश का मस्तक ऊंचा करके इसे विश्व का छठा परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना दिया। 

भारत के इस परमाणु विस्फोट का सबसे अधिक विरोध परमाणु संपन्न देशों ने ही किया, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि कोई अन्य देश उनकी बराबरी में खड़ा हो सके। विश्व में परमाणु शक्ति संपन्न तथा अमेरिका के पिछलग्गू अन्य देशों ने भारत के इस कार्यक्रम का पुरजोर विरोध किया। 

अमेरिका तथा अन्य देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से भारतीय जनमानस विचलित नहीं हुआ। देश के नेतृत्व वर्ग ने परमाणु परीक्षण की दिशा में किए गए अपने प्रयासों को पूर्णतः उपयुक्त एवं देश की सुरक्षा के लिए परम आवश्यक घोषित किया। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष का समर्थन करते हुए अनेक राष्ट्राध्यक्षों को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने इन विस्फोटों के संबंध में अपनी आवश्यकताओं से उन्हें परिचित कराने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का परमाणु विस्फोट किसी को आतंकित करने के उद्देश्य से नहीं किया गया है, अपितु अपनी सुरक्षा का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि परमाणु परीक्षण शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया गया है। 

वर्तमान समय में भारत दो परमाणु संपन्न राष्ट्रों से घिरा हुआ है। इन दिनों दोनों देशों से भारत के संबंध मित्रतापूर्ण नहीं हैं। ऐसी स्थिति में भारत का परमाणु शक्ति रहित रहना खतरे से खाली नहीं है। अतएव भारत को परमाणु कवच के साथ रहना देश की पहली आवश्यकता है। भारत एक शांतिप्रिय देश है, लेकिन शांति की रक्षा भी शक्ति से ही संभव है। परमाणु परीक्षण से भारत का गौरव बढ़ा है और आज भारत आणविक शक्ति संपन्न राष्ट्रों की पंक्ति में बराबरी में बैठने का अधिकारी हो गया है। यह भारतीय जनता को भय मुक्त सुरक्षित वातावरण दिलाने, देश के प्रगति करने तथा विदेशों में भारत का गौरव और आत्मविश्वास बढ़ाने की दृष्टि से उचित प्रयास है। भारत रूस, अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस के बाद छठा आणविक शक्ति संपन्न राष्ट्र बन गया है।

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