परी की कहानी-राजकुमार अहमद और परी बानो

परी की कहानी

परी की कहानी-राजकुमार अहमद और परी बानो

राजकुमार अहमद अपने तीर को खोजने उसी दिशा में चल दिया, जिस ओर उसने तीर चलाया था। बहुत ढूंढने के बाद उसने तीर को एक चट्टान पर पाया। वह उसे उठाकर इधर-उधर नजर दौड़ाने लगा। 

उस चट्टान में एक खोखला रास्ता दिखाई दिया। अहमद आगे बढ़ा, तो सीढ़ियों के साथ नीचे एक रास्ता जा रहा था। वह सीढ़ियों से नीचे गया, तो लोहे का दरवाजा दिखाई दिया। उसने दरवाजा खोला और अंदर चला गया। 

जब अहमद भीतर गया, तो वहां अंधेरा था। लेकिन आगे बढ़ते जाने पर उसे रोशनी दिखाई देने लगी। वह रास्ता एक विशाल महल में खुलता था। वहां एक सुंदर लड़की अपनी दासियों के साथ बैठी थी। उसकी सुंदरता देखकर अहमद हैरान हो गया। नूर तो उसके सामने कुछ भी नहीं थी। उस महल की भव्यता और सुंदरता भी बेमिसाल थी। 

“राजकुमार अहमद! आपका स्वागत है। आइए, मैं आपको अंदर ले चलूं।” उस लड़की ने मुस्कराते हुए कहा। अहमद को यह देखकर हैरानी हुई कि वह उसका नाम कैसे जानती थी। 

अहमद को भोजन और शराब परोसने के बाद वह लड़की बोली, “मैं एक ताकतवर जिन्न की बेटी परी बानो हूं। मैंने ही आपके भाइयों और आपके लिए कालीन, हाथी-दांत की नली और सेब भेजा था। मैं ही आपका तीर यहां लाई, ताकि आप उसे खोजते हुए मुझ तक पहुंच जाएं।” 

राजकुमार अहमद परी बानो की सुंदरता और उसकी बातों से मोहित हो गया। लेकिन वह सोच रहा था कि उसने ऐसा क्यों किया?

परी बानो बोली, “मैं आपसे शादी करना चाहती हूं।” 

अहमद को भी अनुभव हुआ कि वह उसकी सुंदरता और समझदारी के प्रति मुग्ध हो गया है। नूर की शादी उसके भाई अली से हो गई थी, इसलिए उसने परी बानो से शादी के लिए हामी भर दी। 

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परी बानो ने राजकुमार अहमद को अपनी बेशुमार दौलत दिखाई। इसके बाद उनके विवाह का जश्न मनाया जाने लगा। छह महीने तक वे बहुत प्रसन्न रहे। एक दिन अहमद को अपने 

पिता सुलतान की याद आई। उसने कहा कि उन्हें उसकी चिंता हो रही होगी। परी बानो बोली, “उन्हें बता देना कि तुम ठीक हो, खुश हो। लेकिन उन्हें इस जगह के बारे में बिल्कुल मत बताना।” 

राजकुमार अहमद के साथ बीस घुड़सवार भेजे गए। उसने जल्दी आने का वादा किया था। वह अपने पिता से मिला और उन्हें बताया कि वह बहुत खुश था। उसने उनसे इजाजत लेते हुए कहा कि वह कभी-कभी मिलने आता रहेगा। लेकिन उसने अपने ठिकाने के बारे में कुछ भी बताने से मना कर दिया। 

सुलतान ने उसकी बात मान ली, लेकिन अहमद के जाने के बाद कुछ जलनखोर दरबारियों ने सुलतान से कहा कि उन्हें अहमद के ठिकाने का पता मालूम करना चाहिए। सुलतान ने एक जादूगरनी को बुलाकर कहा कि वह राजकुमार अहमद के रहने की जगह का पता लगाए।

जादूगरनी ने अपने जादू के जोर से वह जगह मालूम कर ली, जहां अहमद आखिरी बार दिखाई दिया था। अब उसे यह पता लगाना था कि अहमद कहां रह रहा था। लेकिन यह तभी संभव था, जब अहमद अपने रहने के स्थान से बाहर आता। 

जादूगरनी एक लड़की का रूप धारण करके उस जगह पहुंच गई, जहां अहमद का तीर गिरा था। वह वहीं छिपकर उसे पकड़ने का इंतजार करने लगी। तभी अहमद उसे घुड़सवारों के साथ आता दिखाई दिया। लेकिन उस खोखल के पास आते ही वह अचानक दिखना बंद हो गया। 

जादूगरनी खोखल में गई, तो उसे लोहे का दरवाजा भी नहीं दिखाई दिया, क्योंकि उसे परी बानो ने ओझल कर दिया था। दरवाजा उन्हीं लोगों को दिखता था, जिन्हें वह अपने महल में बुलाना चाहती थी। 

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जब अगली बार अहमद अपने पिता सुलतान से मिलने के लिए बाहर आया, तो जादूगरनी वहां बेहोश होकर गिरने का दिखावा करने लगी। राजकुमार अहमद उसे उठाकर परी बानो के पास महल में ले गया और उसका ध्यान रखने को कहा।

परी बानो उसे देखते ही समझ गई कि वह लड़की उसके पति का भेद जानने आई थी। लेकिन उसने अहमद से यह कहा कि वह उस मेहमान की सेवा करेगी। राजकुमार अहमद सुलतान से मिलने चला गया। 

परी बानो ने उस लड़की को दवा दी, तो वह उठकर बैठ गई। वह बोली कि अब ठीक है, इसलिए वहां से जाना चाहती है। परी बानो के नौकर उसे बाहर छोड़ आए, लेकिन वह वहां से निकलने के बावजूद लोहे का दरवाजा नहीं देख सकी। 

जादूगरनी ने जाकर सुलतान को सब कुछ बता दिया और यह भी कहा कि परी बानो उसका राज्य हड़पना चाहती है। यह सुनकर सुलतान बेचैन हो गया और सलाह लेने के लिए वजीरों को बुलवाया। 

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उन्होंने सुलतान से कहा, “राजकुमार अहमद से ऐसा तंबू लाने को कहें, जो इतना छोटा हो कि आपकी हथेली पर आ जाए, लेकिन उसमें आपकी सारी सेना समा जाए।”

जब राजकुमार अहमद अपने पिता से मिलकर जाने लगा, तो सुलतान ने उसे अपनी पत्नी से उपहार लाने को कहा। 

अहमद बोला, “मैं कोशिश करूंगा, लेकिन अगर मैं आपसे मिलने नहीं आया, तो जान लीजिएगा कि मैं कामयाब नहीं हो सका।” शीघ्र ही अहमद परी बानो के महल में पहुंच गया। उस लड़की के बारे में परी बानो से पूछने पर उसे पता चला कि वह उनके यहां जासूसी करने आई थी। 

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जब अहमद ने परी बानो को अपने पिता की मांग के बारे में बताया, तो वह हंसने लगी और वैसा तंबू दे दिया, जैसा सुलतान ने मांगा था। 

इसके बाद वजीरों ने सुलतान को सलाह दी कि शेरों के झरने का पानी मांगा जाए, जो सारे रोग मिटा देता है। जब यह बात परी बानो को पता चली, तो उसे गुस्सा आ गया। वह बोली, “यह एक दुष्ट योजना है, लेकिन मैं तुम्हारी मदद करूंगी। यह झरना ऐसे किले में है, जिसके दरवाजे पर चार शेर पहरेदारी करते हैं। तुम दो घोड़े लेकर जाना। एक घोड़े पर बैठना और दूसरे घोड़े पर एक भेड़ के चार टुकड़े रखना। वहां जाते ही गरजते शेरों के सामने वे टुकड़े डाल देना। इस महल से जाते समय धागे की एक गेंद साथ रखना, यह तुम्हें उस किले तक ले जाएगी। वहां का पानी लाने के लिए एक बोतल ले जाना।” फिर परी बानो ने अहमद को सारा सामान देकर विदा किया। उसे अपने पति की बहादुरी पर पूरा भरोसा था। 

राजकुमार अहमद ने ऐसा ही किया। शेर पालतू बनकर उसके साथ आ गए। जब वह सुलतान के पास जाने के लिए शहर से गुजरा, तो सारी प्रजा शेर देखकर डर गई। जलनखोर वजीरों ने सुलतान से एक दूसरा उपहार मांगने को कहा। वे बोले, “अहमद से कहें कि वह एक ऐसे आदमी को लाए, जो डेढ़ फुट ऊंचा हो, लेकिन उसकी दाढ़ी तीस फुट की हो और उसके कंधे पर लोहे का भारी डंडा हो। उसे बोलना भी आता हो।” 

जब अहमद ने परी बानो को इस मांग के बारे में बताया, तो उसने कहा कि उसका भाई शैबर ऐसा ही लगता है। परी बानो बोली, “मैं तुम्हें उसके पास ले चलती हूं। लेकिन यह याद रहे कि उसे बेअदबी पसंद नहीं है। अगर उसे गुस्सा आ जाए, तो मैं भी नहीं रोक सकती।” 

यह सुनकर राजकुमार अहमद ने चैन की सांस ली। लेकिन उसे लग रहा था कि ऐसा कोई जीव नहीं हो सकता। उसकी समझ में यह भी आ गया था कि उसे सुलतान के वजीरों को हमेशा के लिए चुप कराना होगा। अब वे सभी उसके दुश्मन बन गए थे। वह बार-बार उनकी बेतुकी मांगें कैसे पूरी कर सकता था। 

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अहमद ने शैबर से प्रेमपूर्वक भेंट की। फिर वे सुलतान के दरबार में गए। परी बानो ने शैबर को सुलतान की मांग के बारे में बता दिया था। 

सुलतान ने शैबर को देखकर आंखें बंद कर ली। इस पर शैबर को गुस्सा आ गया। 

उसने सुलतान के सिर पर लोहे के डंडे से ऐसा वार किया कि वह वहीं मर गए। यह देखकर वजीर शैबर की तरफ लपका। शैबर ने वजीर को भी लोहे के डंडे से मार गिराया। अब तो शैबर पर भूत सवार हो गया था। ऐसी स्थिति में उसे रोक पाना बड़ा मुश्किल हो रहा था। अहमद ने शैबर को शांत करने का काफी प्रयास किया, मगर वह नहीं माना। फिर शैबर ने जादूगरनी को वहां बुलवाया। ज्यों ही वह आई, उसने उसे भी मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद अहमद को वहां का सुलतान बना दिया गया। वहां के लोग अहमद को काफी पसंद करते थे और उसका मान-सम्मान भी करते थे। 

राजकुमार अली को भी शासन करने के लिए कुछ इलाके दे दिए गए। वह अपनी पत्नी के साथ वहां चला गया। हुसैन सूफी के साथ ही रहने लगा था। लोग उसे ‘शेख’ कहकर पुकारते थे। 

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सुलतान अहमद ने अपनी समझदारी से सारा राज्य संभाल लिया। परी बानो उसके हर काम में मदद करती रही। 

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