Panchtantra ki kahaniyan hindi mein-चोरों की दोस्ती

Panchtantra ki kahaniyan hindi mein

Panchtantra ki kahaniyan hindi mein-चोरों की दोस्ती

बहुत समय पहले की बात है, किसी शहर के बाहर एक झोंपड़ी मेंएक साधु रहता था। वह बहुत ही दयालु और नेक इंसान था। एक बार उसकामित्र उससे मिलने आया। अपने मित्र की दशा देखकर उसने दो नन्हे बछड़ेसाधु को उपहार में दे दिए। साधु को उन बछड़ों से बहुत प्यार हो गया। वहउन्हें बहुत प्यार से रखता। उन्हें नहलाता-धुलाता और चारा खिलाता। जल्द हीवे बहुत सुंदर ओर बलवान हो गए। साधु उन बछड़ोों को अपने साथ जंगलमें नदी किनारे ले जाता। वहां वे हरी-हरी घास चरते और नदी का ताजापानी पीते। कुछ ही समय में साधु ओर बछड़ों के बीच गहरी मित्रता हो गई।साधु पूजा-पाठ से समय पाते ही अपने बछड़ोों के साथ खेलने लगता। वेउसके सच्चे साथी बन गए थे।

एक दिन एक चोर ने उन बछड़ों को साधु के घर में देखा। उसने सोचाकि मौका पाते ही साधु के घर से वह उन बछड़ों को चुरा लेगा। फिर वह उन्हें बेच कर बहुत सारा धन कमाएगा। उसने अपने साथ एक मजबूत रस्सीली और बछड़ों को चुराने चल दिया।

Panchtantra ki kahaniyan hindi mein-चोरों की दोस्ती

जब वह जंगल के रास्ते जा रहा था तो उसे एक बहुत ही डरावना औरभयंकर राक्षस मिला। उसे देखकर चोर बहुत डर गया। राक्षस ने उसे अपनापरिचय दिया और फिर चोर से पूछा कि “वह कोन है।’ चोर ने भी उसे बतादिया कि वह एक चोर है और एक साधु के घर चोरी करने जा रहा है।

दोनों ने एक-दूसरे को देखा। दोनों ही आपस में एक-दूसरे से सच बोलचुके थे। इसलिए उनके बीच ईमानदारी का नाता स्थापित हो गया था। उन्हें लगा कि अब वे एक-दूसरे पर विश्वास कर सकते हैं और एक-दूसरे के सहायक भी बन सकते हें।

चोर ने राक्षस को यह भी बताया कि साधु के घर जो सुंदर बछड़े हें वह उन्हें ही चुराने जा रहा है। यह सुन कर राक्षस को भी अच्छा लगा। उसने चोर से कहा कि वह भी उसके साथ साधु के पास जाना चाहता हे। वह बोला,“तुम बछड़ों की चोरी कर लेना और मैं साधु को खा लूंगा। मुझेबहुत भूख लगी है। नर मांस खाए भी बहुत दिन हो गए हैं। उस साधु को खाने में बहुत मजा आएगा।”

नीतिकार कहते हैं कि जब दो लोगों का स्वार्थ किसी एक काम को करने से सधता हे, तो उनमें मित्रता गहरी हो जाती है। इस प्रकार वे दोनों-चोर और राक्षस एक गलत काम के लिए आपस में गहरे मित्र बन गए और तपस्वी के आश्रम की ओर चल दिए। वहां पहुंच कर वह ऐसी खिड़की खोजने लगे जिसकी मदद से वे भीतर जा सकें। वे वहां छिप कर सही समय का इंतजार करने लगे। दोनों ही अपने-अपने मकसद को पूरा करने के विचारों में मग्न थे।

कुछ ही देर बाद उन्हें खर्रायें की आवाज सुनाई देने लगी। वे जान गएकि साधु गहरी नींद में सो चुका था। सही मौका आ गया था। राक्षस साधु को खाने के लिए जाने लगा तो चोर ने उसका हाथ थाम लिया ओर बोला,“रुको! पहले मुझे बछड़ों को ले जाने दो वरना आवाज से साधु जाग जाएगा ओर में उसके बछड़े नहीं ले जा सकूंगा।”

Panchtantra ki kahaniyan

 “नहीं, नहीं, अगर तुमने बछडों को उठा लिया तो वे बां-बां करेंगे। इसतरह साधु उठ जाएगा और तब मेरे भोजन का क्‍या होगा। मैं तो भूखा ही रह जाऊंगा। पहले मुझे साधु को मारने दो,” राक्षस ने अपना तर्क दिया। यह बहस सुन कर साधु की नींद खुल गई। वह समझ गया कि उसके घर में कुछ गड़बड़ है। डर कर वह जोर-जोर से भगवान का नाम लेने लगा, जिसे सुन कर राक्षस दुम दबा कर भाग गया। इसके बाद साधु ने एक डंडा उठाया और चोर की जमकर पिटाई की तथा उसे शहर से दूर खदेड़ दिया। इस तरह “पहले मैं,’ “पहले मैं” के चक्कर में दोनों दुष्टों की एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी।

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