पंचतंत्र कथा-नीला सियार

पंचतंत्र कथा-नीला सियार

पंचतंत्र कथा-नीला सियार

बहुत समय पहले की बात है। किसी जंगल में एक सियार रहता था। वह अक्सर छोटे जानवर और पक्षियों को खा कर अपना पेट भरता था। लेकिन कई बार उसे खाने को जब कुछ न मिलता तो उसे भूखे पेट ही रात में सोना पड़ता। एक दिन भोजन की तलाश में भटकते-भटकते वह एक शहर में जा पहुंचा। 

अचानक ही कुछ कुत्तों ने उसे देख लिया और भौंकते हुए उसका पीछा करने लगे। उन्होंने उस पर धावा बोल दिया। बेचारा सियार बुरी तरह से घबरा गया और उनसे बचाव के लिए कोई जगह खोजने लगा। अचानक उसे सड़क के किनारे बने घर का दरवाजा खुला दिखाई दिया, वह भाग कर उसमें ही घुस गया। 

कुत्ते घर बाहर ही रहे। वे जानते थे कि अंदर जाने पर उनकी पिटाई हो सकती है। सियार इतना घबरा गया था कि उसने यह नहीं देखा कि बरामदे में पानी का भरा एक बहुत बड़ा टब रखा हुआ है। उसने उसमें छलांग लगा दी। 

वह घर एक ऐसे आदमी का था जो कपड़े रंगने का काम करता था। उसने टब में नीला रंग घोल रखा था। सियार जब उसमें कूदा तो वह भी नीले रंग का हो गया। 

जब सियार का इंतजार करने के बाद कुत्ते वहां से चले गए तो सियार छिपने के स्थान से बाहर आया। 

उसे पता ही नहीं चला कि वह नीले रंग में रंगा गया था। गहरा नीला रंग शरीर से इतनी आसानी से उतरने वाला नहीं था। वह अपना नीले रंग का शरीर ले कर जंगल में वापस आ गया। सारे जानवर इस अजीब से जानवर को देख कर डर के मारे छिपने लगे। वे एक-दूसरे से पूछने लगे, “यह कैसा जानवर है? क्या यह हम पर हमला करेगा?” 

पंचतंत्र कथा-नीला सियार

सियार को पहले तो कुछ समझ नहीं आया। पर जल्दी ही उसे सब समझ आ गया। यहां तक कि शेर, चीता, हाथी और तेंदुआ भी उससे डर कर दूर भाग रहे थे। वह बहुत खुश हो गया! अब तो वह जंगल का राजा था। सारे जानवर उसके आगे माथा टेकते थे। वे उसके लिए भोजन ले कर आते और उसकी सेवा करते। रंगा सियार उनका राजा बन गया था। 

पर एक दिन सियार ने जंगल में हुआं-हुआं की आवाज निकाल रहे सियारों को सुना। वे उसके झुंड के पुराने दोस्त थे। वह भूल गया कि वह तो जंगल का राजा होने का दिखावा कर रहा है। ऐसा करने से उसकी पोल खुल जाएगी। वह भी उनके ही सुर में सुर मिला कर आवाज निकालने लगा। ज्यों ही दूसरे जानवरों ने यह आवाज सुनी, उन्हें सच्चाई का पता चल गया। यह मूर्ख जानवर तो केवल एक रंगा सियार है जो हमें अपने रंग के कारण मूर्ख बना रहा है। वे बहुत गुस्से में आ गए, और उन्होंने उसी समय मूर्ख सियार का काम तमाम कर दिया।

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