Panchtantra ki kahani in hindi-बेचारा पंडित 

Panchtantra ki kahani in hindi-बेचारा पंडित 

Panchtantra ki kahani in hindi-बेचारा पंडित 

किसी गांव में एक गरीब पंडित रहता था। वह बहुत ही सरल स्वभाव का था। वह आसपास के गांवों में पूजा-पाठ करने जाता था। लोग उसे थोड़ा पैसा या खाने-पीने का सामान दे देते, इस तरह उसका गुजारा चलता। कई बार जब कुछ न मिलता, तो उस बेचारे को भूखे ही सोना पड़ता। 

एक दिन बादल छाए हुए थे, ठंड का मौसम था। उसने सोचा कि वह पड़ोस वाले गांव में जाएगा। उस गांव का रास्ता जंगल से हो कर जाता था। उस गांव में उसका मित्र रहता था। उसे लगा कि उसे वहां से कोई उपहार या खाने-पीने के लिए कुछ सामान मिल जाएगा। पंडित ने अपनी पोटली में रास्ते के लिए थोड़ा-बहुत सामान बांधा और अपने दोस्त के गांव की ओर चल दिया। उस दिन उसका मन बहुत प्रसन्न था। उसे लग रहा था कि उसका दोस्त उसका स्वागत करेगा और उसे भरपेट भोजन कराएगा। ऐसी ही बातें सोचते हुए वह अपने दोस्त के गांव जा पहुंचा। 

Panchtantra ki kahani in hindi-बेचारा पंडित 

उसके दोस्त ने उसका स्वागत किया। पंडित ने भी बहुत विधि-विधान के साथ – अपने मित्र के घर में पूजा-पाठ किया। 20 मित्र ने उसे स्वादिष्ट भोजन करवाने के बाद दक्षिणा भी दी। जब वह वापस जाने लगा तो दोस्त ने उसे उपहार में एक बकरा दिया। पंडित की खुशी का ठिकाना न रहा। अब वह अपने लिए अच्छे भोजन का प्रबंध कर सकता था। 

उसने बकरे को कंधे पर उठाया और चल दिया। धीरे-धीरे वह जंगल में जा पहुंचा। वह बहुत खुश था और अपने ही विचारों में खोया था, इसलिए वहां छिपे हुए ठगों पर उसका ध्यान नहीं गया। ठगों ने अपने शिकार को पहचान लिया था। बकरे और पंडित को देखते ही उन्हें लगा कि वे उससे बकरा छीन सकते हैं। 

उन्होंने पेड़ के पीछे छिप कर अपनी योजना बनाई और फिर अपने काम पर लग गए। उनमें से एक पेड़ के पीछे से बाहर आया और चिल्लाया, “अरे मित्र! तुम इस गंदे से कुत्ते को कंधे पर लाद कर क्यों ले जा रहे हो?” 

“कुत्ता….? नहीं महोदय, यह कुत्ता नहीं, एक बकरा है, जो मुझे मेरे दोस्त से उपहार के रूप में मिला है। मैं इसे अपने घर ले जा रहा हूं,” पंडित ने ठग से कहा। 

“अच्छा! अगर तुम्हें यह बकरा लगता है, तो ऐसा ही ठीक है,” ठग ने यह कहा और वहां से चला गया। 

कुछ ही देर बाद दूसरा ठग सामने आ गया। “सुनो! तुमने मरे हुए बछड़े को कंधे पर क्यों लाद रखा है?” उसने पूछा। पंडित वहीं ठिठक गया। “मरा हुआ बछड़ा!!! क्या तुम्हें दिखाई नहीं देता कि यह एक बकरा है और अभी 

जिंदा है?” पंडित ने खीझ कर कहा। “ठीक है, तुम्हें जो सही लगे, मैंने क्या लेना है। अलविदा दोस्त।” यह कह कर वह दूसरा ठग भी वहां से चलता बना। अब पंडित का दिमाग चकरा गया। अचानक ही तीसरा ठग सामने आ गया। पंडित ने उसे देखते ही कहा, “तुम क्या घूर रहे हो?” 

“तुम्हें ही देख रहा हूं,” ठग बोला। “लेकिन क्यों?” पंडित ने मारे चिंता के पूछा। “मैं यही सोच रहा हूं कि तुमने एक गधे को अपने कंधों पर क्यों लाद रखा है? क्या यह बीमार है?” तीसरे ठग ने सवाल किया। 

अब तो पंडित वाकई डर गया। उसका बकरा कभी किसी को कुत्ता, किसी को मरा हुआ बछड़ा तो किसी को गधा दिखाई दे रहा था। बेशक! यह कोई जादू-टोना है। अब उसे समझ आया कि उसके दोस्त ने इतनी आसानी से उसे उपहार में बकरा क्यों दे दिया। वह उस जादुई जीव से छुटकारा पाना चाहता होगा इसलिए। ऐसा सोचकर पंडित ने झटके से बकरे को धरती पर पटका और सिर पर पांव रख कर वहां से भागा। उसने मुड़ कर पीछे नहीं देखा और अपने गांव पहुंच कर ही चैन की सांस ली। 

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ठग हंसते हुए पेड़ के पीछे से सामने आए। उन्होंने बकरा उठाया और अपने घर चले गए। उस रात उनके घर बकरे की दावत हुई। जबकि पंडित के हाथ आया बकरा छीन लिया गया। 

दूसरों की बातों पर आंखें मूंद कर विश्वास करने वाला इसी तरह ठगा जाता है।

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