पंचतंत्र की कहानी कार्टून-बातूनी कछुआ 

पंचतंत्र की कहानी कार्टून-बातूनी कछुआ 

पंचतंत्र की कहानी कार्टून-बातूनी कछुआ 

बहुत समय पहले की बात है। घने वन में एक बहुत सुंदर झील थी। इसका पानी नीले रंग का था, जिसके आसपास पेड़ों का सुंदर झुरमुट था। झील में अन्य जीवों के साथ दो हंस और एक कछुआ भी रहते थे। वे तीनों आपस में पक्के दोस्त थे। वे अपना अधिकतर समय तैरने में बिताते या नदी किनारे बैठ कर झील, जंगल व जंगल में रहने वाले पशु-पक्षियों के बारे में बातें करते थे। उन तीनों में से कछुए को बोलने का बहुत शौक था। उससे बोले बिना रहा ही नहीं जाता था। वह हमेशा कुछ न कुछ बोलता ही रहता था। 

हंसों को अपने मित्र कछुए की बातें सुनने में बड़ा मजा आता था। इस तरह उन तीनों का समय बहुत अच्छी तरह बीत रहा था। लेकिन उनकी यह मौज-मस्ती बहुत देर तक नहीं टिक सकी। जल्दी ही उनके सामने ऐसी मुश्किल आ खड़ी हुई, जिसका हल निकालना बहुत जरूरी हो गया था। 

हुआ यूं कि उस साल जंगल में बारिश ही नहीं हुई। उनका प्यारा-सा घर, वह सुंदर झील, सूखने लगी। तीनों चिंतित हो उठे। 

 

पंचतंत्र की कहानी कार्टून-बातूनी कछुआ 

“हमें किसी और झील पर चले जाना चाहिए,” उनमें से एक हंस ने कहा। सभी मान गए कि ऐसे हालात में यही करना बेहतर होगा। यह सुनकर कछुआ आंसू बहाने लगा। उसने कहा, “मैं तो उड़ नहीं सकता, तो मुझे कैसा पता लगेगा कि तुम लोग कहां हो? इस तरह तो हमारी दोस्ती हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।” हंस ने कहा, “यह तो सच है, पर तुम चिंता न करो। हम कोई न कोई तरकीब निकाल ही लेंगे।” 

वे सब मिल कर कोई तरकीब सोचने लगे। अंत में एक हंस को उपाय सूझ गया। उसने कहा, “देखो हम दोनों उड़ सकते हैं। हम उड़ते हुए अपने मुंह में एक छड़ी दबा लेंगे, तुम उसे पकड़ कर लटक जाना। इस तरह हम तुम्हें उड़ा कर वहीं ले जाएंगे, जहां हम जा रहे हैं।”

बाकी दोनों दोस्त बोले, “यह तो बहुत ही बढ़िया उपाय है।” और वे उड़ान भरने के लिए तैयार हो गए। कछुआ उड़ान के नाम पर बहुत उत्साहित था-आज वह सही मायनों में आकाश में उड़ने जा रहा था, यह सोच कर वह बहुत खुश था। उसने सोचा कि अब वह दुनिया का सबसे पहला उड़ने वाला कछुआ बन जाएगा। बाकी दूसरे सुनेंगे तो हैरान होंगे। 

हंस उड़ान भरने को तैयार हो गए। हंसों ने छड़ी ली और कछुए से कहा कि वह उसे कस कर पकड़ ले। हंस जानते थे कि कछुआ बहुत बातूनी है। उन्होंने उसे उड़ान भरने से पहले चेतावनी दी, “चाहे कुछ हो जाए। तुम अपना मुंह मत खोलना। समझ गए न?” 

“हां-हां! क्यों नहीं, मैं जानता हूं। मुझे मूर्ख समझ रखा है क्या?” कछुए ने आश्वासन दिया। 

“अब क्या कहें, तुम बोलने के इतने शौकीन हो कि कोई सुनने वाला न भी हो, तब भी तुम बोलते रहते हो,” हंसों ने मजाक किया। 

वे उसे पेड़ों के ऊपर से उड़ान भरते हुए ले चले। कछुए को बहुत मजा आ रहा था। क्या 

नजारा था! सारे पक्षी उन्हें ही घूर-चूर कर देख रहे थे। दरअसल किसी ने कछुए को पहले उड़ते हुए नहीं देखा था। 

बातूनी कछुआ 

और तभी नीचे मैदान में खड़े कुछ लोगों का ध्यान ऊपर की ओर गया। वे यह नहीं समझ पा रहे थे कि हंस किसे अपने साथ उड़ा कर ले जा रहे हैं। ‘काश! इन्हें भी पता चल जाए कि एक कछुआ उड़ान भर रहा है,’ मूर्ख कछुए ने यह सोचा और वह हंसों द्वारा दी गई चेतावनी को भूल गया। उसने कुछ बोलना चाहा, पर यह क्या, मुंह खोलने की देर थी कि वह बेचारा कछुआ धरती पर धड़ाम से आ गिरा और मर गया। हंसों ने उदासी से अपने मूर्ख मित्र को देखा और आगे चल दिए।

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