पंचतंत्र की कहानियां-डर गए हाथी

पंचतंत्र की कहानियां-डर गए हाथी

पंचतंत्र की कहानियां-डर गए हाथी

किसी जंगल में अत्यंत शक्तिशाली हाथियों का एक झुंड रहता था। ये अपनी मस्ती में सारे जंगल में घूमा करते थे। ये अपने सामने किसी भी जानवर को कुछ नहीं समझते थे। इसलिए अधिकतर जानवर इनसे डर के मारे दूर ही रहते थे। इन बलशाली हाथियों से सभी डरते थे। 

एक बार जंगल में कई महीनों तक वर्षा नहीं हुई। सारे तालाब और नाले सूख गए। हाथियों को यह देख कर चिंता होने लगी। वे सोचने लगे कि अब उनका काम कैसे चलेगा। क्योंकि उनके बच्चों को नहाने व पीने के लिए तो बहुत सारे पानी की जरूरत होती है इसलिए वे अपने राजा के पास गए। उन्होंने उससे कहा कि वह ही कोई उपाय करें। 

पंचतंत्र की कहानियां-डर गए हाथी

हाथी राजा को याद आया कि जंगल में एक ऐसी झील भी है, जिसका जल कभी नहीं सूखता। धरती के नीचे से ताजा पानी हमेशा उसे भरता रहता है। यह जानकर पूरा झुंड बहुत खुश हुआ। सभी उस झील तक जाने के लिए तैयार हो गए। वे सब झील की ओर चल दिए। 

एक सुबह वे सब उस झील के पास जा पहुंचे। पानी देखते ही वे सब दीवानों की तरह उस ओर लपके। झील के किनारे की दलदली भूमि में बहुत से खरगोशों के बिल थे। हाथियों के चलने से उनमें से कई खरगोश मारे और कुचले गए। अपनी मस्ती में चलते और दौड़ते उन हाथियों को यह पता ही नहीं चला कि उन्होंने कितने ही खरगोशों को जान से मार दिया है। 

खरगोश इससे बहुत दुखी थे। उन्होंने हाथियों के जाने के बाद एक सभा की। वे सब आपस में चर्चा करने लगे कि आने वाले समय में ऐसे हमले से अपने परिवारों को बचाने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए।

वे तो आकार में बहुत बड़े हैं और संख्या में बहुत ज्यादा। हम उनका मुकाबला नहीं कर सकते, लेकिन हमें कोई न कोई राह तो निकालनी ही होगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जाए।” । 

एक नन्हे खरगोश ने कहा, “क्या हम उन्हें डरा कर भगा नहीं सकते?” 

“हां, विचार तो बुरा नहीं है। हम्म…. मुझे जरा सोचने दो,” एक बूढ़े खरगोश ने कुछ सोचते-विचारते हुए कहा। फिर वह बोला, “पता है, हाथी ताकतवर होने के बावजूद थोड़े मूर्ख किस्म के जानवर होते हैं। उन्हें जो भी कहा जाए, ये उस पर झट से विश्वास कर लेते हैं, इसलिए हम उनके साथ एक चाल चलेंगे। उसके लिए क्या तुम सब तैयार हो?” खरगोशों ने स्वीकृति में अपने सिर हिलाए। 

 “तो सुनो, हम लोगों में से एक खरगोश दूत बन कर उनके पास जाएगा। हम कहेंगे कि हमें हमारे महाराज चंद्रमा ने भेजा है, वे उस झील के स्वामी हैं। चंद्रमा ने हाथियों को संदेश दिया है कि वे अगर अपनी जान की सलामती चाहते हैं तो आज के बाद दोबारा कभी झील की ओर न आएं, वरना उनकी खैर नहीं।” 

एक खरगोश पहाड़ी पर चला गया और हाथियों के झुंड के आने का इंतजार करने लगा। ज्यों ही शाम का समय हुआ, हाथियों का झुंड आ पहुंचा। खरगोश ने चिल्ला कर हाथियों के राजा से कहा, “श्रीमान्। आप झील के पास न जाएं। आपकी जान को खतरा हो सकता है। झील के राजा चंद्रमा ने मुझे दूत बना कर आपके पास भेजा है ताकि आपको यह संदेश दिया जा सके।” 

हाथी ने कहा कि वह चंद्रमा राजा से मिलना चाहता है। उसने खरगोश से कहा कि वह उसे अपने राजा से मिलवा दे। 

पंचतंत्र की कहानियां-डर गए हाथी

रात गहराने लगी तो खरगोश हाथी को झील के पास ले गया। झील के पानी में चंद्रमा की परछाईं दिखाई दे रही थी। हाथी ने उसे ही खरगोशों का बलशाली राजा समझ लिया। उसने डर कर चंद्रमा को नमस्कार किया और फिर कभी झील की ओर नहीं गया।

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