पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानी-सियार का बच्चा

पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानी

पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानी-सियार का बच्चा

किसी घने वन में शेर और शेरनी रहते थे। उनके दो बच्चे भी थे। पूरा परिवार बड़े ही आनंद से जंगल की सैर करता। शेर शिकार करके लाता। शेरनी घर पर ही रह कर बच्चों की देखरेख करती, उन्हें खाना खिलाती। 

एक बार शेर शिकार को दिनभर कोई शिकार नहीं मिला। एक छोटा जानवर भी नहीं दिखा, जिसे वह अपनी पत्नी और बच्चों के लिए मार सकता। वह उदास हो कर घर आ रहा था कि अचानक उसे सियार का छोटा-सा बच्चा दिखाई दिया। शेर का दिल नहीं माना कि वह उस बच्चे को जान से मारे। वह उसे अपने साथ ले आया और अपनी पत्नी को दे दिया। 

शेरनी ने उस अनाथ बच्चे को अपना लिया। वह अपने दो बच्चों के साथ-साथ सियार के बच्चे का भी खयाल रखने लगी। शेरनी उसे अपना तीसरा बेटा मानती थी। वह उसे अपना दूध भी पिलाती। इस तरह शेर के परिवार में सियार का बच्चा बड़ा होने लगा। वह उनके साथ ही रहता। तीनों भाई एक साथ मिल कर खाते-पीते, एक साथ जंगल में खेलते। इस तरह वे तीनों बड़े होने लगे। 

एक दिन जब वे जंगल में घूम रहे थे तो अचानक पेड़ों के पीछे से हाथी निकल आया। शेर के बच्चे तो हाथी पर हमला करने भागे लेकिन सियार वहीं ठहर गया और चिल्लाने लगा, “आगे मत जाओ। यह तो हमारा दुश्मन है। यह हमें मार देगा। भाइयो! इससे दूर रहो। इसके पास मत जाओ।” 

पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानी-सियार का बच्चा

शेर के बच्चों को सियार से बहुत लगाव था इसलिए उन्होंने अपने भाई की बात मान ली और हाथी के पास नहीं गए लेकिन वे रास्ते में सियार के बच्चे का मजाक उड़ाते रहे। जब वे घर पहुंचे तो उन्होंने अपने माता-पिता को बताया कि वह किस तरह हाथी को देख कर भाग गया था। यह सुन कर सियार के बच्चे को बहुत गुस्सा आया। वह अपने भाइयों के साथ लड़ने लगा। 

शेरनी सारी बात समझ गई। वह जानती थी कि प्रत्येक जीव में कुछ ऐसी क्षमताएँ होती हैं; जो उसे जन्म से मिलती हैं। इन्हें विकसित तो किया जा सकता है, लेकिन किसी भी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता। सियार स्वभाव से चालाक तो हो सकता है, लेकिन हाथी जैसे विशाल पशु का शिकार नहीं कर सकता। लेकिन बच्चे इस बात को नहीं समझते। इसलिए सियार के बच्चे को अकेले में ले जा कर उसने समझाया, “बेटा, तुम्हें अपने भाइयों से उलझना नहीं चाहिए। हमें हमेशा दूसरों के साथ मीठा बोलना चाहिए।” 

“फिर वे मेरा मजाक क्यों उड़ा रहे हैं। वे मुझे देख कर बार-बार हंस रहे हैं। मैं भी तो उनकी तरह सुंदर और ताकतवर हूं और उनकी तरह चतुराई भी रखता हूं। वे मेरा इस तरह मजाक उड़ाते हैं मानो मैं उनसे किसी बात में कम हूं।” 

शेरनी को एहसास हो गया कि अब सियार के बच्चे को सच बताने का वक्त आ गया है। उसने बहुत प्यार से उसे समझाया, “मेरे बच्चे, तुम दूसरों की तरह बहुत बहादुर और होशियार हो लेकिन तुममें और उनमें एक अंतर है। तुम्हें मैंने जन्म नहीं दिया। तुम शेर नहीं हो। तुम जंगल में अनाथ थे इसलिए तुम शेरों के परिवार में पले हो। तुम्हारी प्रजाति एकदम अलग है। तुम एक सियार हो। तुम्हारे परिवार में आज तक किसी ने हाथी को नहीं मारा। यही बेहतर होगा कि तुम्हारे भाइयों को सच्चाई पता चले उससे पहले ही तुम यह जगह छोड़ दो।” 

पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानी-सियार का बच्चा

सियार के बच्चे को सारी बात समझ आ गई। वह आखिरी बार अपने परिवार से मिला और अपनी जान बचाने के लिए वहां से भाग गया क्योंकि शेर के बच्चे किसी दिन उसका भी शिकार कर सकते थे।

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