पंचतंत्र कहानी इन हिंदी-धोबी का गधा

पंचतंत्र कहानी इन हिंदी-धोबी का गधा

पंचतंत्र कहानी इन हिंदी-धोबी का गधा

किसी नगर में एक धोबी रहता था। उसने अपने काम के लिए एक गधा रखा हुआ था। गधा बहुत ही दुबला और मरियल हो गया था क्योंकि धोबी उसे खाने-पीने के लिए कुछ नहीं देता था। 

धोबी के पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वह अपने गधे को भरपेट चारा दे सके। धोबी जो भी कमाता था, उन पैसों से उसका गुजारा ही मुश्किल से चलता था, ऐसे में गधे को चारा देने के लिए पैसे कहां से आते। वह अपने गधे को किसी के खेत में चरने भी नहीं भेज पाता था क्योंकि अगर गधा किसी के खेत में घुस जाता तो लोग उसे बाहर खदेड़ देते। 

एक दिन धोबी अपने गधे को ले कर जंगल से निकला तो उसे मरा हुआ चीता दिखाई दिया। पहले तो वह उसके पास से निकल गया। फिर उसके दिमाग में एक उपाय आया। वह चीते की खाल का बहुत अच्छा प्रयोग कर सकता था। उसने सोचा कि वह चीते की खाल को अपने गधे को पहना देगा और किसी के भी खेत में चरने के लिए छोड़ देगा। 

लोग जब चीते को देखेंगे तो उसके पास जाने से डरेंगे और उसका गधा मजे से खेत में चर कर घर वापस आ जाया करेगा। उसे गधे के लिए चारा भी नहीं लेना पड़ेगा और गधा भी कुछ ही दिनों में मोटा-ताजा हो जाएगा। 

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यह सोच कर वह वहीं बैठ गया। उसने मरे हुए चीते के शरीर से सारी खाल उतार ली। इसके बाद वह अपने काम पर निकल गया। उसने शाम को अपने गधे पर चीते की खाल चढ़ा दी और उसे खेत में छोड़ दिया। किसी ने भी उस गधे के पास जाने का साहस नहीं किया, जो दूर से चीते जैसा दिखाई दे रहा था। गधा इसी तरह रोज खेतों में चर कर रात को घर आ जाता। कुछ ही दिन में वह बहुत ही मोटा-ताजा हो गया। कई बार तो गधा खेत में चरते-चरते इतना मस्त हो जाता कि धोबी को उसे घसीट कर घर वापस लाना पड़ता। गधा खेतों से वापस ही नहीं आना चाहता था। उसे कई सालों के बाद इतना अच्छा खाना जो मिलने लगा था। 

उसे बहुत आनंद आ रहा था। वह अपने मालिक का बहुत एहसानमंद था, जिसकी वजह से उसे भरपेट भोजन मिलने लगा था। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उस पर क्या मुसीबत आने वाली थी। 

एक रात धोबी ने हमेशा की तरह उसे चीते की खाल पहना कर खेत में चरने भेज दिया। धोबी थका हुआ था। उसे बिस्तर पर लेटते ही नींद आ गई। उसने सोचा कि वह गधे को सुबह-सुबह वापस ले आएगा। अचानक लोगों की आवाजें सुन कर उसकी आंख खुल गई। वह उठ कर देखने भागा कि बाहर से शोर कैसा आ रहा है। लोग अपनी लालटेनें और डंडे ले कर खेतों की ओर भागे जा रहे थे। 

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उसने एक आदमी से पूछा कि क्या हो गया?’ उस आदमी ने बताया, “हमने एक चीते को खेत में घूमते देखा तो हम उससे दूर ही रहे पर अचानक ही वहां से एक गधे के रेंकने की आवाज आने लगी और तभी वह जानवर भी गधे की तरह रेंकने लगा जिसे हम चीता समझ रहे थे। अब हमें पता चला कि वह चीते की खाल में एक गधा ही है। हम उसे सबक सिखाने जा रहे हैं।” 

धोबी समझ गया कि अब उसकी भी खैर नहीं है। गांव वाले गधे के मालिक को पहचानने के बाद उसे भी नहीं छोड़ेंगे। इसलिए वह अपनी जान बचा कर गांव से बाहर भागा। उधर खेत में गधे की जम कर पिटाई हुई। उसे अपने रेंकने का फल मिल गया था।

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