Nishant jain essay book in hindi-बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के उन्नयन में सूचना प्रौद्योगिकी का योगदान

Nishant jain essay bookin hindi

Nishant jain essay book in hindi-बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के उन्नयन में सूचना प्रौद्योगिकी का योगदान अथवा बैंकिंग सहित भारत के वित्तीय क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका 

सूचना प्रौद्योगिकी ने प्रायः समाज के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाकर मानव जीवन को संवारने एवं सहज बनाने का काम किया। भारत में बैंकिंग सहित वित्तीय क्षेत्र तो इससे विशेष रूप से लाभान्वित हुआ है। सूचना प्रौद्योगिकी के कारण बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र जहां नई-नई सुविधाओं से लैस हुए हैं, वहीं इनके कार्यों में पारदर्शिता भी बढ़ी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि सूचना प्रौद्योगिकी के कारण बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ी है, जिससे समावेशी विकास एवं वित्तीय समावेशन जैसी प्रक्रियाओं को गति एवं बल मिला है। 

बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में समग्र रूप से बेहतर आंतरिक व्यवस्था, बेहतर ग्राहक सेवा एवं समूची व्यवस्था के बेहतर निष्पादन (Performance) के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी के लाभकारी प्रभाव जिस तरह से परिलक्षित हुए हैं, उसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी को बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणाली में अधिकाधिक प्रोत्साहन दिए जाने के प्रयास सुनिश्चित किए जा रहे हैं। इसका पता भारतीय रिजर्व बैंक के उस दृष्टि दस्तावेज से चलता है, जिसमें प्रौद्योगिकीय अनुप्रयोग प्राविधियां विकसित किए जाने पर विशेष बल दिया गया है। इसमें जहां नियमन एवं पर्यवेक्षण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी को वित्तीय एवं बैंकिंग प्रणाली में सक्रिय रूप से प्रोत्साहन | दिए जाने की बात कही गई है, वहीं यह भी प्रस्ताव है कि एक विशिष्ट संस्थान के रूप में ‘बैंकिंग प्रौद्योगिकी शोध एवं विकास संस्थान’ की स्थापना की जाए। 

यकीनन सूचना प्रौद्योगिकी ने एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, कोर । बैंकिंग सेवा एवं साझी भुगतान प्रणाली जैसे अपने अभिनव एवं अधुनातन माध्यमों से भारत के वित्तीय एवं बैंकिंग क्षेत्र को एक नवीन चेहरा प्रदान करने का काम किया है। ई-बैंकिंग ने बैंकिंग एवं वित्तीय दुनिया को बहुत ही सहज एवं सरल बनाने का काम किया है। वस्तुतः मौजूदा दौर ई-बैंकिंग का ही है, जिसके माध्यम से आप घर बैठे बैंकिंग से जुड़े अनेक कार्य कर सकते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर, मोबाइल बैंकिंग, कार्ड पेमेंट आदि इसी के घटक हैं। एटीएम, डेबिट कार्ड एवं क्रेडिट कार्ड के रूप में ग्राहकों को जो सुविधाएं मिली हैं, वे प्रशंसनीय हैं। कुछ समय पूर्व भारत सरकार द्वारा स्वदेशी पेमेंट गेटवे कार्ड रूपे (Ru Pay) जारी किया जा चुका है। इसके जारी होने से भारत विश्व के उन विशिष्ट देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी स्वदेशी कार्ड भुगतान प्रणाली है। रूपे कार्ड के माध्यम से लोगों द्वारा ‘वीसा’ (Visa) एवं ‘मास्टर कार्ड’ (Master Card) की तरह एटीएम से धन निकाला जा सकेगा खरीदारी भी की जा सकेगी। एटीएम से धन निकासी आसान हुई है। भले ही आपका खाता किसी भी बैंक में हो और आप कहीं भी हों, एटीएम से धन की निकासी कर सकते हैं। सिर्फ धन निकासी ही नहीं कर सकते, आवश्यकता महसूस होने पर अपना बैलेंस भी चेक कर सकते हैं। एटीएम को परस्पर तंत्रबद्ध कर इस साझी भुगतान प्रणाली को संभव बनाने में सूचना प्रौद्योगिकी ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। अब सफर आदि के दौरान लोगों को भारी भरकम धनराशि लेकर चलने का जोखिम नहीं उठाना पड़ता। एटीएम कार्ड अपने पास रखिए और सुरक्षित सफर करिए। 

“सूचना प्रौद्योगिकी के कारण बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ी है, जिससे समावेशी विकास एवं वित्तीय समावेशन जैसी प्रक्रियाओं को गति एवं बल मिला है।” 

ई-बैंकिंग के तहत ‘इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस’ (ईसीएस) से बार-बार एवं आवधिक आधार पर किए जाने वाले निधि अंतरणों में त्वरितता एवं पारदर्शिता आई है तथा इस इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मुद्रा के थोक अंतरण की सुविधा प्राप्त कर ग्राहक लाभान्वित हो रहे हैं। इसी प्रकार ‘नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर’ (एनईएफटी) सुविधा को देशव्यापी आधार प्रदान किया गया है। यह एक ऐसी सुविधा है, जिसका लाभ उठाकर व्यक्ति, फर्म एवं कंपनियां, बैंक की किसी एक शाखा से देश में स्थित अन्य किसी बैंक शाखा में खातेदार व्यक्तियों, फर्मों एवं कंपनियों को निधि का अंतरण कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें मूल रूप से राशि भेजने वालों (प्रेषकों) को बिना बैंक खाते के भी निधि अंतरित करने की सुविधा प्रदान की गई है। निधि अंतरण पद्धतियों के विकास के क्रम में ‘रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट’ (आरटीजीएस) प्रणाली भी महत्त्वपूर्ण साबित हुई है। बड़ी निधियों (न्यूनतम दो लाख रुपये) की बैंकिंग चैनल द्वारा मुद्रा अंतरण की इस सर्वाधिक तेज प्रणाली ने वास्तविक समय एवं सकल आधार पर मुद्रा अंतरण को गति प्रदान की है। उल्लेखनीय है कि वित्तीय क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी की उपादेयता को देखते हुए ही डाक विभाग ने भी मोबाइल मनीऑर्डर, इंस्टेंट मनीऑर्डर (आईएमओ) एवं इलेक्ट्रॉनिक मनीऑर्डर (ईएमओ) की सेवाएं प्रारंभ की हैं, जो कि द्रुतगामी हैं। इस प्रकार परंपरागत सेवाओं को तकनीक के प्रयोग से आधुनिक स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। स्पष्ट है कि सूचना प्रौद्योगिकी ने देश के बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र को एक ऐसा मजबूत तकनीकी आधार एवं संजाल प्रदान किया है, जिससे त्वरितता बढ़ी है, तो फासले घटे हैं। कामकाज में तेजी भी बढ़ी है। बैंकों के कम्प्यूटरीकरण से जहां कामकाज में दक्षता और कुशलता बढ़ी है, वहीं एक पारदर्शी वातावरण बना है। यह अकारण नहीं है कि बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में शत-प्रतिशत कम्प्यूटरीकरण के निर्देश केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा दिए गए हैं। 

सूचना प्रौद्योगिकी के कारण अनेक स्तरों पर भारत का बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र लाभान्वित हुआ है। ई-बैंकिंग का सबसे अच्छा लाभ यह मिला है कि इससे बैंकिंग सेवाएं तंत्रबद्ध हुई हैं, जिससे साझी भुगतान प्रणाली अस्तित्व में आई है। परिणामस्वरूप बैंकों की परिचालन लागत में कमी आई है। लेन-देन की लागत में 10% की कमी आई है। सूचना प्रौद्योगिकी ने जहां बैंकों को कुशल एवं दक्ष बनाने का काम किया है, वहीं व्यापार परिचालनों को सरल व सहज बनाया है। इस वजह से जहां ग्राहक शीघ्र एवं सीधी सुविधाओं से जुड़े हैं, वहीं व्यावसायिक प्रक्रियाओं के लागत मूल्यों में कमी आई है। सूचना प्रौद्योगिकी विशिष्ट रूप से नए उत्पादों और सेवाओं को द्रुत गति से प्रस्तुत करने में बैंकों के लिए सहायक सिद्ध हुई है।

सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से हम समावेशी विकास एवं इसी के एक महत्त्वपूर्ण घटक वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) की दिशा में सधे कदमों से आगे बढ़ रहे हैं। इस प्रकार जहां हम भारत की आर्थिक संवृद्धि को पर्याप्त रूप से समावेशित बनाने में सफल हो रहे हैं, वहीं इसके अनिवार्य घटक वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के कारण बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं को व्यापक विस्तार मिला है। परिणामस्वरूप अल्प आय तथा कमजोर वर्ग के उस बड़े समूह को, जो सामान्य रूप से प्रचलित बैंकिंग प्रणाली से लाभ प्राप्त करने से वंचित रह जाता है, को वहनीय लागत पर बैंकिंग सेवाओं एवं बैंकिंग उत्पादों से प्राप्त होने वाला लाभ उपलब्ध हुआ है। इस वर्ग की पहुंच बैंकिंग सेवाओं तक बढ़ने से अब सामान्य बैंकिंग प्रणाली परिणाममूलक सिद्ध हो रही है। इसका एक लाभ इस रूप में भी दिख रहा है कि | जहां देश का वंचित एवं गरीब तबका बैंकिंग सेवाओं के दायरे में | आने से सूदखोरों, महाजनों एवं निजी वित्तीय संस्थाओं के चंगुल से | मुक्त हो रहा है, वहीं वित्तीय मामलों के प्रति उसमें जागरूकता एवं | चेतना बढ़ रही है। यह तबका जहां बैंकिंग सेवाओं एवं उत्पादों के | महत्त्व को जान पाया है, वहीं उसमें नियमित बचत जैसी आदतें भी | विकसित हो रही हैं। 

“सूचना प्रौद्योगिकी ने देश के बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र को एक ऐसा मजबूत तकनीकी आधार एवं संजाल प्रदान किया है, जिससे त्वरितता बढ़ी है, तो फासले घटे हैं। कामकाज में तेजी भी बढ़ी है। बैंकों के कम्प्यूटरीकरण से जहां कामकाज में दक्षता और कुशलता बढ़ी है, वहीं एक पारदर्शी वातावरण बना है |”

सूचना प्रौद्योगिकी की एक महत्त्वपूर्ण देन यह भी है कि इसके द्वारा तैयार किए गए तकनीकी ढांचे के आधार पर ही हम वित्तीय समावेशन के देशव्यापी वृहद अभियान ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर पाए हैं। इस योजना के तहत सभी परिवारों को एक यथोचित दूरी के भीतर बैंकिंग सेवाओं सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करवाई जा रही है तथा ‘जीरो बैलेंस’ पर खाता खोलने की सुविधा प्रदान की गई है। दूसरी तरफ एलपीजी हेतु प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ‘पहल’ के क्रियान्वयन में भी सूचना प्रौद्योगिकी की केंद्रीय भूमिका है। इस प्रौद्योगिकी की मदद से ही आधार संख्या को बैंक खाते एवं एलपीजी उपभोक्ता की आईडी से तंत्रबद्ध करना संभव हुआ है। आज यह योजना यदि विश्व की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना बन गई है, तो इसमें सूचना प्रौद्योगिकी का बड़ा योगदान है। 

यह कहना असंगत न होगा कि अन्य क्षेत्रों की भांति भारत के बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के लिए भी सूचना प्रौद्योगिकी सुविधाकारी एवं नवप्रवर्तनकारी सिद्ध हुई है। इस तकनीक ने जहां उलझावपूर्ण कार्यों के संपादन को आसान बनाया है, वहीं पारदर्शिता एवं कुशलता को | बढ़ाकर बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं को नए आयाम दिए हैं। इससे – जहां बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र की आंतरिक व्यवस्था सुचारु एवं सुदृढ़ हुई है, वहीं बेहतर ग्राहक सेवा का सूत्रपात हुआ है। कामों में गति और लय देखने को मिल रही है। उम्मीद है कि भविष्य में हमें बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी के और लाभकारी प्रभाव देखने को मिलेंगे। 

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