पंचतंत्र की नई नई कहानियां-सच बोलने वाला पेड़ 

पंचतंत्र की नई नई कहानियां-सच बोलने वाला पेड़ 

पंचतंत्र की नई नई कहानियां-सच बोलने वाला पेड़ 

किसी गांव में दो गरीब मित्र रहते थे। उनके नाम थे धर्मबुद्धि और पापबुद्धि। धर्मबुद्धि बहुत ही नेक ईमानदार और मेहनती था जबकि उसका मित्र पापबुद्धि चालाक और आलसी। दोनों मित्र बचपन से ही एक साथ पल कर बड़े हुए थे। दोनों ने एक ही पाठशाला से पढ़ाई की थी। इस तरह उनकी मित्रता बहुत पुरानी थी। उस गांव में उन्हें अपने लिए कोई काम नहीं मिल पा रहा था। वे अक्सर इस बारे में विचार करते। अब वे बड़े हो चुके थे, इसलिए परिवार के लिए धन कमाने का कोई साधन खोजना उनका कर्तव्य था। एक दिन दोनों मित्रों ने किसी काम की तलाश में पड़ोसी राज्य में जाने पर विचार किया। 

पापबुद्धि जानता था कि वह खुद कुछ नहीं कर सकता इसलिए उसने सोचा, “मेरा दोस्त अच्छा काम करेगा, यह पैसा कमाएगा और फिर मैं इसका सारा धन चोरी करके आराम से रहूंगा।” 

वे दोनों साथ-साथ जाने की तैयारी करने लगे। वहां गए भी। धर्मबुद्धि ने वहां बहुत मेहनत और ईमानदारी से काम किया और कुछ ही दिन में 

उसके पास बहुत -सा धन जमा हो गया। इस दौरान पापबुद्धि केवल मेहनत करने का दिखावा करता रहा। असल में तो वह अपने मित्र के धन पर मौज करता था। 

जब उन्होंने बहुत सा धन जमा कर लिया तो वे अपने गांव वापस जाने लगे। पापबुद्धि ने मन ही मन योजना तैयार कर ली कि वह अपने मित्र का धन कैसे हड़प सकता है। जब वे एक जंगल में पहुंचे तो उसने कहा, “धर्म, हमारे पास बहुत सा धन है। जब हमारे रिश्तेदार इसे देखेंगे तो वे इसे हमसे लेना चाहेंगे। इसलिए हमें इसे यहीं-कहीं छिपा देना चाहिए। हम अपने गांव में बहुत थोड़ा-बहुत ही धन ले कर जाएंगे। जब भी जरूरत होगी, यहां से आ कर ले जाया करेंगे।” 

धर्म ने उसकी बात मान ली। उन्होंने अपना सारा धन एक पेड़ के नीचे गाड़ा और गांव चले गए। जब धर्मबुद्धि घर पहुंच गया तो उसी रात पापबुद्धि वहां आया। उसने सारा धन निकाल कर गड्ढे को पहले की तरह ही भर दिया। 

पंचतंत्र की नई नई कहानियां-सच बोलने वाला पेड़ 

कुछ ही दिन बाद पापबुद्धि ने दोस्त से कहा कि उसका पैसा खत्म हो गया है इसलिए वह पेड़ के नीचे गड़ा धन लेने जाना चाहता है। वह अपने मित्र के साथ जंगल में गया लेकिन वहां तो धन था ही नहीं। वह तो उसे पहले ही निकाल चुका था। 

पापबुद्धि ने अपनी जान बचाने के लिए झट से अपने दोस्त का ही झूठा नाम लगा दिया और बोला कि उसने धन की चोरी की है। 

धर्मबुद्धि को समझ आ गया कि उसे जाल में फंसाया जा रहा है क्योंकि धन उसने नहीं, उसके दोस्त ने चुराया है- केवल वे दोनों ही उस जगह के बारे में जानते थे।

वे दोनों अपना मामला पंचायत में ले गए। वहां पंच सच और झूठ का फैसला करने के लिए लोगों से आग पर चलने को कहते थे। यह सुन कर पापबुद्धि डर गया और बोला कि उन्हें सच या झूठ का पता लगाने के लिए आग पर चलने की जरूरत नहीं है। जंगल की देवी उन्हें सच बता देगी, जो उसी पेड़ पर रहती है, जहां उन्होंने अपना धन गाड़ा था। पापबुद्धि ने अपने पिता को सारी बात बता दी। वह भी अपने बेटे की तरह ही लालची था। पिता ने रात को ही पेड़ में एक खोखल बना दिया। 

पंचतंत्र की नई नई कहानियां-सच बोलने वाला पेड़ 

सुबह पंचों ने पेड़ पर रहने वाली जंगल की देवी से सच जानना चाहा। पेड़ में छिपे हुए पाप के पिता ने धर्म को ही चोर ठहरा दिया। पंचों को लगा जंगल की देवी ही बोल रही है, पर धर्म उस आवाज को पहचान गया। उसने झट से पेड़ के खोखल में आग लगा दी। उसके दोस्त का पिता वहां से चिल्लाते हुए बाहर आ गया। उसने सबके सामने सच कबूल लिया। पंचों ने पाप को झूठ बोलने और चोरी करने की कड़ी सजा सुनाई। इस प्रकार पापी को अपने पाप का दंड मिल गया।

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