बच्चों की नई कहानियां-बदकिस्मत जूं 

बच्चों की नई कहानियां-बदकिस्मत जूं 

बच्चों की नई कहानियां-बदकिस्मत जूं 

राजा का महल बहुत विशाल और सुंदर था। उसमें हर तरह का सुख-सुविधा का सामान मौजूद था। उसका सोने का कमरा, महल का सबसे सुंदर और आलीशान कमरा था। उसे बहुत ही सुंदर रेशमी कपड़े से बने परदों तथा बिस्तर की चादरों से सजाया गया था, जिन पर आरामदेह तकिए लगाए गए थे। पूरे कमरे में रोज कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों से सजावट की जाती थी और सुगंधित इत्र छिड़के जाते थे। जब राजा सारे दिन के कामकाज से थक जाता तो उसे अपने इस कमरे में आ कर बहुत आराम मिलता। उसने अपने सामने खड़े हो कर सारे कमरे की साज-सजावट करवाई थी। वह अक्सर उस कमरे के लिए दूसरे राज्यों से भी सामान मंगवाया करता था। इस तरह उसके सोने के कमरे की सुंदरता देखते ही बनती थी। 

उन्हीं रेशमी चादरों की सलवटों में एक सफेद रंग की जूं रहती थी। वह रोज राजा के सोने का इंतजार करती। जब राजा को गहरी नींद आ जाती तो 

वह चुपचाप राजा का खून चूसती। इसके बाद वह दिन में आराम से सो जाती। इस तरह उसके वहां होने का किसी को भी पता नहीं चलता था, इसलिए उसे कोई वहां से हटाता भी नहीं था। 

बच्चों की नई कहानियां-बदकिस्मत जूं 

लेकिन एक दिन कमरे में चोरी से एक खटमल आ गया। जू ने उसे देखा और पूछा कि वह वहां क्या कर रहा है। जू ने उसे वहां से जाने को कहा, पर खटमल बहुत घमंडी था, वह अपनी डींगें हांकने लगा और उसने वहां से जाने से इनकार कर दिया।

“यह क्या! क्या तुम अपने घर में इसी तरह मेहमान का स्वागत करती हो? तुम बड़ी अजीब हो, तुम्हें तो मेरी अच्छी तरह देखभाल करनी चाहिए। जबकि तुम हो जो मुझे वापस जाने को कह रही हो?” खटमल बोला। 

“पर ये राजा का शाही कमरा है। अगर तुम पकड़े गए तो शामत आ जाएगी,” जूं बोली। 

“अरे! मैंने कई लोगों का खून चूसा है पर कभी राजा के खून का स्वाद नहीं लिया है। मुझे पूरा यकीन है कि वह बहुत स्वादिष्ट होता होगा। क्योंकि वह इतना स्वादिष्ट भोजन करता है इसलिए उसका खून कितना जायकेदार होगा। तुम क्या कहती हो?”

 “हां! खून तो स्वाद है लेकिन मैं बहुत थोड़ा खून चूसती हूं, जबकि तुम पेटू हो। मैं राजा का खून तभी चूसती हूं, जब वह गहरी नींद में होता है। इस तरह उसे कुछ भी पता नहीं चलता। और तुम तो बहुत जोर से डंक मारते हो इसलिए तुम्हारे काटने से दर्द भी होता है, जबकि राजा को मेरे काटने का तो पता ही नहीं चलता।” 

 “मेरी प्यारी जू! तुम जैसा कहोगी, मैं वहीं करूंगा। तुम्हें शिकायत का मौका नहीं दूंगा, वादा करता हूं-ठीक है। एक बार राजा का खून चखने दो,” खटमल ने बहुत ही मीठी आवाज में कहा। 

“ठीक है, पर राजा के सोने के बाद ही कोई हरकत करना,” जूं ने चेतावनी दी। 

रात हो गई। महल में चारों ओर रोशनी कर दी गई। अंत में राजा अपने कमरे में सोने पहुंचा। उसके नौकरों ने मुकुट उतारने व कपड़े बदलने में मदद की। इसके बाद वह आराम करने के लिए लेट गया। जूं हमेशा की तरह राजा के गहरी नींद में सोने का इंतजार करने लगी। 

बच्चों की नई कहानियां-बदकिस्मत जूं 

खटमल भी इंतजार कर रहा था, पर उसमें इतना धैर्य नहीं था। उसने हवा में कुछ सूंघा और राजा का खून चूसने के लिए बेचैन हो गया। राजा के खून से उठने वाली महक उसे अपनी ओर खींच रही थी। उससे राजा के सोने का इंतजार ही नहीं हो रहा था। उसका धीरज छूट गया। जूं से किया गया वायदा वह भूल गया। और उसने सोने से पहले ही राजा को जोर से काट लिया। उसका डंक किसी मोटी सूई की तरह तीखा था। राजा अपने पलंग से उछल कर खड़ा हो गया। राजा के शरीर पर लाल रंग का निशान उभर आया था। राजा गुस्से में चिल्लाया। उसने अपने नौकरों को बिस्तर में अच्छी तरह देखने को कहा। खटमल तो छिप गया पर बेचारी जूं नौकरों की पकड़ में आ गई। नौकरों ने उसे उसी समय मार दिया।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

ten − four =