राष्ट्रीय कृषि बाजार पर निबंध | राष्ट्रीय कृषि बाजार Drishti IAS

राष्ट्रीय कृषि बाजार Drishti IAS

राष्ट्रीय कृषि बाजार पर निबंध | राष्ट्रीय कृषि बाजार Drishti IAS

भारत एक कृषि प्रधान देश है। एक कृषि प्रधान देश में कृषकों का स्थान महत्त्वपूर्ण होता है। यदि कृषक खुशहाल होता है, तो देश भी खुशहाल होता है। देश की खुशहाली कृषकों की खुशहाली पर केंद्रित होती है। ऐसे में यह आवश्यक है कि सरकार देश के किसानों के हित संवर्धन की दिशा में प्रयत्नशील रहे, ताकि देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और समृद्धशाली बने। इस बात को ध्यान में रखकर समय-समय पर किसानों के हितों को संवर्धित किए जाने के उद्देश्य सरकारी स्तर पर अनेक पहलें की जाती रही हैं। किसानों के हित संवर्धन की ऐसी ही एक नेक पहल ‘राष्ट्रीय कृषि बाजार’ के रूप में की गई है, जिससे किसानों को अपनी उपज की न सिर्फ बेहतर कीमत मिल सकेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में सुधार भी आएगा। राष्ट्रीय कृषि बाजार (नाम) एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है, जो कृषि का एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाना चाहता है। यह भी कह सकते हैं कि ‘नाम’ एक वर्चुअल बाजार है, जहां कीमतों की तलाश और बोलियों को ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। इसका सहयोगी बनने के लए प्रत्येक राज्य को अपना ई-मार्केटिंग पोर्टल स्थापित करना होगा। 

14 अप्रैल, 2016 को बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर | की 125वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन से 200 करोड़ रुपये के प्रारंभिक बजट के साथ राष्ट्रीय कृषि बाजार हेतु ई-व्यापार प्लेटफार्म (e-trading Plat | form for National Agriculture Market) का शुभारंभ किया जा चुका है। इसके साथ ही देश के 8 राज्यों (उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड एवं हिमाचल प्रदेश) की 21 मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार के साथ जोड़ दिया गया है। 2019 तक इसमें 585 मंडियों से जुड़ गई। इसी क्रम में अगले वर्ष तक 200 और मंडियों को जोड़ने की योजना है। ध्यातव्य है कि ईनैम का नया संस्करण 20 जून, 2019 को लांच किया गया। 

राष्ट्रीय कृषि हेतु इस पहल को अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे जहां देश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण बदलाव परिलक्षित होंगे, वहीं किसान अपनी उपज को अपनी शर्तों पर पारदर्शिता के साथ ऑनलाइन बेच सकेगा। इस पहल से जुड़ा सबसे लाभकारी पहलू यह है कि राष्ट्रीय ई-कृषि बाजार के माध्यम से देश में ‘एक राष्ट्र, एक बाजार’ की संकल्पना विकसित होगी और इसका स्तर क्रमिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय बाजार स्तरों तक उन्नयित किया जा सकेगा। 

देश में कृषि सुधार की दृष्टि से इस पहल को बेहद महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश का असंगठित किसान विपणन के मोर्चे पर प्रायः शोषण का शिकार होता आया है और अपनी उपज के लिए उसे अच्छी कीमत विकृत बाजार व्यवस्था के कारण नहीं मिल पाती है। सरकार की यह पहल कृषि विपणन के क्षेत्र में सुधारों को प्रोत्साहित करेगी और इससे देश भर में कृषि वस्तुओं के मुक्त प्रवाह के संवर्धन के साथ किसानों के उत्पादों के बेहतर विपणन की संभावनाओं में भी काफी वृद्धि होगी। इसके माध्यम से किसानों को विपणन संबंधी सूचनाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध होगी और उनके पास अपने उत्पादों की बेहतर कीमत पाने के लिए अधिक कुशल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी विपणन मंच होगा, जो कि पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के जरिए राज्य के भीतर और बाहर भी बड़ी संख्या में क्रेताओं तक उनकी पहुंच बढ़ाएगा। इसके फलस्वरूप किसानों की गोदाम आधारित बिक्री के जरिए बाजार तक पहुंच में भी अभिवृद्धि होगी और इस प्रकार बिचौलियों से मुक्ति के साथ उन्हें उन सामान्य मंडियों तक अपने उत्पादों को ले जाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी, जिन पर प्रायः दलालों का कब्जा रहता है। 

कृषि, सहकारिता एवं कृषक कल्याण विभाग इस योजना का क्रियान्वयन देश भर में चयनित विनियमित कृषि बाजारों में परियोजन योग्य साझा इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म के सृजन द्वारा लघु किसानों के लिए कृषि व्यवसाय संघ (Small Farmers Agribusiness Consortium) के माध्यम से कर रहा है। इस योजना में कृषि, सहकारिता एवं कृषक कल्याण विभाग की ओर से राज्यों एवं संघीय क्षेत्रों को निःशुल्क सॉफ्टवेयर की आपूर्ति तथा संबंधित हार्डवेयर/बुनियादी ढांचे की लागत में प्रति कृषि मंडी (निजी मंडियों के अतिरिक्त) केंद्र सरकार की ओर से 30 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान शामिल है। 

कृषि हेतु इस राष्ट्रीय ई-बाजार के विकास के लिए एसएफएसी (Small Farmers Agribusiness Consortium) मुख्य एजेंसी है, जो कि खुली बोली के माध्यम से सेवा प्रदाता का चयन करेगी। योजना को अखिल भारतीय स्तर पर लागू किया जा रहा है। योजना के तहत राज्यवार आवंटन का विकल्प नहीं उपलब्ध कराया गया है। हालांकि, इच्छुक राज्यों को आवश्यक कृषि विपणन सुधारों को अमल में लाने के संदर्भ में पूर्व अपेक्षित आवश्यकताओं (मंडी सुधारों) को पूरा करना होगा। साझा ई-व्यापार प्लेटफार्म के साथ एकीकरण हेतु राज्यों व संघीय क्षेत्रों को अपने-अपने यहां वैध एकल लाइसेंस, बाजार शुल्क की एकल बिंदु लेवी एवं कीमतें प्राप्त करने के साधन के रूप में इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के प्रावधानों के रूप में राज्य में कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC) अधिनियमों (मंडी कानूनों) में पूर्व सुधार करने आवश्यक हैं। इस योजना के तहत केवल वे ही राज्य और संघीय क्षेत्र सहायता प्राप्त करने के योग्य होंगे, जो उपरोक्त तीनों पूर्व सुधार लागू करेंगे। यहां यह रेखांकित करना समीचीन रहेगा कि इस योजना के अखिल भारतीय क्रियान्वयन के साथ राज्यों के भीतर होने वाले कृषि जिंसों के कारोबार में बहुलाइसेंसी प्रणाली समाप्त हो जाएगी तथा राज्यों में सभी मंडियों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था होगी। योजना के सुगम क्रियान्वयन को ध्यान में रखकर जहां किसानों को 24 घंटे किसान हेल्पलाइन सेवाएं उपलब्ध होंगी, वहीं कामकाज में मदद के लिए हर भागीदार मंडी में एक वर्ष के लिए एक जानकार व्यक्ति को नियुक्त किया जाएगा। 

राष्ट्रीय कृषि बाजार के रूप में बेशक किसानों के हित में एक अच्छी पहल की गई है, किंतु कुछ बातें इस पहल के मार्ग में बाधा बनकर खड़ी हैं। इस योजना में कृषि उपज के वजन, ग्रेडिंग और मानकीकरण के नेटवर्क की कमी है, जो कि एक बड़ी बाधा है। कभी कुदरती एवं स्थानीय कारणों से, तो कभी कुछ अन्य कारणों से कृषि उपज की गुणवत्ता में व्यापक अंतर पाया जाता है। इससे उपजों की कीमतों में भी अंतर आ जाता है। एक ही उपज की कीमत में, एक ही राज्य में व्यापक अंतर देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि गुणवत्ता और कीमतों को लेकर उठने वाले विवादों का निवारण किस तरह से किया जाएगा। ऐसे विवादों की रोकथाम के लिए मंडियों का आधुनिकीकरण नितांत आवश्यक है, किंतु इस बात की संभावना प्रबल है कि आढ़तियों एवं जमाखोरों की मजबूत राजनीतिक लॉबी मंडियों का आधुनिकीकरण आसानी से नहीं होने देगी। 

एक दुश्वारी देश के छोटे एवं सीमांत किसानों को लेकर भी है। ध्यातव्य है कि देश में लघु और सीमांत किसानों की संख्या बहुत अधिक है। लघु और सीमांत श्रेणी के किसानों का देश में प्रतिशत 85 है। इनको ई-मंडी से जोड़ना आसान काम नहीं है, क्योंकि एक तो इनमें से अधिकांश अशिक्षित हैं और उन्हें अक्षर ज्ञान तक नहीं है, दूसरे अभी भी भारत के गांवों तक कंप्यूटर-इंटरनेट की पहुंच सीमित है। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए इस तरह की बाधाओं से निपटना आवश्यक है। 

बहरहाल, कुछ बाधाओं के बावजूद राष्ट्रीय कृषि बाजार के रूप में देश के कृषि विपणन ढांचे को एकीकृत करने, पारदर्शी तथा  आधुनिक बनाने की एक श्लाघनीय पहल की गई है। बाधा-मुक्त बनाकर इस पहल को और प्रभावी बनाया जा सकता है। हमारी सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दो गुना करने का लक्ष्य रखा है, जिसकी प्राप्ति में राष्ट्रीय कृषि बाजार की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो सकती है। किसानों की पहुंच ऑनलाइन व्यापार तक होने से जहां उनकी आय बढ़ेगी, वहीं उत्पादों की उपलब्धता बढ़ने से कीमतें नियंत्रण में रहेंगी। किसानों को उस शोषणपूर्ण बाजार संरचना से मुक्ति मिलेगी, जिसमें न बिचौलिए होंगे और न किसानों के हकों पर डाका डालने वाले दलाल। 

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