रहस्य और रोमांचक कहानियां-उड़नतश्तरी का रहस्य जो अभी तक सुलझ ना सका

रहस्य और रोमांचक कहानियां-उड़नतश्तरी का रहस्य जो अभी तक सुलझ ना सका

रहस्य और रोमांचक कहानियां-उड़नतश्तरी का रहस्य जो अभी तक सुलझ ना सका

बात 24 जून, 1947 की है, जब एक अमेरिकी व्यापारी केनिथ आर्नल्ड वाशिंगटन के समीप अपना निजी विमान उड़ा रहा था। अचानक उसने एक जैसी नौ चमकीली आकृतियों को माउंट रेनियर से माउंट एडमस की ओर बहुत ही तेज गति से जाते हुए देखा। इन दोनों पहाड़ियों के बीच की दूरी और उन आकृतियों को वहां तक पहुंचने में लगे समय की गणना कर आर्नोल्ड ने अनुमान लगाया कि उनकी गति लगभग 1600 मील (2500 किलोमीटर) प्रति घंटा रही होगी। आर्नोल्ड ने बताया कि ये आकृतियां इतनी तेजी से उड़ रही थीं मानो तश्तरियां पानी पर उछलते हुए तैर रही हों। इस घटना के बाद से ही दुनियाभर में ‘अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट’ (यूएफओ) को अर्थात ‘उड़नतश्तरी’ के नाम से भी जाना जाने लगा।

कोलकाता में कौतूहल : क्या हम मनुष्यों के सिवा कोई और भी है इस जहां में? क्या धरती से परे कोई और भी जहां है। इस विषय पर चर्चा, परिचर्चा और बहस हमेशा से ही होती रही है, लेकिन अब तक कोई खास नतीजा नहीं निकला है। कोलकाता में घटित एक ऐसी ही आकाशीय घटना ने लोगों में धरती से अन्यत्र भी जीवन की संभावना पर पुनः कौतूहल पैदा कर दिया है।

रहस्य और रोमांचक कहानियां-उड़नतश्तरी का रहस्य जो अभी तक सुलझ ना सका

इस घटना में एक निजी कंपनी के एग्जिक्यूटिव को सुबह-सुबह जब आकाश में कुछ विचित्र सी घटना होती दिखाई दी, तो उसने अपने हैंडिकेंप से उसे रिकॉर्ड कर लिया और बिरला प्लेनेटोरियम के डाइरेक्टर को दिखाया। डाइरेक्टर डी.पी. दुरई के अनुसार पूर्वी क्षितिज में विचित्र सी दिखने वाली वह चीज बहुत ही चमकीली थी और लगातार तेजी से अपना आकार बदल रही थी। साथ ही उससे कई रंग भी बिखर रहे थे। पहले त्रिकोणाकार दिखने
वह चीज धीरे-धीरे गोले में बदल गई और फिर लगभग तीन घंटे तक दिखने के बाद एक साधा रेखा में तब्दील होकर आसमान में गुम हो गई। डाइरेक्टर दुरई के अनुसार आसमान में न तो कोई उल्कापिंड और न ही कोई प्राकृतिक चीज इतने लंबे समय तक ठहर सकती है।

उपरोक्त घटनाओं से इतना तो तय है कि अगर ‘यूएफओ’ सच्चाई है तो उन लोगों के पास जो तकनीकं है, वह बहुत ही उन्नत है और संभवत: वह हमसे कई प्रकाश वर्ष दूर रह रहे हैं। शायद इसी कारण लोगों को यूएफओ के विषय में अभी भी कोई खास जानकारी नहीं मिली है और विभिन्न देशों में मिले इससे संबंधित तथ्यों को वहां की सरकार ने अपने सीने में दफन कर रखा है।

कई गवाह हैं : कई जाने-माने प्रतिष्ठित लोगों ने उड़नतश्तरी देखने की घटनाओं का खुलासा किया है। एक ऐसी ही घटना में अमेरिकी वायु सेना के पर्व पायलट रहे एरिजोना के पूर्व गवर्नर फिफ सिमिंग्टन ने दावे के साथ कहा कि 1997 में जब वह एरिजोना के गवर्नर थे, उन्होंने आसमान में अजीबो-गरीब चीज देखी जिसका आकार एक तश्तरी की तरह था और उसमें से तेज रोशनी निकल रही थी। इस घटना को एरिजोना के कई सौ लोगों ने देखा। अकेले सिमिंग्टन ही ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिन्होंने इस तरह की आकाशीय घटना देखी हो। कई इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, शिक्षक, सैन्य अधिकारी व पायलट भी अलग-अलग मुल्कों में इस तरह की घटना के गवाह हैं। सिमिंग्टन के साथ 19 पूर्व पायलटों व सरकारी अधिकारियों के एक समूह ने सभी मुल्कों से गुजारिश की है कि वे किसी भी विचित्र आकाशीय गतिविधि की गहन जांच-पड़ताल करें। इस समूह के एक पायलट फ्रांस के जीन चार्ल्स डूबॉक ने 1994 में 3000 मीटर व्यास वाली एक ‘उड़नतश्तरी’ देखने की बात की, तो ईरान के लड़ाकू विमान के पायलट परविज
जाफरी ने 1976 में किसी तेज रोशनी वाली वस्तु का जिक्र किया।

रहस्य और रोमांचक कहानियां-उड़नतश्तरी का रहस्य जो अभी तक सुलझ ना सका

चांद पर ‘एलियंस : रूसी टेलीविजन पर दिखाए गए एक वृत्तचित्र में चांद पर ‘एलियंस’ का बेस होने की बात कही गई है। इस वृत्तचित्र के मुताबिक अमेरिका ने अपना अपोलो-11 मिशन भी एलियंस की वजह से रोक दिया था। इस वृत्तचित्र में दिखाई गई बातों की ताकीद अंतरिक्ष यात्री नील आर्म स्ट्रांग ने भी की। 11 जुलाई 1969 को जब नीलआर्मस्ट्रांग और एडमिन एल्ड्रिन अपोलो-11′ मिशन पर चंद्रमा पर उतरे तो उन्होंने एक गड्ढे के समीप कुछ अंतरिक्ष यान के दिखाई देने की रिपोर्ट दी और कहा कि वहां कुछ बच्चेनुमा लोग भी दिखे जो लगातार इन लोगों की ओर देख रहे थे। वह कुछ संकेत देना चाह रहे थे। मानो कह रहे हों कि चांद पर मत आओ, दूर चले जाओ।

ट्रेस केस : यूएफओ से जुड़ी घटनाओं का अध्ययन कर रहे यूफोलोजिस्ट के पास इसकी झलक की रिपोर्ट ब्राजील से मैक्सिको और वाशिंगटन से लेकर फ्लोरिडा तक की है, जिनमें एयर ट्रेफिक कंट्रोलर से लेकर कई उच्च सैन्य अधिकारियों ने भी यूएफओ के धरती पर उतरने की घटना की गवाही दी है। इन घटनाओं को यूफोलोजिस्ट के क्षेत्र में ‘ट्रेस केस’ कहा जाता है।’ ‘ट्रेस केस’ के यूफोलोजिस्ट के मुताबिक करीब 3000 ऐसे मामले हैं, जिनमें इन घटनाओं की भौतिक छाप मिलती है। हालांकि इनमें से कई घटनाओं की जांच करने पर पाया गया कि यह आकाशीय पिंड जैसा कोई तारा या वीनस जैसा चमकदार ग्रह या फिर उल्का गिरने की घटना मात्र थी।

प्रोजेक्ट ब्लू बुक : 40 के दशक में जब युएफओ देखे जाने की घटनाए जोरों पर थी, तब अमेरिकी वायुसेना ने 1948 में पहली बार शोध शुरू किया। मार्च 1952 में अब तक का सबसे चर्चित यूएफओ पैनल ‘प्रोजेक्ट ब्लू बुक’ का गठन किया गया। इस पैनल में कई वैज्ञानिक, भौतिक विज्ञानी, इंजीनियर, मौसम विज्ञानी व अंतरिक्ष यात्री आदि को भी शामिल किया गया। इस प्रोजेक्ट के तीन अहम लक्ष्य थे-1-सभी देखी गई ‘यूएफओ’ की घटनाओं का कारण बताते हुए वर्णन करना। 2-यह निर्णय लेना कि क्या इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा है। 3-क्या यूएफओ’ के पास कोई विकसित तकनीक है। जिसका इस्तेमाल अमेरिका कर सकता है। इस बीच अमेरिका के अलावा कनाडा, स्वीडन, सोवियत रूस व ऑस्ट्रेलिया से भी ‘यूएफओ’ देखे जाने की रिपोर्ट आने लगी और फरवरी 1966 में एक और पैनल का गठन किया गया। जिसने रिपोर्ट दी कि ‘यूएफओ’ देखने की घटनाएं या तो प्राकृतिक घटनाएं हैं जो आसमान में होती रहती हैं अथवा कोरी अफवाहें भर हैं। 1968 में अमेरिका वायुसेना ने ऐडवर्ड यू कॉनडोन से इस संबंध में अध्ययन करने को कहा। 1969 में जब 37 वैज्ञानिकों की टीम ने अपनी रिपोर्ट पेश की तो उसमें यही निर्णय दिया गया था कि ‘यूएफओ’ का कोई वास्तविक प्रमाण नहीं मिला। साथ ही उस कॉनडोन रिपोर्ट ने इस संबंध में आगे किसी
अध्ययन की जरूरत नहीं होने की बात का सुझाव दिया।

कॉनडोन रिपोर्ट के आधार पर ही दिसंबर 1969 में प्रोजेक्ट ब्लू बुक’ को भंग कर दिया गया। अब तक इसमें 12618 घटनाओं से संबंधित 80000 पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार कर ली गई थी। ‘प्रोजेक्ट ब्लू बुक’ के बंद होने के बाद से अमेरिका में ‘यूएफओ’ से संबंधित कार्यक्रम शुरू नहीं किया गया है। अमेरिका के अलावा कनाडा, ग्रेट ब्रिटेन, स्वीडन, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया व ग्रीस में भी वैज्ञानिकों ने ‘यूएफओ से संबंधित’ शोध किए हैं।

रहस्य से उठेगा पर्दा : हालांकि अब तक किसी भी शोध की रिपोर्ट को संबंधित सरकार ने उजागर नहीं होने दिया है, लेकिन हाल ही में वाशिंगटन के एक न्यायाधीश ने अमेरिकी पत्रकार लेसली कीन की याचिका पर नासा को 1965 में पेंसिल्वेनिया की एक ‘यूएफओ’ घटना के रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए जांच करने का आदेश दिया है। इस घटना में पेंसिल्वेनिया के लोगों ने आसमान में एक विचित्र-सी तेज नीली रोशनी देखी और कुछ ही देर बाद एक आग का गोला तेजी से जंगलों में गिर कर गुम हो गया। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों ने उस इलाके कीनाकेबंदी कर दी और ट्रक पर एक बड़े वलयाकार धातु से बनी किसी चीज को ले गए। बाद में सादा वस्त्रों में उन सैनिकों ने हर एक के घर जाकर इस घटना की जानकारी किसी को न देने की हिदायत दी थी। हालांकि इस आदेश के बाद अब इस रहस्य पर से लगता है पर्दा जल्द ही उठेगा।

एम त्रिकोण : रूस की राजधानी मास्को से करीब 600 मील पूर्व में युराल पर्वत के निकट का क्षेत्र अनजानी उड़नशील वस्तुओं का हंटिंग प्लेस कहा जा सकता है। इस क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों के लिए उड़नतश्तरियों से जुड़ी रहस्यमय घटनाओं का प्रत्यक्षदर्शी होना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है। यहां अकसर उड़नतश्तरियां आती रहती हैं। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि आए दिन उड़नतश्तरियां देखना अब उन्हें नीरस-सा लगने लगा है। इसे एम त्रिकोण के नाम से पहचानते हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस क्षेत्र में जो घटनाएं घटित हुई हैं, वे इतनी असाधारण हैं कि उन पर एकाएक विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। इन घटनाओं की ऐसे किसी दूसरे स्थान की घटनाओं से तुलना नहीं की जा सकती। वैज्ञानिक तो यहां तक कहते हैं कि एम त्रिकोण में विस्मयकारी शक्तियां विकसित हो रही हैं और आसपास के लोगों में भी अद्वितीय मानवीय शक्तियां देखी गई हैं।

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