रहस्यमय एवं विचित्र घटनाएं-ब्रिटिश इतिहास का एक भयानक हादसा 

रहस्यमय एवं विचित्र घटनाएं-ब्रिटिश इतिहास का एक भयानक हादसा 

रहस्यमय एवं विचित्र घटनाएं-ब्रिटिश इतिहास का एक भयानक हादसा 

एक बर्फान का हादसा ब्रिटेन के इतिहास के भयानक हादसों में से एक माना जाता है। यह हादसा 21 अक्तूबर, 1966 को दोपहर के समय घटित हुआ था। एक पूरे का पूरा स्कूल, ऐसी ऊंची इमारत के मलबे के नीचे दब गया था जिसमें कोयले का विशाल भण्डार मौजूद था। इस भयानक हादसे में लगभग एक सौ चालीस लोग मरे थे जिसमें 128 स्कूली बच्चे थे। 

ब्रिटिश इतिहास का एक भयानक हादसा 

हादसा होने के पूर्व ही ब्रिटेन के बहत से लोगों को इसका पूर्वाभास हो गया था। इन लोगों में ब्रिटेन के स्कूलों के अनेक बच्चे भी थे। इस संबंध में कई ऐसे केस ब्रिटेन के मनोवैज्ञानिक जे.सी. बार्कर ने संकलित किये थे। हादसे की शिकार होने वाली एक स्कूली लड़की की मां ने बार्कर को बतलाया कि हादसे के पहले ही अप्रत्यक्ष रूप में उसकी बेटी को एक तरह से अपनी मौत का पूर्वाभास हो गया था। 

हादसे के एक दिन पहले मेरी बेटी अचानक ही मौत के बारे में बातें करने लगी थी। वह बार-बार मुझसे कह रही थी कि उसे मौत से जरा भी डर नहीं लगता है। 

मिसेज रेनेट जेम्स नामक महिला बार्कर से अपने उस सपने का उल्लेख करना भी नहीं भूली थी जो उसने हादसे वाले दिन से पहले वाली रात को देखा था। “सपने में मैं बेटी के स्कूल गयी थी। मैं अभी स्कूल पहुंची ही थी कि अचानक किसी काले रंग की चीज की बरसात स्कूल के ऊपर होने लगी और देखते ही देखते सारा स्कूल उस गिरती हुई चीज में दफन हो गया। अब मुझे लगता है कि वह काली चीज और कुछ नहीं, कोयला थी।” प्लेमाऊथ ब्रिटेन में रहने वाली एक वृद्धा ने भी एबर्फान की भयानक त्रासदी को पहले से ही देख लिया था। उस वृद्ध महिला का नाम था-मिसेज जूलिया क्रिस्टी। जूलिया क्रिस्टी ने हादसे को अपने सपने में प्रतीकात्मक रूप में देखा था। सपने में जूलिया क्रिस्टी को स्कूल की इमारत को कोयले के ढेर में दबा, घायल लोग तथा एम्बुलेंस नजर आयी थी। अपने सपने का अर्थ उसने हादसे के बाद जाना था। 

इन्सानी अलार्म घड़ी 

इन्सानी अलार्म घड़ी 

केपटाउन, साउथ अफ्रीका का निवासी वान वुर्दे स्वयं को इंसानी अलार्म क्लॉक कहता है। वान वुर्दे के द्वारा स्वयं को ऐसा नाम देने का एक कारण है। वास्तव में वह विशेष अतीन्द्रिय शक्ति का स्वामी हैं जैसे कोई इंसान स्वयं को जगाने के लिए एक चलती घड़ी का अलार्म प्रयोग करता है, उसी तरह वुर्दे एक बंद तथा बेकार घड़ी की सुइयों से ही अलार्म का काम लेता है। अपनी अद्भुत शक्ति का वान वुर्दे ने 1961 में लगातार तीन सौ दिनों तक प्रदर्शन किया था। प्रोफेसर हैक्सले नामक परा-मनोविज्ञानी ने वान वुर्दे की अतीन्द्रिय शक्ति को परखा था। 

प्रयोग के दौरान वान वुर्दे ने अपनी बंद तथा बेकार घड़ी हैक्सले के हवाले कर दी थी। वान वुर्दे ने दावा किया था कि दूर बैठा प्रोफेसर हैक्सले जब उस घड़ी की सुइयां मिलायेगा, तो उसे अलार्म समझकर वह उसी समय नींद से जाग उठेगा। वान वुर्दे को निगरानी में रखा गया ताकि उसके नींद से जागने का समय नोट किया जा सके। दूसरी तरफ प्रोफेसर हैक्सले ने बंद घड़ी की अलार्म वाली सुइयां जिस समय पर मिलायीं, ठीक उसी समय वान वर्दे नींद से उठ बैठा। तीन दिन में एक बार भी इसमें अंतर नहीं आया। वान वुर्दे ने साबित कर दिया था कि वह वास्तव में इंसानी अलार्म क्लॉक था। 

रहस्यमय सच्ची घटनाएं -समय की फिसलन 

1901 में लंदन के आक्सफोर्ड कॉलेज की प्रिंसिपल शालोंट अपनी  एक मित्र एलिवर (एक स्कूल की हैडमिस्ट्रेस) के साथ फ्रांस में छुट्टियां मनाने गयी थीं। छुट्टियां मनाते हुए उन्होंने फ्रांस के दर्शनीय तथा ऐतिहासिक स्थलों को भी देखा। |

10 अगस्त को जब दोनों वर्सेल्स में सत्रहवीं तथा अठारहवीं शताब्दी में बने फ्रांसीसी राजाओं के भव्य महलों को देख रही थीं, तब उनके साथ अजीब घटना पेश आयी। दोनों महिलाओं को विश्वास था कि वे सशरीर अतीत में चली गयी थीं। उनका यह अनुभव विचित्र था।

10 अगस्त, 1901 को दोपहर के समय दोनों वर्सेल्स के सबसे मुख्य आकर्षण ‘पेटिट टिनान’ को देखने निकलीं। पेटिट टिनान वर्सेल्स में मौजूद तमाम इमारतों में सबसे भव्य थी। वर्सेल्स के मानचित्र के सहारे जब दोनों वहां पहुंचने का प्रयास कर रही थीं तो वे जैसे बीते हुए युग में पहुंच गयीं। मानचित्र में दिखाये गए मार्ग से वे जब पेड़ों के झुरमुट से गुजर रही थीं तो सहसा उनका सामना ऐसे स्त्री-पुरुषों से होने लगा जो फ्रांस में 18वीं शताब्दी में प्रचलित कपड़े पहन रखे थे। दोनों आश्चर्यचकित रह गयीं। वे पढ़ी-लिखी थीं, इसलिए जानती थीं कि बीसवीं सदी के आधुनिक फ्रांस के लोग ऐसे कपड़े नहीं पहनते हैं। दोनों महिलाएं आगे बढ़ती हुई एक ऐसी रहस्यमयी बस्ती में जा पहुंची जो 18वीं शताब्दी के फ्रांस की थी-वैसी ही इमारतें, वैसी ही गलियों में दिखाई देते शाही सैनिक, 18वीं शताब्दी के कपड़े पहने स्त्री, पुरुष और बच्चे, गलियों में भाग रही पुरानी शैली की घोड़ागाड़ी इत्यादि। अचानक 

कहीं से एक आदमी दोनों महिलाओं के पास आया और बड़े भद्र स्वर में| बोला कि वे दोनों गलत दिशा में जा रही हैं। उसने उनको पेटिट टिनान की ओर जाने वाला सही मार्ग बतलाया और स्वयं गायब हो गया। 

उस अजनबी द्वारा बताये हुए मार्ग से अन्ततः दोनों महिलाएं पेटिट टिनान | पहुंच गयीं। पेटिट टिनान के दरवाजे के पास ही दोनों को 18वीं शताब्दी की। शाही पोशाक में एक खूबसूरत स्त्री दिखायी दी। वह कोई चित्र बना रही थी। इतने में एक पुरुष आता दिखाई दिया। दोनों मिले और एक साथ इमारत के भीतर दाखिल हो गए, फिर उसका दरवाजा बन्द कर दिया। क्या इसके बाद शालोंट और एलिवर ने अतीत की विचित्र यात्रा की थी? सन् 1902 में जब ‘एन. एडवेन्चर’ के नाम से शालोंट और एलिवर की कहानी प्रकाशित हुई तो परा-मनोविज्ञान के शोधकर्ता ‘पेटिट टिनान’ की तरफ आकर्षित हुए। 

खोज शुरू हुई। शालोंट और एलिवर को सम्मोहित करके उनकी कहानी की सत्यता की जांच की गयी। महिलाओं पर सम्मोहन के प्रयास से यह बात साबित हो गयी कि वे झूठ नहीं बोल रही थीं। उनकी कहानी दर्शाती थी कि दोनों महिलाओं ने क्रांति से पूर्व के वर्सेल्स को देखा था। जिस महिला को पेटिट टिनान के बाहर देखा गया था, वह फ्रांस की अंतिम अभागी रानी अन्तोले थी। यह बात शालोंट और एलिवर द्वारा मेरी अन्तोले के पोर्टेट को देखने पर सामने आयी। शालोंट और एलिवर की कहानी वैज्ञानिकों के लिए एक जटिल रहस्य बन गयी।

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