मोटरसाइकिल का आविष्कार किसने किया |Motorcycle ka avishkar kisne kiya tha

मोटरसाइकिल का आविष्कार किसने किया

मोटरसाइकिल का आविष्कार किसने किया था |Motorcycle ka avishkar kisne kiya tha

आधुनिक युग में मोटर साइकिल ऐसा वाहन है, जो अधिकांश लोगों को बहुत पसन्द है। आज के समय में मोटर साइकिल गांव हो गया शहर, सभी जगह दिखाई पड़ती है। मगर इसे सभी उम्र के लोग नहीं चला सकते। अट्ठारह वर्ष से कम की आयु वाले किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाता और मोटर साइकिल चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बना होना अनिवार्य है। 

हल्की-सी किक मारते ही मोटर साइकिल सड़कों पर सरपट दौड़ने लगती है। सड़कें समतल हों अथवा उबड़-खाबड़, मोटर साइकिल किसी भी मार्ग पर चल सकती है, हर तरह की सड़कों पर चल सकती है। साइकिल की भांति मोटर साइकिल का भी आविष्कार किया गया। 

मोटर साइकिल का आविष्कार जर्मनी में सन् 1885 ई. में हुआ। इसे बनाने वाले इंजीनियर का नाम गोटलीब डायमलर था। वह पढ़ने-लिखने में बहुत तेज था। बचपन से ही उसकी रुचि इंजीनियर बनने की थी। अपना सपना साकार करने के लिए बहुत परिश्रम किया।

आखिर एक दिन उसकी मेहनत रंग लाई और उसका सपना पूरा हुआ। वह पढ़ लिखकर इंजीनियर बन गया। 

गोटलीब ने जर्मनी के कई कारखानों में इंजीनियरिंग का काम किया। वह पूरी मेहनत व ईमानदारी से काम करता था और अनुभव एकत्र करता था।

 गोटलीब कुछ ऐसा बनाना चाहता था, जिससे लोगों में उसकी प्रसिद्धि फैले और उसका किया गया आविष्कार सभी खरीदें। 

मोटरसाइकिल का आविष्कार किसने किया

उन दिनों ऑगस्ट निकोलस नामक इंजीनियर गैस-इंजन का निर्माण कर रहा था। गोटलीब डायमलर ने ऑगस्ट का उसके आविष्कार में भरपूर सहयोग किया। जब गैस इंजन बनकर तैयार हो गया, तो ऑगस्ट निकोलस को गोटलीब डायमलर ने बताया कि इंजन का उपयोग सड़क पर चलने वाले किसी भी वाहन में किया जा सकता है, किन्तु ऑगस्ट निकोलस ने उसकी बात पर जरा भी ध्यान नहीं दिया।

मगर गोटलीब डायमलर अपनी धुन का पक्का था, वह एक बार जो ठान लेता था, उसे करके ही रहता था। 

गोटलीब डायमलर ने मन-ही-मन निश्चय किया कि वह एक-न-एक दिन अपने प्रयास में अवश्य सफल होगा। उसने दिन-रात एक कर दिया, वह पूरी मेहनत और लगन से अपने उद्देश्य की पूर्ति में जुटा था। आखिर वह दिन भी आ पहुंचा, जिसका गोटलीब डायमलर को इंतजार था। 

 गोटलीब ने मोटर साइकिल का निर्माण कर दिया। वह विश्व का सर्वप्रथम मोटरसाइकिल का आविष्कार करने वाला बन गया।

गोटलीब की खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने इस बार भी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया था।

 सन् 1885 ई. में गोटलीब ने विश्व  की पहली मोटर साइकिल को अपने घर के आस-पास चलाकर देखा । मोटर साइकिल देखने में जितनी सुन्दर थी, चलने में उतनी ही बढ़िया।

फिर क्या था, देखते-ही-देखते, विश्व भर के इंजीनियर मोटर साइकिल का निर्माण करने में जुट गए। कुछ ही वर्ष बाद विश्व की सड़कों पर तरह-तरह की मोटर साइकिलें फर्राटे मारने लगीं। आज देश-विदेश के बाजारों में भिन्न-भिन्न प्रकार की मोटर साइकिलें उपलब्ध हैं, जिनमें अलग-अलग कम्पनियों ने कई प्रकार की सुविधाओं का ख्याल करके उनका निर्माण किया है।

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