Motivational story in Hindi-मन निर्मल करो

Motivational story in Hindi

Motivational story in Hindi-मन निर्मल करो

एक महात्मा किसी घर से भिक्षा मांगने गए। भिक्षा देने के वाद गृहिणी ने कहा, “स्वामी जी! कुछ उपदेश दीजिए।” महात्मा जी बोले, “आज नहीं, कल उपदेश दूंगा।” यह सुनकर गृहिणी बोली, “कल जरूर आइए, स्वामी जी!” 

दूसरे दिन महात्मा ने चलने से पहले कमंडल में गोबर भर लिया, साथ ही कुछ कूड़ा-और खरपतवार भी। कमंडल लेकर महात्मा उसी गृहिणी के घर पहुंचे, जहां पहले दिन गए थे। महिला ने उस दिन खीर बनाई थी। खीर में मेवे भी डाल रखे थे। गृहिणी के दरवाजे पर पहुंचकर उन्होंने हरि ओम तत् सत्’ की आवाज लगाई। 

गृहिणी खुशी-खुशी महात्मा को भिक्षा देने के लिए खीर लेकर आई। महात्मा ने अपना कमंडल आगे कर दिया। जैसे ही गृहिणी कमंडल में खीर डालने लगी, उसने देखा कि कमंडल में गोबर, कूड़ा और खरपतवार भरा हुआ है। वह सहसा ठिठक गई। कुछ क्षण बाद बोली, “महाराज जी! यह क्या। कमंडल तो गंदा है।” 

महात्मा जी बोले, “हां, गंदा तो है, लेकिन खीर इसी में डाल दो।” महिला बोली, “महाराज! इसमें डालने से तो सारी खीर ही खराब हो जाएगी। मुझे अपना कमंडल दीजिए। पहले मैं इसे साफ कर लाऊं।” महात्मा जी बोले, “देवी! क्या तुम इसमें खीर तभी डालोगी जब यह पूरी तरह साफ हो जाए?” 

महिला बोली, “हां महाराज।” 

महात्मा जी बोले, “देवी ! बस यही मेरा उपदेश है। मन में जब तक कूडे रूपी संस्कार, विकार और विचार भरे हैं, तब तक उपदेश करना बेकार होगा। पहले मन की शुद्धता जरूरी है। चिंताओं को दूर करना जरूरी है। जब तक मन से यह सारी गंदगियां दूर नहीं होंगी, तब तक उपदेश देने का कोई फायदा नहीं।” यह सुनकर महिला महात्मा जी की सराहना करने लगी। 

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