Moral stories for childrens in hindi-सोम का पिता 

Moral stories for childrens in hindi-

Moral stories for childrens in hindi-सोम का पिता 

बहुत समय पहले की बात है, किसी गांव में एक गरीब पंडित रहता था। वह भीख मांग कर अपना पेट भरता था। कभी-कभी लोग उसे भीख में अनाज देते तो कभी पका हुआ भोजन। वह उस कच्चे-पक्के भोजन को अपने घर ले आता। उसमें से कुछ खा लेता और कुछ बाद में खाने के लिए बचा कर रख लेता। 

अक्सर लोग उसे गेहूं का आटा देते। वह घर ला कर उसकी रोटी बनाता। अगर आटा बच जाता तो वह उसे मटके में डाल देता, जो उसके बिस्तर के पास ही टंगा था। हर रात सोते समय उसकी नजर टंगे हुए मटके पर जाती और वह निश्चित हो जाता। उसे आटे से भरा मटका देख कर तसल्ली मिलती थी कि अगर किसी दिन भीख में भोजन न मिला तो कम से कम उसे भूखे पेट तो सोना नहीं पड़ेगा। 

एक रात हमेशा की तरह सोने से पहले उसने उस मटके को गौर से देखा। अब वह आटे से भर चुका था। मटके को देखते ही वह ख्याली पुलाव पकाने लगा- ‘अब इस मटके में आटा भर गया है, अगर कभी गांव में अकाल पड़ा तो लोग मुझसे ही आटा खरीदने आएंगे। इस तरह मुझे बहुत से पैसे मिल जाएंगे। मैं उनसे बकरियों का जोड़ा खरीदूंगा और जल्दी ही मेरे पास बहुत सी बकरियां हो जाएंगी। फिर मैं उन बकरियों को बेच कर गौएं खरीद लूंगा। गौओं का दूध बेचने से जो पैसा मिलेगा, उससे मैं भैंसे खरीद लूंगा। जितना ज्यादा दूध बिकेगा, उतना ही और पैसा आएगा। वाह! मेरी तो जिंदगी ही बन जाएगी।’ 

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ऐसा सोचते-सोचते वह उस रात सो नहीं सका- इसी तरह सपने देखता रहा- ‘मैं घोड़े और घोड़ियां खरीदने और बेचने का काम भी शुरू कर दूंगा। फिर मेरे पास बहुत सारा पैसा और सोना होगा। मैं दूर-दूर से कारीगर बुलवा कर अपने लिए महल जैसा घर तैयार करवाऊंगा। मेरा बहुत बड़ा घर होगा। इसके बाद मैं शादी भी कर सकता हूं। मेरी पत्नी बहुत सुंदर र होगी और उसके बाद मेरे यहां एक बेटे का जन्म होगा। मैं उसे सोम कह कर बुलाऊंगा। सोम के आने से मेरे घर में कितनी रौनक हो जाएगी। उसके पैरों में पायल पहनाने से चारों ओर छम-छम की आवाज आया करेगी। 

‘जब वह घुटनों के बल चलने लगेगा, तो मुझे उसका बहुत ध्यान नहीं रखना पड़ेगा। उस समय मैं पुस्तकें पढ़ सकता हूं। मैं अस्तबल में बैठ कर पढंगा। अगर वह उस तरफ आएगा तो मैं अपनी पत्नी को आवाज दूंगा कि वह उसे वहां से ले जाए। छोटे बच्चे का वहां रहना खतरे से खाली नहीं है। उसे चोट लग सकती है। जब वह मेरी बात नहीं सुनेगी और वहां नहीं आएगी तो मैं गुस्से में आ कर उसे एक लात रसीद कर दूंगा।’ 

यही सोचते-सोचते जोश में आ कर उसने आटे से भरे मटके को ही लात दे मारी। मटका धड़ाम से नीचे आ गिरा। एक ही मिनट में उसका सारा बिस्तर और धरती आटे से भर गए। मटका टूट चुका था। 

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‘हाय! सारा आटा बरबाद हो गया। मेरी बकरियां, गौएं, भैंसें और घोडे भी चले गए। हाय! मेरा बड़ा-सा घर, मेरी बीवी, मेरा बेटा…कहां गए वे सब?’ इस तरह बड़बड़ाता हुआ वह पंडित अपना सिर धुनने लगा। उसने खयाली पुलाव पकाने के चक्कर में वह सब भी गंवा दिया, जो उसके पास था। 

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