कभी न खराब होने वाले शव

कभी न खराब होने वाले शव 

कभी न खराब होने वाले शव 

शव अक्सर सड़ जाते हैं। पर जब उन्हें दवाई आदि लगा कर रखा जाता है तो वो सड़ने से बच जाते हैं। मिस्र में ताबूत में रखी ममी पाई जाती हैं जो कि सदियों बाद आज भी ज्यों की त्यों सुरक्षित हैं। 

परन्तु बात तब गौर करने लायक हो जाती है जब कि शव को ममी में तबदील नहीं किया गया हो पर वह फिर भी कई सालों तक खराब न हो। वर्षों पहले भारत की एक औरत ने अपने पति के मृत शरीर को 12 सालों तक अपने पास रखा। वह उसे रोज स्नान कराती थी और उसी के साथ एक ही कमरे में सोती थी। यह एक अजीब तरह की घटना थी जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। 

विदेशों में भी इस तरह की कई घटनायें रिकॉर्ड की गई हैं। नादजा मैतेई नाम की एक दो वर्ष की रोमन बालिका की मृत्यु रोम में हो गई तो उसकी माँ ने उसके शव को ताबूत में रख दिया। पर बारह वर्षों तक नादजा की माँ को लगातार 

यह सपना आता रहा कि उसकी बेटी उसे ताबूत से निकालने की विनती कर रही हो। वह आखिर अधिकारियों को ताबूत खोलने के लिये राजी करने लगी। 1977 में उसे ताबूत खोलने की अनुमति मिल गई तो सभी यह देखकर दंग थे कि नादजा का शरीर जरा भी खराब नहीं हुआ था। 

इसी प्रकार की एक घटना नाइजीरिया की भी घटित हुई वहाँ मार्वा नाम के एक समुदाय प्रमुख ने अपने को भगवान के रूप में स्थापित किया। उनके बहुत बड़ी संख्या में अनुयायी भी हो गये थे। पर कट्टर लोगों ने उनका विरोध किया। और आखिर दिसंबर 1980 में अचानक भयानक तनाव के कारण दंगा हो गया। इसमें मार्वा सहित 8000 लोग मारे गये। 

कभी न खराब होने वाले शव 

मार्वा के अनुयायियों ने उन्हें कब्र में दफन किया। पर वह कब्र बहुत गहरी नहीं थी। लेकिन उनके अनुयायियों के अनुरोध पर और उनकी लोकप्रियता को देखकर सरकार ने उनके शरीर को खोदकर बाहर निकाल कर बर्फ पर रखने का आदेश दिया। जिससे कि उनके अनुयायी उनके दर्शन कर सकें। पर लोग यह देखकर हैरान थे कि तीन हफ्ते के बाद शरीर को कब्र से निकाले जाने के बावजूद भी मार्वा का शरीर बिल्कुल ठीक था। सड़न का कहीं नामोनिशान न था। 

इन शवों के परीक्षणों से यह भी पता चला है कि इन्हें सुरक्षित रखने के लिये किसी भी प्रकार की दवाई का प्रयोग नहीं किया गया था और न ही इनके अंदर के अंग हटाये गये थे। 

पर वैज्ञानिक जॉन क्रूज ने तीन तरह से सुरक्षित शवों के बारे में लिखा है। पहला जिन्हें सुरक्षित किया जाता है। दूसरा जो दुर्घटनावश या प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रहते हैं और तीसरे जो सच्चे न खराब होने वाले शव होते हैं। 

क्रूज ने अनेक शवों का उदाहरण दिया जिन्हें ममी में बदला नहीं गया था पर वो सुरक्षित थे। 1954 में चिली की पहाड़ी गफा में एक ममी का उन्होंने उदाहरण दिया जिसे बली के लिए बर्फीली गुफा में लाकर छोड़ दिया था। ममी करीब 500 वर्ष पुरानी बताई जाती है। 

इसी प्रकार आयरलैंड डेनमार्क और स्कॉटलैंड की कोयले की खानों में दबे अनेकों शव सुरक्षित पाये गये। 

क्रूज के अनुसार दफन करने का स्थान कई बार ऐसा होता है कि वह शवों के सड़ने की प्रक्रिया को कम या काफी हद तक रोक देता है। 

इसके अलावा हवा में ऐसा कोई तत्व होता है जो कि शरीर को सुरक्षित रखता है। सिसिली के पालरमों के कब्रिस्तान में कापुजिन पुजारी का शव कब्र में टूटी गुड़िया की तरह झूलता पाया गया था। वैज्ञानिकों के तर्क के अनुसार उस कब्रिस्तान की हवा में खास बात है कि शरीर को सखा कर ममी में बदल देती है। लेकिन यह भी एक बात गौर करने लायक है कि वहीं पर कुछ शव खराब भी हो जाते हैं। इस बात को लेकर लोग अलग-अलग व्याख्या करते हैं। कई इसे देवी की कृपा मानते हैं। 

बात कुछ भी हो इन खराब न होने वाले शवों का पूरा गहन अध्ययन करना जरूरी है। तभी रहस्यों पर से पर्दा उठाया जा सकेगा। 

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