मेले की शुरुआत कैसे हुई-mele ki shuruaat kaise hui

मेले की शुरुआत कैसे हुई,

मेले की शुरुआत कैसे हुई–mele ki shuruaat kaise hui

प्राचीन समय में जब आवागमन के साधन नहीं थे और मनुष्य को अपनी दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं के लिए दूर-दूर जाना पड़ता था, तब व्यापारी सप्ताह में किसी एक दिन नियत स्थान पर रोजाना जरूरतमंद चीजों की हाट या मेला लगाते थे।

मेले की शुरुआत कैसे हुई,

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तब लोग यहां से अनाज के बदले अपनी आवश्यकताओं की चीजें खरीद ले जाते थे। जब आवागमन के साधन उन्नत होने लगे तो मेलों का व्यापारिक महत्व कम होता गया और धीरे-धीरे मेले आमोद-प्रमोद व सांस्कृतिक उत्सवों के रूप में मनाए जाने लगे।

सभ्यता के विकास के बाद मेले देश की प्रगति तथा उसकी उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के माध्यम बन गए। उन्नीसवीं शताब्दी में क्योंकि मेले अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और व्यापार का प्रतीक बन गए, इसलिए इन्हें विश्व मेलों के नाम से पुकारा जाने लगे। पहला विश्व मेला 1851 में लंदन के हाइड पार्क में लगा। इसके लिए ‘क्रिस्टल पैलेस’ नामक भवन बनाया गया। यह मेला लगभग पांच दिन चला और इस मेले को साढ़े साठ लाख लोगों ने देखा। किंतु कांच व लोहे से बने इस भवन में 1936 में अचानक आग लगने के कारण यह नष्ट हो गया। 

अमेरिका का पहला अंतर्राष्ट्रीय मेला 1853 में न्यू यॉर्क में आयोजित हुआ। इसमें 23 देशों ने भाग लिया और पांच हजार लोगों ने अपने मंडल लगाए। इसके बाद 1876 में स्वतंत्रता की सौंवी वर्षगांठ के अवसर पर अमेरिका ने ‘पेनसिल्वेनिया’ नामक स्थान पर एक बड़े मेले का आयोजन किया, जिसमें अमेरिका द्वारा विकसित वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। उक्त मेले में ग्राहम बेल ने पहली बार अपने बनाए टेलीफोन का प्रदर्शन किया।

इसके बाद अमेरिका में विश्व का सबसे बड़ा मेला स्थल न्यू यॉर्क में 1939-40 में बनाया गया। जापान में ओसाका नामक स्थान पर लगे ‘एक्सजी-70’ मेले को छ: करोड़ लोगों ने देखा। यह मेला 1970 में लगा था। महानगरों, बड़े शहरों, कस्बों और गांवों में आज मेलों के द्वारा कला, उद्योग, व्यापार और संस्कृति विकास आदि की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाने लगा है। 

अब भारत में भी इस तरह के विश्वस्तरीय मेलों का आयोजन की सफलतापूर्वक किया गया है। उत्तर एशिया में अच्छे-खासे व्यापार की संभावनाओं के कारण विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी व्यावसायिक कंपनियां यहां अपने ‘प्रोडक्ट्स’ के प्रमोशन के लिए बड़े-बड़े स्टॉल लगाती हैं।

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