भारत के सीमा विवादों का प्रबंधन-एक जटिल कार्य पर निबंध

भारत के सीमा विवादों का प्रबंधन

भारत के सीमा विवादों का प्रबंधन-एक जटिल कार्य [IAS (Mains) 2018] 

भारत ही नहीं दुनियाभर के देश सीमा समस्या से जूझ रहे हैं। चाहे वह अमेरिका की मैक्सिको से जुड़ी समस्या हो, उत्तर एवं दक्षिण कोरिया सीमा-विवाद हो या जापान तथा चीन के बीच सेनकाक द्वीप को लेकर चल रहा विवाद। 

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि दोस्त बदल सकते हैं पर पड़ोसी नहीं। वाजपेयी जी का यह कथन हमेशा प्रासंगिक रहेगा। भारत दक्षिण एशिया के लगभग सभी देशों के साथ सीमाएँ साझा करता है। इसके अलावा भारत की चीन एवं हिन्द महासागर से लगी एक लंबी समुद्री सीमा है। ध्यातव्य है कि भारत की संप्रभुता को अक्षुण रखने हेतु भू सीमा तथा समुद्री सीमा का ठीक ढंग से प्रबंधन अति आवश्यक है। 

आजादी के बाद से ही भारत तथा पाकिस्तान एवं भारत-चीन के बीच सीमा-विवाद चला आ रहा है। हालांकि भारत की सीमा पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, चीन, नेपाल आदि से स्पर्श करती है। 

भारत ने अपनी स्वतंत्रता के पश्चात् गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई। शीतयुद्ध के भीषण दौर में वह न तो अमेरिका के गुट का सदस्य बना न ही सोवियत यूनियन का। हालांकि वर्तमान में भारत के नजदीकी संबंध रूस एवं अमेरिका दोनों से है। आजादी के बाद से ही भारत तथा पाकिस्तान एवं भारत-चीन के बीच सीमा-विवाद चला आ रहा है। हालांकि भारत की सीमा पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, चीन, नेपाल आदि से स्पर्श करती है। 

भारत-चीन सीमा-विवाद की बात करें तो यह विवाद भारत की आजादी से पहले का है। एक तरफ अक्साई चिन पर भारत दावा करता है एवं उसका तर्क है कि यह लद्दाख का हिस्सा है। वहीं दूसरी तरफ सुदूर पूर्व में स्थित मैकमोहन लाइन के दक्षिण में स्थित नेफा (North Eastern FrontierAgency) वर्तमान में अरूणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों में विवाद है। 

गौरतलब है कि चीन एवं ब्रिटिश भारत के बीच वर्ष 1914 में हए शिमला समझौते के द्वारा यह रेखा निर्धारित की गई थी। चीन इस समझौते को पूरी तरह अस्वीकार करता है तथा उसका दावा है कि ‘नेफा’ उसका हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1960 में चीन के प्रीमियर ज्होऊ एनलाई ने एक प्रस्ताव पेश किया था जिसके अंतर्गत अरुणाचल प्रदेश पर भारत की संप्रभुता तथा अक्साई चिन पर चीन के कब्जे को मान्यता दी गई थी हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। 

उल्लेखनीय है कि भारत-चीन के बीच डोकलाम विवाद के बाद भारत के प्रधानमंत्री 2018 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से वुहान में मिले। इन मुलाकात में सीमा-विवाद को शांति पूर्ण ढंग से निपटाने के लिए वार्ता हुई एवं उम्मीद जताई गई कि इस तरह के विवादों के शांति पूर्ण हल खोजे जायेंगे। इसके अतिरिक्त भारत एवं पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर सीमा विवाद रहा है। ध्यातव्य है | कि भारत का बांग्लादेश, म्यांमार तथा नेपाल के साथ भी छोटे-छोटे सीमा विवाद रहे हैं। 

दो देशों के बीच कुछ सीमाएँ ऐसी होती हैं जो प्राकृतिक होती हैं तो कुछ मानवजनित। उदाहरणार्थ टिगरिस नदी का ईरान एवं तुर्की को अलग करना, रूस एवं चीन के बीच अमूर नदी का होना प्राकृतिक है। भारत के संदर्भ में बात करें तो इसकी अधिकतर सीमाएँ राजनीतिक रूप से निर्धारित की गई हैं। भारत तथा पाकिस्तान के बीच रेडक्लिफ रेखा तथा भारत-चीन के बीच मैकमोहन रेखा इसके उदाहरण हैं। दो देशों के बीच सीमाएँ न केवल कागज पर अंकित की जाती हैं बल्कि भौतिक भूमि पर इस तरह की सीमाओं को मूर्त रूप दिया जाता है। 

भारत के लिये इसकी सीमाओं का प्रबंधन एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। भारतीय सीमा पर नेपाल, चीन, पाकिस्तान तथा म्यांमार के रास्ते अवैध व्यापार, स्मगलिंग, ड्रग्स का व्यापार, मवेशियों के व्यापार के अलावा अवैध शरणार्थियों की आवा-जाही एक गंभीर चुनौती है। सीमाओं पर प्रशिक्षित पुलिस बलों की कमी, तकनीक की न्यूनता के अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों के बीच सहयोग की कमी इन चुनौतियों को और बढ़ा देते हैं। इसके अतिरिक्त सीमापार आतंकवाद इस बिंदु की सबसे महत्त्वपूर्ण कड़ी है। 

भारतीय सीमा पर नेपाल, चीन, पाकिस्तान तथा म्यांमार के रास्ते अवैध व्यापार स्मगलिंग, ड्रग्स का व्यापार, मवेशियों के व्यापार के अलावा अवैध शरणार्थियों की आवाजाही एक गंभीर चुनौती है। 

इसी क्रम में सांस्कृतिक, जातीय एवं भाषाई समता होने के कारण स्थानीय लोगों के बीच सीमा पार संबंध कई बार बहुत खतरनाक साबित होते हैं। हालांकि भारत सरकार ने वर्ष 2018 में पाकिस्तान तथा बांग्लादेश सीमा पर ‘स्मार्ट फेसिंग’ शुरू करने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि स्मार्ट फेसिंग में तकनीक युक्त हाई रिजोल्युशन कैमरा, सेंसर तथा अत्याधुनिक बाड़ लगाई जायेगी। 

निम्नलिखित कदमों के माध्यम से सीमा समस्या का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है 

प्रत्येक सीमा क्षेत्र में कुछ-कुछ अंतराल पर प्रशिक्षित बलों से युक्त चेकपोस्ट स्थापित करना।

सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रमों को प्रोत्साहन। 

एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली का विकास करना। 

स्मार्ट फेसिंग को बढ़ावा देना। 

सीमाओं के लिये बुनियादी सिद्धांतों का कड़ाई से प्रतिपालन। 

सीमाओं पर डिजिटलीकरण को बढ़ाना 

अंततः कहा जा सकता है कि भारत की सीमा समस्या एक जटिल समस्या है परन्तु बेहतर प्रबंधन से काफी हद तक इससे निपटा जा सकता है। हालांकि वर्तमान सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं एवं काफी हद तक सीमा संबंधी विसंगतियों से निपटने में सफलता हासिल की है। 

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