सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी-मकर संक्रांति हमेशा 14 जनवरी को ही क्यों पड़ती है, जबकि अन्य किसी हिन्दू पर्व की तारीख निश्चित नहीं है?

मकर संक्रांति हमेशा 14 जनवरी को ही क्यों पड़ती है,

मकर संक्रांति हमेशा 14 जनवरी को ही क्यों पड़ती है, जबकि अन्य किसी हिन्दू पर्व की तारीख निश्चित नहीं है? 

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी- प्रचलित भारतीय काल गणना या पंचांग चंद्रमा की गति या चंद्रमास तथा प्रचलित पाश्चात्य काल गणना या ग्रेगरियन कलेंडर सूर्य गति या सौर मास पर आधारित होता है। मकर संक्रांति का अर्थ है-सूर्य का मकर राशि या मकर रेखा में प्रवेश। सौर मास तथा अंग्रेजी कलेंडर का अविभाज्य संबंध है, लिहाजा मकर संक्रांति तकरीबन 14 जनवरी को ही पड़ती है। मगर देखा जाता है कि कभी-कभी यह 13 जनवरी या 15 जनवरी को भी होती है। लीप ईयर में यह 13 जनवरी को पड़ती है।  

मकर संक्रांति हमेशा 14 जनवरी को ही क्यों पड़ती है,

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भारत में सूर्योदय के समय जो तिथि रहती है, वहीं पूरे दिन मानी जाती है। लिहाजा यदि 14 जनवरी को सूर्योदय के बाद कभी भी सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तो भारतीय उस संक्रांति को अगले दिन मनाते हैं। विदित हो कि यही एक मात्र ऐसा प्रचलित भारतीय उत्सव है, जो सूर्य-गमन पर आधारित है।

हिन्दू पर्व मकर संक्रांति को छोड़कर प्रायः अन्य सभी पर्वो की तिथियों का निर्धारण चंद्रमा परिक्रमण गति के आधार पर होता है। क्योंकि हमारे कलेंडर वर्ष का निर्धारण पृथ्वी के सूर्य के चारों तरफ लगाए जाने वाली परिक्रमा की वार्षिक गति के आधार पर होता है, अत: अन्य पर्यों, जिनका निर्धारण चंद्रमा की गति पर होता है, का निर्धारण प्रत्येक वर्ष निश्चित तिथि पर नहीं हो पाता।

मकर संक्रांति तिथि का निर्धारण पृथ्वी के सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाए जाने अर्थात् वार्षिक गति के परिणामस्वरूप होता है। चूंकि यह गति निश्चित होती है, अतः इसी आधार पर हमारे कलेंडर वर्ष का निर्धारण होता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति हमेशा 14 जनवरी को ही पड़ती है।

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