मजेदार प्रेरक कहानियां-एक अच्छी सलाह

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राजा ब्रह्मदत्त का एक मंत्री बहुत ही समझदार था। राजा को उस पर पूरा भरोसा था। मंत्री हमेशा राजा को नेक सलाह देता और राजा उसकी बात अवश्य मानते। ब्रह्मदत्त बहुत ज्ञानी था। उसे कई भाषाओं का ज्ञान था। कई कलाओं में निपुण मंत्री राजा का दायां हाथ था। महाराज हर स्थान पर अपने मंत्री को साथ ले कर जाते क्योंकि वे जानते थे कि उन्हें किसी भी समय अपने बुद्धिमान मंत्री की आवश्यकता पड़ सकती है। वह उनकी प्रत्येक समस्या की रामबाण औषधि था। 

मंत्री पशुओं व पक्षियों की बोली भी समझ सकता था। एक दिन, नगर का भ्रमण करता हुआ वह एक नदी के किनारे पहुंचा, वहां कुछ मछुआरे जाल बिछा कर मछलियां पकड़ रहे थे। मंत्री के पास उस दिन कोई काम नहीं था। ठंडी हवा चल रही थी, इसलिए वह वहीं नदी के किनारे बैठ कर मछुआरों को देखने लगा। उसने देखा कि एक बड़ी मछली दूसरी मछली का पीछा करने में मग्न थी। वह उनके पास चला गया ताकि मछलियों की बातें सुन सके। समय काटने का यह सबसे अच्छा तरीका था।

ऐसा करना मंत्री को अच्छा भी लगता था। पशु व पक्षियों की बातें मनुष्य की दुनिया से निराली थीं। यह एक ऐसी दुनिया थी जिसकी बातें कोई भी मनुष्य जान नहीं पाता था। 

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एक-दूसरे का पीछा करने वाली मछलियां पति-पत्नी थीं। पत्नी बहुत ही सुंदर और रूपहली मछली थी, जो बहुत ही चतुराई से पानी में तैर रही थी। पति मछली को अपनी पत्नी से इतना प्यार था कि वह उसकी ओर से आंखें तक नहीं हटा रहा था। वह लगातार उसका पीछा कर रहा था। उसे अपनी पत्नी के सिवा कुछ दिखाई ही नहीं देता था। 

इस दौरान मछुआरों ने अपने जाल तैयार किए और उन्हें नदी में फेंक दिया। मादा मछली हमेशा अपने आसपास के खतरों के लिए सावधान रहती थी। उसे पता था कि मछुआरों के जाल और डोरियों से दूरी बना कर रखनी चाहिए। उसने ज्यों ही जाल देखा, वह उससे परे हट गई। 

वहीं दूसरी ओर, पति मछली अपने ही ख्यालों में खोई चली आ रही थी। हमेशा की तरह उसे अपने आसपास की सुध नहीं थी। इस तरह उसे नदी में फेंके जा रहे जाल का भी पता नहीं चला। इससे पहले कि पत्नी मछली अपने पति को सावधान कर पाती, वह उस जाल में फंस गया और मछुआरे उसे किनारे पर ले गए। उन्होंने उसे जाल से निकाला और पानी से भरी बड़ी बाल्टी में छोड़ दिया। वह उस बड़ी बाल्टी में तड़पते हुए रोने-बिलखने लगा। वह सबके सामने गिड़गिड़ा रहा था कि उसे उसकी पत्नी से अलग न किया जाए, क्योंकि वह उसके बिना जी नहीं सकता। 

मंत्री वह सारा तमाशा देख रहा था। उसने पति के रोने का स्वर सुना और सोचने लगा, ‘यह कितना मूर्ख है। इसे अपनी पत्नी से इतना प्यार है कि अपने आसपास मंडरा रहे खतरे को भी नहीं देख सका। ऐसा मोह इंसान को कमजोर बना देता है।

अगर यह ऐसे ही मूर्खता से भरे विचारों के साथ मर गया तो इसे कई जन्मों तक इसी तरह दुख सहना होगा। मुझे इसकी मदद करनी चाहिए।’ 

मंत्री मछुआरे के पास गया और उससे बोला कि उसे एक मछली चाहिए। मछुआरे तो मंत्री को पहचानते थे। उन्होंने मंत्री को प्रणाम किया और मनपसंद मछली दे दी। 

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मंत्री ने उस मछली को पानी में छोड़ने से पहले कहा, “मूर्ख! आज तुम मारे जाते और फिर से जन्म पा कर कष्टों से भरा जीवन जीते। यह सब तुम्हारे मोह की वजह से ही हो रहा है। मूर्ख! अपनी ही इच्छाओं के जाल में फंस कर पैदा होते हैं और मरते-खपते हैं।” 

पति मछली ने मंत्री का एहसान माना और इसके बाद वह अपने आसपास होने वाली घटनाओं से हमेशा सावधान रहता था। ऐसा करने से वह आनेवाली कई विपत्तियों से बच जाता था। 

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