मजेदार कहानियां- राजा की चेतावनी

मजेदार कहानियां- राजा की चेतावनी

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बहुत समय पहले की बात है, कई तरह के बंदरों का बड़ा कुनबा एक घने जंगल में रहता था। उनका नेता बहुत समझदार था। उसका शरीर अत्यंत विशाल था। वह अपनी उदारता और बुद्धिमत्ता के लिए जाना जाता था। लोग उसे सिद्ध आत्मा मानते थे। 

वह अपनी प्रजा को उनकी सुरक्षा के बारे में हर तरह के निर्देश देता और उनकी रक्षा करता। एक दिन उसने कहा, “मेरे दोस्तो, जंगल के सभी फल सेहत देने वाले नहीं होते। इनमें से कुछ जहरीले और खतरनाक भी होते हैं। किसी भी नई चीज को खाने या पीने से पहले उसकी जांच अवश्य कर लें या फिर उसके बारे में मुझसे पूछ लें।” सारे बंदर अपने नेता की बात समझ गए। 

एक दिन वे सब अपने भोजन की तलाश में एक ऐसे शांत व सुंदर तालाब के पास पहुंचे, जिसके आसपास लंबे बांसों का झुंड था। उन्हें बहुत प्यास लगी थी। पानी पीने के लिए वे वहां रुकने लगे, तभी एक बंदर चिल्लाया, “रुको! तुम्हें याद नहीं कि हमारे नेता ने क्या कहा था?” 

“नहीं! हमें सब कुछ याद है। हम अपने नेता के आने तक तालाब से पानी नहीं पीएंगे,” सभी ने एक आवाज में आश्वासन दिया। सब वहीं बैठ गए और अपने नेता के आने का इंतजार करने लगे। 

जब उनका नेता वहां आया तो उसने तालाब का एक चक्कर काटा और उसके आसपास की जमीन को ध्यान से देखा, जांचा-परखा। 

मजेदार कहानियां- राजा की चेतावनी

फिर वह वहां गया जहां सारे बंदर उसका इंतजार कर रहे थे। उसने कहा, “दोस्तो, यहां पानी की ओर जाने वाले पैरों के निशान तो दिख रहे हैं, लेकिन उस ओर से वापस आने वाले पैरों के निशान नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस तालाब के पानी में मत जाना। मुझे लगता है कि इसमें कोई शैतान रहता है जो पानी पीने के लिए आने वालों को निगल लेता है। यही वजह है कि वहां से वापस आने वाले जानवरों के पैरों के निशान नहीं दिखाई दे रहे। ऐसा लगता है कि कोई तालाब से जिंदा वापस ही नहीं आता।” सारे बंदर बहुत थके हुए थे इसलिए वे वहीं चुपचाप बैठ गए। 

कुछ ही देर बाद, उन्होंने पानी से एक भयंकर राक्षस को बाहर आते देखा। वह सफेद चेहरे, बड़े से पेट, हरी आंखों, लाल पंजों तथा तेज नुकीले दांतों वाला एक ब्रह्म राक्षस था। वह गरजा, “तुम लोग पानी क्यों नहीं पी रहे? तुम तो प्यासे हो, तुम्हें पानी अवश्य पीना चाहिए।” इसके बाद वह तालाब में वापस लौट गया। 

प्यासे बंदरों ने अपने राजा की ओर देखा और राजा ने बांसों की ओर। बांसों में गांठें थीं इसलिए वे अंदर से खोखले नहीं थे। राजा बोधिसत्व था। उसने बांस में एक छड़ी डाल कर घुमाई तो उसकी सभी गांठ खुल गईं और वह पूरी तरह से खोखला हो गया। अब उस बांस की मदद से, दूर खड़े हो कर ही, तालाब से पानी पीया जा सकता था। 

जब वह उस बांस से पानी पीने लगा तो एक करिश्मा हुआ। बाकी बांसों की गांठें भी अपने-आप खुल गईं। अब सारे बंदर उनसे पानी पी सकते थे। सभी ने तालाब के जल में घुसे बिना दूर बैठकर अपनी प्यास बुझाई। इस तरह उनके नेता ने उन्हें सिखा दिया था कि किसी भी नई स्थिति का सामना करने से पहले भली प्रकार से उसकी जांच कर लेनी चाहिए। जो लोग कोई भी निर्णय लेते समय अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीं करते, वो स्वयं विपत्ति को बुलावा देते हैं, उसमें फंसते हैं और फिर नष्ट हो जाते हैं।

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