मजेदार कथा-उड़ने वाला संदूक

मजेदार कथा

मजेदार कथा-उड़ने वाला संदूक

काफी समय पहले की बात है। किसी नौजवान के पास उड़ने वाला एक जादुई संदूक था। उसने फैसला किया कि वह उसमें बैठकर दुनिया की सैर करने जाएगा। वह संदूक में बैठ गया। संदूक आकाश में उड़ने लगा और शीघ्र ही वह एक सुंदर शहर में जा पहुंचा। 

शहर में उस नौजवान को एक सुंदर महल दिखाई दिया, जिसमें बड़ी-बड़ी खिड़कियां लगी थीं। उसे पता चला कि उस महल में एक राजकुमारी रहती है। राजकुमारी को देखने की इच्छा से वह महल के भीतर चला गया। राजकुमारी उसे देखकर हैरान रह गई।

नौजवान ने राजकुमारी को अपनी सारी कहानी सुनाई। इसके बाद उसने राजकुमारी को झीलों और पर्वतों के किस्से सुनाए। वे जादुई किस्से सुनकर राजकुमारी की खुशी की सीमा न रही। वह उस नौजवान से मन-ही-मन प्रेम करने लगी। उसने नौजवान से कहा कि वह अगले दिन उसके माता-पिता से भेंट करने के लिए आए। नौजवान उसके माता-पिता से मिलने के लिए बहुत उत्सुक हो गया। 

मजेदार कथा

अगली सुबह वह नौजवान पुनः उस महल में गया। सबसे पहले उसकी मुलाकात रानी से हुई। रानी ने उससे कहा, “तुम हमें कोई ऐसी कहानी सुनाओ, जिससे नैतिक शिक्षा भी मिलती हो।” तभी राजा ने कहा, “लेकिन वह कहानी नैतिकता का पाठ सिखाने के बावजूद मजेदार भी होनी चाहिए।” । 

नौजवान कहानी सुनाने लगा, “किसी व्यक्ति के रसोईघर में माचिसों का एक बंडल था। माचिसों को इस बात का घमंड था कि उन्हें बड़े पाइन वृक्ष से तैयार किया गया है। लेकिन वे अक्सर इस बात पर दुखी होते कि उन्हें रसोईघर के आम और हल्के सामानों के साथ रहना पड़ता है। 

एक दिन मेज पर रखे लोहे के एक बर्तन ने दुखी स्वर में कहा, ‘जिस दिन से मैं इस दुनिया में आया हूं, खाना ही पकाता चला जा रहा हूं। मैंने कभी बाहरी दुनिया नहीं देखी।’ 

तभी चकमक बॉक्स ने क्रोधित होकर लोहे के बर्तन से कहा, ‘यहां आओ। हम लोग रोज शाम को खूब मौज-मस्ती करते हैं। अतः तुम बाहरी दुनिया के बारे में क्यों सोचते हो?’ 

इसके बाद पतीले ने एक सलाह दी, ‘चलो, आज कुछ नया करते हैं। आओ, सभी मिल-जुलकर गाना गाएं और खुशियां मनाएं।’ 

मजेदार कथा

रसोईघर की सभी चीजों को यह बात अच्छी लगी। प्लेटें इतनी खुश थीं कि वे जोर-जोर से खनकने लगीं। चिमटे ने सोचा कि वह क्यों पीछे रहे, अतः वह भी नाचने लगा। इस तरह सभी नाचने और गाने का आनंद लेने लगे। 

माचिसों ने सोचा कि केवल आम लोग ही ऐसे मूखों की तरह पेश आते हैं, जैसे कि ये बर्तन कर रहे हैं और शोर-शराबा मचा रहे हैं। सभी माचिस सोच रहे थे कि वे इसके आगे क्या करें, तभी नौकरानी रसोईघर में आ गई। उसे देखते ही सभी एकदम शांत हो गए।

 जब नौकरानी ने माचिस जलाई, तो वे सोचने लगे, ‘अब ये सब देखेंगे कि हम कितने खास हैं। हम कितनी रोशनी देते हैं…।’ इससे पहले कि वे आगे सोचते, उनकी रोशनी बुझ गई…।” 

राजा और रानी को उस नौजवान की कहानी बहुत पसंद आई। राजा ने कहा, “इस कहानी के माध्यम से हमें अच्छी शिक्षा मिलती है और यह कहानी मजेदार भी है।” रानी बोली, “वाह! कितनी सुंदर कहानी है। ऐसा लगा, मानो मैं भी रसोईघर में मौजूद थी।” राजा और रानी उस नौजवान से प्रभावित हो गए। उन्होंने सोचा कि उनकी पुत्री के लिए उससे बेहतर कोई दूसरा वर नहीं हो सकता। उन्होंने उन दोनों का विवाह बड़ी धूमधाम से कर दिया। वे लोग खुशी-खुशी रहने लगे। 

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