मछली सांस कैसे लेती है और पानी में कैसे तैरती है? 

मछली सांस कैसे लेती है और पानी में कैसे तैरती है? 

मछली सांस कैसे लेती है और पानी में कैसे तैरती है? 

दुनिया भर में मृत सागर तथा उबलते पानी को छोड़कर हर तरह के जलस्रोत में मछलियां पाई जाती हैं। मछलियों की करीब 30 हजार प्रजातियां उपलब्ध हैं, जबकि बाकी प्रजातियां खारे पानी में ही पाई जाती हैं। मीठे पानी की मछलियां सांस लेने के लिए अपने मुंह और गलफड़ों में पानी लेती हैं लेकिन कभी भी पानी पीती नहीं। इसके बावजूद वे कभी प्यासी नहीं रहती हैं, क्योंकि समुद्र का पानी उन मछलियों के शरीर से लगातार द्रव अवशोषित करता रहता है और अपने वजन को संतुलित करने के लिए उन्हें खूब पानी पीना पड़ता है। 

प्रकृति के प्रत्येक प्राणी की भांति जीवित रहने के लिए मछलियों को भी सांस लेनी पड़ती है, लेकिन जहां हम हवा से ऑक्सीजन लेते हैं, वहीं मछलियां पानी में घुली ऑक्सीजन को अवशोषित करती हैं। मछलियों के शरीर में फेफड़े के स्थान पर सांस लेने के लिए गलफड़े (विशेष श्वसन अंग) होते हैं, जिनके जरिए पानी अंदर जाता है और ये पानी में घुली हुई ऑक्सीजन को सोखकर उसे रक्त संचार में पहुंचा देते हैं।

 पानी में तैरने के लिए मछली की पूंछ उसकी सबसे बड़ी सहायक होती है। मछली अपनी मासंपेशियों को सिकोड़कर अथवा फैलाकर पानी में तैरती है और तैरते समय यह पूंछ द्वारा वाहन के स्टीयरिंग की भांति दिशा बदलने का कार्य करती है। अपने अन्य पंखों के जरिए तैरते समय मछली अपने शरीर का संतुलन बनाए रखती है। 

 

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