पौराणिक कहानी-माँ के इस मंदिर में तेल या घी नहीं बल्कि पानी से जलता है दिया

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पौराणिक कहानी-माँ के इस मंदिर में तेल या घी नहीं बल्कि पानी से जलता है दिया !

माँ भगवती अपने भक्तो पर होने वाले कष्टों को तुरंत हर लेती है तथा माता ने अनेको बार ऐसे चमत्कार भी दिखाए है जिनसे उनके भक्तो की माता के प्रति श्रद्धा और भी अधिक बढ़ जाती है. माता के अनेको अद्भुत चमत्कारों में से एक चमत्कार आपको माता के एक प्राचीन मंदिर गडियाघाट(Hindu Goddess Temple) में भी साक्षात देखने को मिल सकता है क्योकि यहाँ माता के मंदिर(Hindu Goddess Temple) में जलने वाली ज्योत को जलाने के लिए तेल या घी आदि का सहारा नहीं लेना पड़ता बल्कि यहाँ माता की ज्योति पानी से जलती है.

माता का यह चमत्कार भक्तो के मध्य आस्था का केंद्र बना हुआ है तथा माता के इस चमत्कार को देखने के लिए भक्त मंदिर में दर्शन के लिए काफी अधिक संख्या में यहाँ आ रहे है.

माता का यह चमत्कारी मंदिर(Hindu Goddess Temple) आगर मालवा के तहसील मुख्यालय नलखेड़ा से लगभग 15 किलोमीटर दूर गड़िया के पास कालीसिंधि नदी पर स्थित है. माता का यह मंदिर गडियाघाट के नाम से प्रसिद्ध है. माता के इस मंदिर में चमत्कारिक रूप से पानी द्वारा जल रहे दिप के विषय में मंदिर के पुजारी का कहना है की माता का यह चमत्कार पांच सालो से चला आ रहा है अर्थात पांच सालो से मंदिर में यह दीपक केवल पानी द्वारा ही ज्योतिमान है. बताया जाता है की मंदिर के पुजारी को एक बार माता ने स्वप्न में आकर दर्शन दिए और मंदिर का दिया तेल के स्थान पर पानी से जलाने के लिए कहा.

जब अगले दिन पुजारी ने मंदिर में माता की स्वप्न वाली बात को याद कर पानी से दिया जलाया तो वह जल उठा और देखते ही देखते माता का यह चमत्कार हर जगह फेल गया. तब से अब तक माँ का यह चमत्कारी दिया पानी से निरंतर जलता आ रहा है और इस दिए को जलाने के लिए कालीसिंधि नदी का पानी प्रयोग में लाया जाता है.

मंदिर(Hindu Goddess Temple) की यह ज्योत केवल बरसात के मौसम में नहीं जलती क्योकि मंदिर की सतह समान्य से बहुत नीचे है तथा बरसात में कालीसिंधि नदी के पानी का स्तर काफी अधिक हो जाता है जिसे मंदिर पानी में डूब जाता है. इसके बाद फिर से यह ज्योत शारदीय नवरात्र में जला दी जाती है तथा माता के इस चमत्कार के दर्शन भक्तो को अगले वर्षाकाल तक निरंतर होते रहते है.

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