Lord Shiva Story in hindi-शिव की जटा में गंगा 

Lord Shiva Story in hindi-शिव की जटा में गंगा 

Lord Shiva Story in hindi-शिव की जटा में गंगा 

सगर अयोध्या के राजा थे पर निःसंतान थे। संतान की चिंता में डूबे राजा अपनी दो पत्नियों को लेकर, शिव भगवान को प्रसन्न करने के लिए, कैलाश पर्वत पर घोर तपस्या करने चले गए। कई दिनों की कठोर तपस्या से भगवान प्रसन्न होकर प्रकट हुए और बोले, “राजन्, मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हुआ, वर मांगो।” 

राजा ने अपनी रानियों के साथ शिव भगवान को नमन कर प्रार्थना की, “हे महादेव! हमें संतति का आशीर्वाद दें।” 

अति प्रसन्न शिव भगवान ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा, “एक पत्नी से तुम्हारे साठ हजार पुत्र होंगे पर उनका नाश हो जाएगा। तुम्हारी दूसरी पत्नी को मात्र एक पुत्र होगा पर उसके वंशज तुम्हारे राजवंश की शोभा बढ़ाएंगे।” 

आशीर्वाद प्राप्त कर राजा रानी वापस आ गए। समय के अंतराल में एक रानी ने साठ हजार पुत्रों को जन्म दिया। वे सभी बालक शूरवीर थे। दूसरी रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया। वह भी अन्य भाइयों के साथ बड़ा हुआ और योद्धा बना। 

एक बार अपने राज्य के विस्तार के लिए राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया। प्रथानुसार घोड़ा छोड़ा गया। उसे विभिन्न राज्यों से होकर गुजरना था। जिस राज्य में भी घोड़ा रुकता वह भूमि यज्ञ करने वाले राजा की हो जाती अथवा उस राज्य के राजा को यज्ञ करने वाले राजा से युद्ध करना होता और जीतने वाले का राज्य होता। 

राजा सगर के यज्ञ का सुनकर इन्द्र भयभीत हो उठे। उन्होंने सोचा, “नहीं, नहीं! मैं घोड़े को अपने राज्य में नहीं आने दे सकता… यदि वह रुक गया तो? अर्थात् क्या मैं सगर को अपना राज्य दे दूँ?” 

मन ही मन उन्होंने निश्चय किया, “हूँ… मैं घोड़े को ही पकड़कर छिपा देता हूँ…” 

ऐसा निश्चय कर इन्द्र ने घोड़े को ले जाकर पाताल लोक में कपिल मुनि के आश्रम के बाहर बाँध दिया। 

राजा सगर को घोड़ा गायब होने की बात पता चली। उन्होंने अपने साठ हजार पुत्रों को आज्ञा देते हुए कहा, “वत्स! हमारे यज्ञ के घोड़े को अवश्य ही किसी ने चुरा लिया है। उसे तीनों लोकों में जाकर ढूँढो और दोषी जहाँ भी मिले उसका अंत कर दो।” 

सगर के पुत्रों ने उस घोड़े को तीनों लोकों में ढूँढना प्रारम्भ कर दिया। अंततः वह घोड़ा कपिल मुनि के आश्रम के बाहर बंधा हुआ मिला। क्रोधवेश में वे कपिल मुनि के आश्रम में गए। हजारों वर्षों से ध्यानस्थ कपिल मुनि आँखें बंद किए बैठे थे। उन्हें जगाते हुए पुत्रों ने कहा, “अरे चोर! तेरी हिम्मत कैसे हुई हमारे घोड़े को यहाँ लाकर बाँधने की… क्या तम अपने भयंकर अपराध से अवगत हो?” 

मुनि ने धीरे से आँखें खोलीं और पुत्रों को देखा। वर्षों के तप के संचित ताप से पलक झपकते ही वे सभी जलकर भस्म हो गए। उनकी आत्माएँ तीनों लोकों में भटकती रहीं, उन्हें मुक्ति नहीं मिली। 

इधर राजा सगर पुत्रों के नहीं लौटने से चिंतित हो गए। अपने पौत्र अंशुमन को बुलाकर उन्होंने कहा, “प्रिय राजकुमार, तुम्हारे चाचा अवश्य ही कहीं भटक गए हैं। उन्हें ढूँढकर वापस लाने का उत्तरदायित्व मैं तुम्हें सौंपता हूँ।” 

अंशुमन उनकी खोज में निकला और अंततः कपिल मुनि के आश्रम के बाहर उन्हें भस्म रूप में पड़ा पाया। अंशुमन अत्यंत विनम्र स्वभाव का था। ध्यानमग्न मुनि को देखकर वह उनके समक्ष नमन की मुद्रा में चुपचाप बैठ गया। 

अपनी आँखें खोलने पर मुनि ने राजकुमार का बैठा पाया। वे मुस्कराए। अंशुमन ने अत्यधिक विनम्रता से निवेदन किया, 

“प्रणाम गुरुदेव! मैं अपने चाचाओं को ढूंढने निकला था। आपके आश्रम के बाहर उनको भस्म देखकर मैं अनुमान लगा सकता हूँ कि यहाँ क्या घटित हुआ होगा… उनके अशिष्ट व्यवहार के लिए मैं करबद्ध क्षमाप्रार्थी हूँ। कृपया उन्हें जीवन दान दें।” 

Lord Shiva Story in hindi

कपिल मुनि ने कहा, “प्रिय राजकुमार, मैं ऐसा नहीं कर सकता। उनकी मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने मुझपर आक्रमण करने का पाप किया है फलतः उनकी आत्मा तीनों लोकों में भटक रही है। मात्र गंगाजल ही उन्हें उनके पापों से मुक्ति दिला सकता है। जाकर ब्रह्मदेव की आराधना करो, वही तुम्हारा भला करेंगे।” 

अंशुमन ने घर आकर राजा सगर को सारी बात बताई। राजा सगर ने ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप प्रारम्भ कर दिया पर दुर्भाग्यवश उनका देहावसान हो गया। अंशुमन राजगद्दी पर बैठा। अपने दादा की अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए उसने कठोर तप प्रारम्भ कर दिया पर वह भी असफल रहा। 

अंशुमन के पुत्र दिलीप ने भी ब्रह्मा को प्रसन्न करने का प्रयास किया पर असफल रहे। अंततः दिलीप के पुत्र भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए ब्रह्मा की उपासना करी। ब्रह्मा ने अंततः प्रसन्न होकर गंगा को बुलाकर कहा, “हे गंगे! ब्रह्मलोक छोड़कर तुम्हारे पृथ्वी पर जाने का समय आ गया है। तुम्हारे लिए धरती पर बड़ा उत्तरदायित्व है। तुम पृथ्वी पर जाकर आत्माओं को पापमुक्त करो।” 

देवी गंगा ने कहा, “हे ब्रह्मदेव! मुझे क्षमा करें। मैं ऐसा नहीं कर सकती। मैं अपने वेग को धरती पर संभाल नहीं पाऊँगी… यदि संपूर्ण पृथ्वी जलमग्न हो गई तो?” 

ब्रह्मदेव ने उत्तर दिया, “गंगा, तुम शिव के पास जाकर उनसे सहायता मांगो।” 

Lord Shiva Story in hindi

देवी गंगा शिव के पास गईं और उन्हें अपनी चिंता बताई। शिव भगवान ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा, “हे गंगा! तुम्हारी चिंता सही है। चिंतित मत होओ। मैं तुम्हारे वेग को अपनी जटा में संभाल लूंगा।” 

इस प्रकार शिव भगवान ने आकाश से उतरी गंगा का वेग अपने सिर की जटा में समाहित कर लिया। शिव के सम्पर्क ने गंगा को पावन बना दिया। तत्पश्चात् एक पतली धार के रूप में गंगा का उद्गम शिव भगवान की जटा से हुआ और वह धरती पर आईं। धरती पर फैलकर उन्होंने सबको पावन किया तथा आत्माओं को मुक्ति प्रदान किया। 

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